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मिष्टी योजना में गुजरात अव्वल: 40,000 हेक्टेयर मैंग्रोव रोपण, देश का 85% काम अकेले गुजरात में

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मिष्टी योजना में गुजरात अव्वल: 40,000 हेक्टेयर मैंग्रोव रोपण, देश का 85% काम अकेले गुजरात में

सारांश

मिष्टी योजना के तहत गुजरात ने तीन वर्षों में 40,000 हेक्टेयर मैंग्रोव रोपण कर देश का 85% कार्य अकेले पूरा किया। यह सिर्फ पर्यावरण की जीत नहीं — तटीय समुदायों की आजीविका और ब्लू इकोनॉमी को मज़बूत करने का एक सिद्ध राष्ट्रीय मॉडल है।

मुख्य बातें

गुजरात ने मिष्टी योजना के तहत पिछले तीन वर्षों में 40,000 हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में मैंग्रोव रोपण और पुनर्स्थापन पूरा किया।
यह देश में इसी अवधि के दौरान हुए कुल मैंग्रोव कार्य का लगभग 85 प्रतिशत है।
गुजरात भारत का दूसरा सबसे बड़ा मैंग्रोव कवर वाला राज्य है, जिसके पास देश के कुल मैंग्रोव आवरण का 23.32% हिस्सा है।
राज्य सरकार का लक्ष्य 2035 तक मैंग्रोव क्षेत्र को 1,164 से बढ़ाकर 1,500 वर्ग किलोमीटर करना है।
मैंग्रोव से बनने वाली खाद्य श्रृंखला तटीय मत्स्य उत्पादन और ब्लू इकोनॉमी को प्रत्यक्ष लाभ देती है।

केंद्र सरकार की मिष्टी योजना के तहत मैंग्रोव संरक्षण और विस्तार में गुजरात ने देश में शीर्ष स्थान हासिल किया है। मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के नेतृत्व में राज्य ने पिछले तीन वर्षों में 40,000 हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में मैंग्रोव रोपण और पुनर्स्थापन पूरा किया है — जो इसी अवधि में देश में हुए कुल कार्य का लगभग 85 प्रतिशत है। तटीय पारिस्थितिकी तंत्र को सुदृढ़ करने और जलवायु परिवर्तन के दुष्प्रभावों से निपटने में गुजरात का यह मॉडल अब राष्ट्रीय स्तर पर अनुकरणीय बन चुका है।

मुख्य घटनाक्रम

गुजरात के प्रधान मुख्य वन संरक्षक (पीसीसीएफ) डॉ. जयपाल सिंह ने बताया कि मिष्टी कार्यक्रम के तहत राज्य के वन विभाग ने 40,000 हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में मैंग्रोव प्लांटेशन पूरा किया है। उन्होंने कहा, 'भारत में सालभर में हुए कुल काम का लगभग 85 प्रतिशत गुजरात राज्य में हुआ है।' यह उपलब्धि राज्य सरकार, वैज्ञानिकों और स्थानीय समुदायों की त्रिस्तरीय साझेदारी का परिणाम है।

गुजरात का मैंग्रोव कवर और विस्तार लक्ष्य

गुजरात देश का दूसरा सबसे बड़ा मैंग्रोव कवर वाला राज्य है। राज्य के तटीय क्षेत्रों में भारत के कुल मैंग्रोव आवरण का लगभग 23.32 प्रतिशत हिस्सा है। राज्य सरकार ने वर्ष 2035 तक मैंग्रोव क्षेत्र को वर्तमान 1,164 वर्ग किलोमीटर से बढ़ाकर 1,500 वर्ग किलोमीटर करने का लक्ष्य निर्धारित किया है। यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक स्तर पर मैंग्रोव वनों का क्षरण चिंता का विषय बना हुआ है।

आम जनता और मत्स्य समुदाय पर असर

जामनगर के किसान डीएम दाफदा ने मैंग्रोव की पारिस्थितिक भूमिका को सरल शब्दों में समझाया। उन्होंने बताया कि मैंग्रोव के पत्ते जब पीले पड़कर गिरते हैं, तो उनसे उगने वाले कीड़े छोटी मछलियों का आहार बनते हैं — और इसी से समुद्री खाद्य श्रृंखला की नींव रखी जाती है। मैंग्रोव समुद्री जैव विविधता को समृद्ध करते हैं, मत्स्य उत्पादन बढ़ाते हैं और तटीय समुदायों की आजीविका के साथ-साथ ब्लू इकोनॉमी को भी मजबूती देते हैं।

