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स्टार्टअप इंडिया FoF 2.0: DPIIT ने ₹10,000 करोड़ के कोष के लिए जारी किए परिचालन दिशानिर्देश

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स्टार्टअप इंडिया FoF 2.0: DPIIT ने ₹10,000 करोड़ के कोष के लिए जारी किए परिचालन दिशानिर्देश

सारांश

डीपीआईआईटी ने स्टार्टअप इंडिया फंड ऑफ फंड्स 2.0 के लिए ₹10,000 करोड़ के कोष हेतु परिचालन दिशानिर्देश जारी किए। सिडबी प्राथमिक एजेंसी होगी। सेबी-पंजीकृत एआईएफ के जरिए स्टार्टअप्स में निवेश होगा। वल्लभ भंसाली और राजेश गोपीनाथन जैसे विशेषज्ञ चयन समिति में शामिल।

मुख्य बातें

डीपीआईआईटी ने 25 अप्रैल 2025 को स्टार्टअप इंडिया फंड ऑफ फंड्स 2.0 के परिचालन दिशानिर्देश जारी किए।
यह योजना ₹10,000 करोड़ के कोष के साथ सेबी-पंजीकृत श्रेणी 1 और 2 एआईएफ के माध्यम से संचालित होगी।
सिडबी (SIDBI) प्राथमिक कार्यान्वयन एजेंसी के रूप में एआईएफ चयन और निगरानी करेगा।
एआईएफ को डीप टेक, माइक्रो वीसी, विनिर्माण और क्षेत्र-विशेष — चार खंडों में वर्गीकृत किया गया है।
चयन समिति में वल्लभ भंसाली, डॉ.
अशोक झुनझुनवाला, राजेश गोपीनाथन सहित पांच प्रतिष्ठित विशेषज्ञ शामिल हैं।
योजना का लक्ष्य सरकारी पूंजी को उत्प्रेरक के रूप में उपयोग कर निजी निवेश को कई गुना बढ़ाना है।

नई दिल्ली, 25 अप्रैल 2025वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के अंतर्गत उद्योग संवर्धन और आंतरिक व्यापार विभाग (डीपीआईआईटी) ने स्टार्टअप इंडिया फंड ऑफ फंड्स 2.0 (एफओएफ 2.0) के परिचालन से जुड़े आधिकारिक दिशानिर्देश जारी कर दिए हैं। ये दिशानिर्देश ₹10,000 करोड़ के विशाल कोष के प्रबंधन, संचालन और निगरानी के लिए एक सुव्यवस्थित ढांचा प्रस्तुत करते हैं, जिसका मूल उद्देश्य भारत के स्टार्टअप इकोसिस्टम में पूंजी के प्रवाह को अधिक कुशल और समावेशी बनाना है।

योजना की संरचना और क्रियान्वयन तंत्र

यह योजना सेबी (SEBI) में पंजीकृत श्रेणी एक और दो के वैकल्पिक निवेश कोषों (AIF) के माध्यम से संचालित होगी। ये एआईएफ डीपीआईआईटी द्वारा मान्यता प्राप्त स्टार्टअप्स में सीधे निवेश करेंगे। इस ढांचे से पूंजी आवंटन में अनुशासन बनाए रखने के साथ-साथ निजी निवेशकों को भी आकर्षित किया जा सकेगा।

भारतीय लघु उद्योग विकास बैंक (सिडबी) इस योजना की प्राथमिक कार्यान्वयन एजेंसी के रूप में कार्य करेगा। सिडबी एक सुव्यवस्थित एआईएफ चयन और निगरानी प्रक्रिया के जरिए योजना को जमीन पर उतारेगा। इसके अतिरिक्त, डीपीआईआईटी क्षेत्रीय पहुंच और संस्थागत क्षमता निर्माण के लिए अन्य कार्यान्वयन एजेंसियों को भी इस प्रक्रिया में शामिल करेगा।

एआईएफ का खंडवार वर्गीकरण

इकोसिस्टम की विशेष कमियों को दूर करने के लिए परिचालन दिशानिर्देशों में एआईएफ को चार प्रमुख खंडों में बांटा गया है:

1. गहन प्रौद्योगिकी-केंद्रित कोष — डीप टेक स्टार्टअप्स के लिए। 2. माइक्रो वेंचर कैपिटल फंड — शुरुआती चरण के स्टार्टअप्स को सहयोग देने के लिए। 3. नवोन्मेषी विनिर्माण कोष — प्रौद्योगिकी-आधारित मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र पर केंद्रित। 4. क्षेत्र और चरण-संबंधी फंड — विशेष उद्योग क्षेत्रों और निवेश चरणों के लिए।

प्रत्येक खंड के लिए कोष सीमा, सरकारी योगदान की अधिकतम सीमा, कार्यकाल और न्यूनतम निजी पूंजी जुटाने का अनुपात स्पष्ट रूप से निर्धारित किया गया है।

वेंचर कैपिटल निवेश समिति और चयन प्रक्रिया

दिशानिर्देशों में एआईएफ चयन के लिए दो-चरणीय प्रक्रिया तय की गई है। पहले चरण में कार्यान्वयन एजेंसी प्रारंभिक जांच करेगी, जिसके बाद वेंचर कैपिटल निवेश समिति टीम के ट्रैक रिकॉर्ड, फंड प्रबंधन क्षमता और निवेश रणनीति के आधार पर अंतिम मूल्यांकन करेगी।

इस प्रतिष्ठित समिति में शामिल हैं — वल्लभ भंसाली, डॉ. अशोक झुनझुनवाला, डॉ. रेणु स्वरूप, डॉ. चिंतन वैष्णव और राजेश गोपीनाथन। ये विशेषज्ञ डीप टेक, मैन्युफैक्चरिंग, नीति निर्माण और वेंचर इकोसिस्टम में विविध और गहन अनुभव रखते हैं।