वैज्ञानिक संरक्षण और दीर्घकालिक दृष्टिकोण

गौरतलब है कि गुजरात का यह प्रयास महज रोपण तक सीमित नहीं है — राज्य मैंग्रोव के वैज्ञानिक संरक्षण और दीर्घकालिक विकास पर भी विशेष ध्यान दे रहा है। हर वर्ष 26 जुलाई को मनाए जाने वाले विश्व मैंग्रोव दिवस के संदर्भ में यह उपलब्धि और भी महत्वपूर्ण हो जाती है, जो वेटलैंड पारिस्थितिकी तंत्र में मैंग्रोव की अनिवार्य भूमिका को रेखांकित करती है।

क्या होगा आगे

गुजरात का यह मॉडल सिद्ध करता है कि सरकार, वैज्ञानिकों और स्थानीय समुदायों की साझेदारी से पर्यावरण संरक्षण, जलवायु परिवर्तन से मुकाबला और तटीय विकास — तीनों लक्ष्यों को एक साथ हासिल किया जा सकता है। 2035 के विस्तार लक्ष्य की ओर बढ़ते हुए, राज्य के इस अनुभव को अन्य तटीय राज्यों के लिए नीतिगत खाके के रूप में अपनाने की संभावना बढ़ती जा रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह आँकड़ा एक महत्वपूर्ण सवाल भी उठाता है — क्या शेष तटीय राज्य इस दौड़ में पिछड़ रहे हैं, और यदि हाँ, तो क्यों? मिष्टी जैसी केंद्रीय योजनाओं की सफलता तब तक अधूरी है जब तक उसका लाभ ओडिशा, पश्चिम बंगाल और आंध्र प्रदेश जैसे अन्य मैंग्रोव-समृद्ध राज्यों तक समान रूप से न पहुँचे। इसके अलावा, रोपण के आँकड़े और वास्तविक 'सर्वाइवल रेट' अलग-अलग होते हैं — दीर्घकालिक सफलता के लिए स्वतंत्र पारिस्थितिक मूल्यांकन ज़रूरी है, जिसका उल्लेख अभी तक सार्वजनिक रूप से नहीं हुआ है।
RashtraPress
30 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मिष्टी योजना क्या है और इसका उद्देश्य क्या है?
मिष्टी (Mangrove Initiative for Shoreline Habitats and Tangible Incomes) केंद्र सरकार की एक योजना है जिसका उद्देश्य देश के तटीय क्षेत्रों में मैंग्रोव वनों का संरक्षण और विस्तार करना है। यह योजना तटीय समुदायों की आजीविका सुरक्षा और जलवायु परिवर्तन से निपटने को भी प्राथमिकता देती है।
गुजरात ने मिष्टी योजना के तहत कितना काम किया है?
गुजरात ने पिछले तीन वर्षों में 40,000 हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में मैंग्रोव रोपण और पुनर्स्थापन पूरा किया है। प्रधान मुख्य वन संरक्षक डॉ. जयपाल सिंह के अनुसार, यह देश में इस अवधि के दौरान हुए कुल कार्य का लगभग 85 प्रतिशत है।
मैंग्रोव तटीय समुदायों के लिए क्यों महत्वपूर्ण हैं?
मैंग्रोव तटीय इलाकों के लिए प्राकृतिक सुरक्षा कवच का काम करते हैं और समुद्री खाद्य श्रृंखला की नींव रखते हैं। इनसे मत्स्य उत्पादन बढ़ता है, तटीय समुदायों की आजीविका सुरक्षित होती है और ब्लू इकोनॉमी को मजबूती मिलती है।
गुजरात का 2035 तक मैंग्रोव विस्तार लक्ष्य क्या है?
राज्य सरकार ने वर्ष 2035 तक मैंग्रोव क्षेत्र को वर्तमान 1,164 वर्ग किलोमीटर से बढ़ाकर 1,500 वर्ग किलोमीटर करने का लक्ष्य निर्धारित किया है। गुजरात फिलहाल देश का दूसरा सबसे बड़ा मैंग्रोव कवर वाला राज्य है।
विश्व मैंग्रोव दिवस कब मनाया जाता है?
विश्व मैंग्रोव दिवस हर वर्ष 26 जुलाई को मनाया जाता है। यह दिवस वेटलैंड पारिस्थितिकी तंत्र में मैंग्रोव वनों की अनिवार्य भूमिका के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए समर्पित है।
राष्ट्र प्रेस
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