उत्प्रेरक भूमिका और इकोसिस्टम क्षमता निर्माण

स्टार्टअप इंडिया एफओएफ 2.0 को प्रत्यक्ष निवेशक नहीं, बल्कि एक उत्प्रेरक (Catalyst) के रूप में डिजाइन किया गया है। इसका लक्ष्य है कि सरकारी पूंजी के जरिए निजी निवेश को कई गुना बढ़ाया जाए। न्यूनतम निजी पूंजी जुटाने की अनिवार्यता से बाजार-आधारित अनुशासन सुनिश्चित होगा।

इसके अलावा, योजना से प्राप्त रिटर्न का एक हिस्सा मेंटरशिप, साझा इंफ्रास्ट्रक्चर और इकोसिस्टम विकास जैसी पहलों में लगाया जाएगा। प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में संबंधित मंत्रालयों, विभागों और संस्थागत निवेशकों के सह-निवेश का भी प्रावधान किया गया है।

ऐतिहासिक संदर्भ और व्यापक प्रभाव

गौरतलब है कि स्टार्टअप इंडिया एफओएफ 1.0 को 2016 में ₹10,000 करोड़ के कोष के साथ लॉन्च किया गया था और इसके तहत देशभर में सैकड़ों स्टार्टअप्स को वित्तपोषण मिला। एफओएफ 2.0 उसी नींव पर खड़ा है, लेकिन इसमें गहन प्रौद्योगिकी, विनिर्माण और भौगोलिक विविधता पर विशेष जोर दिया गया है — जो पहली योजना की कमियों को दूर करने की कोशिश है।

यह योजना ऐसे समय में आई है जब भारत विश्व के तीसरे सबसे बड़े स्टार्टअप इकोसिस्टम के रूप में उभर चुका है और 100 से अधिक यूनिकॉर्न का घर बन गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि एफओएफ 2.0 घरेलू वेंचर कैपिटल की गहराई बढ़ाने और भारत को एक अग्रणी वैश्विक नवाचार केंद्र के रूप में स्थापित करने में निर्णायक भूमिका निभा सकता है।

आने वाले महीनों में सिडबी द्वारा पहले दौर के एआईएफ के लिए आवेदन आमंत्रित किए जाने की संभावना है, जिससे इस महत्वाकांक्षी योजना का क्रियान्वयन औपचारिक रूप से शुरू होगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो अब तक वेंचर फंडिंग से वंचित रहे हैं। एफओएफ 1.0 की सबसे बड़ी आलोचना यही थी कि फंडिंग मुंबई-बेंगलुरु-दिल्ली के दायरे से बाहर नहीं निकल पाई। 2.0 में भौगोलिक विविधता का उल्लेख तो है, लेकिन जब तक जमीनी क्रियान्वयन नहीं होता, यह सवाल खुला रहेगा कि क्या सरकारी पूंजी सही हाथों तक पहुंच रही है।
RashtraPress
2 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

स्टार्टअप इंडिया फंड ऑफ फंड्स 2.0 क्या है?
स्टार्टअप इंडिया फंड ऑफ फंड्स 2.0 (एफओएफ 2.0) डीपीआईआईटी द्वारा संचालित ₹10,000 करोड़ का एक सरकारी कोष है, जो सेबी-पंजीकृत वैकल्पिक निवेश कोषों (एआईएफ) के माध्यम से मान्यता प्राप्त भारतीय स्टार्टअप्स में निवेश करेगा। इसका उद्देश्य भारत के स्टार्टअप इकोसिस्टम में पूंजी प्रवाह को बढ़ाना और निजी निवेश को प्रोत्साहित करना है।
एफओएफ 2.0 को कौन लागू करेगा?
भारतीय लघु उद्योग विकास बैंक (सिडबी) इस योजना की प्राथमिक कार्यान्वयन एजेंसी होगी। इसके अलावा डीपीआईआईटी क्षेत्रीय पहुंच और संस्थागत क्षमता बढ़ाने के लिए अतिरिक्त एजेंसियों को भी शामिल करेगा।
एफओएफ 2.0 में किन क्षेत्रों को प्राथमिकता दी गई है?
इस योजना में गहन प्रौद्योगिकी (डीप टेक), माइक्रो वेंचर कैपिटल, नवोन्मेषी विनिर्माण और क्षेत्र-विशेष फंड को प्राथमिकता दी गई है। प्रत्येक खंड के लिए अलग कोष सीमा, सरकारी योगदान और निजी पूंजी जुटाने का अनुपात निर्धारित है।
वेंचर कैपिटल निवेश समिति में कौन-कौन शामिल हैं?
समिति में वल्लभ भंसाली, डॉ. अशोक झुनझुनवाला, डॉ. रेणु स्वरूप, डॉ. चिंतन वैष्णव और राजेश गोपीनाथन शामिल हैं। ये विशेषज्ञ डीप टेक, मैन्युफैक्चरिंग, नीति और वेंचर इकोसिस्टम में अनुभव रखते हैं।
एफओएफ 2.0 से भारतीय स्टार्टअप्स को क्या फायदा होगा?
इस योजना से स्टार्टअप्स को संस्थागत वेंचर फंडिंग तक आसान पहुंच मिलेगी, निजी निवेश कई गुना बढ़ेगा और मेंटरशिप व साझा इंफ्रास्ट्रक्चर जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध होंगी। भारत को वैश्विक स्टार्टअप हब के रूप में और मजबूत करने में यह योजना अहम भूमिका निभाएगी।
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