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मैंग्रोव संरक्षण पर भूपेंद्र यादव का जोर: भुज कार्यशाला में 27,652 हेक्टेयर पुनर्स्थापन की समीक्षा

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मैंग्रोव संरक्षण पर भूपेंद्र यादव का जोर: भुज कार्यशाला में 27,652 हेक्टेयर पुनर्स्थापन की समीक्षा

सारांश

भुज में आयोजित राष्ट्रीय कार्यशाला में केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव ने बताया कि गुजरात में मिश्ती कार्यक्रम के तहत 29,250 हेक्टेयर के लक्ष्य में से 27,652 हेक्टेयर पुनर्स्थापित हो चुके हैं। साथ ही MGIS पोर्टल, मैंग्रोव एटलस और गुनेरी बायोडायवर्सिटी हेरिटेज साइट का सम्मान — तटीय सुरक्षा की दिशा में ठोस कदम।

मुख्य बातें

केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव ने 13 सितंबर 2026 को भुज, गुजरात में मैंग्रोव संरक्षण कार्यशाला को संबोधित किया।
मिश्ती कार्यक्रम के तहत गुजरात में 29,250 हेक्टेयर के लक्ष्य के सापेक्ष अब तक 27,652 हेक्टेयर में मैंग्रोव पुनर्स्थापन पूरा।
पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील कोरी क्रीक क्षेत्र में 12,450 हेक्टेयर का पुनर्स्थापन शामिल।
कच्छ मैंग्रोव कॉफी टेबल बुक , गुजरात मैंग्रोव एटलस और MGIS पोर्टल का शुभारंभ।
गुनेरी इनलैंड मैंग्रोव को जनवरी 2025 में गुजरात का पहला जैव विविधता विरासत स्थल घोषित किया गया था।
गुजरात के वन मंत्री अर्जुन मोढवाडिया और राज्य मंत्री त्रिकमभाई छांगा ने भी राज्य की प्रतिबद्धता दोहराई।

केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने 13 सितंबर 2026 को भुज, गुजरात में आयोजित एक राष्ट्रीय कार्यशाला में स्पष्ट किया कि तटीय जैव विविधता, मत्स्य संसाधनों और समुद्री किनारों की रक्षा के लिए मैंग्रोव पारिस्थितिकी तंत्र का संरक्षण अपरिहार्य है। उन्होंने वैज्ञानिक प्रबंधन, स्थानीय समुदायों की सक्रिय भागीदारी और प्रौद्योगिकी-आधारित निगरानी को इस प्रयास की तीन मुख्य धुरी बताया।

कार्यशाला की पृष्ठभूमि और उद्देश्य

कच्छ जिले के भुज में आयोजित 'मैंग्रोव संरक्षण, पुनर्स्थापन और सतत प्रबंधन' विषयक इस कार्यशाला में केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय और गुजरात वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ-साथ वैज्ञानिक, पर्यावरण विशेषज्ञ और तटीय आजीविका से जुड़े स्थानीय समुदायों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। यह कार्यक्रम ऐसे समय में आया है जब जलवायु परिवर्तन के कारण भारत के पश्चिमी तट पर तूफान और समुद्री침食 की घटनाएँ बढ़ रही हैं, और मैंग्रोव वन इनसे प्राकृतिक सुरक्षा कवच का काम करते हैं।

यादव ने कच्छ की विशिष्ट भौगोलिक और पारिस्थितिक परिस्थितियों का उल्लेख करते हुए कहा कि इस क्षेत्र के लिए क्षेत्र-विशिष्ट पुनर्स्थापन तकनीकों को अपनाया गया है। साथ ही जैव विविधता संरक्षण, समुद्री शैवाल (सीवीड) की खेती और स्थानीय निवासियों के लिए टिकाऊ आजीविका के अवसरों को बढ़ावा देने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

मिश्ती कार्यक्रम: गुजरात की प्रगति

केंद्र सरकार के मिश्ती (Mangrove Initiative for Shoreline Habitats and Tangible Incomes) कार्यक्रम के तहत गुजरात में मैंग्रोव पुनर्स्थापन के लक्ष्यों की समीक्षा करते हुए यादव ने बताया कि 2023-27 की अवधि के लिए निर्धारित 29,250 हेक्टेयर के लक्ष्य के सापेक्ष अब तक 27,652 हेक्टेयर क्षेत्र में पुनर्स्थापन कार्य पूरा हो चुका है। यह लक्ष्य का लगभग 94.5% है।

इस उपलब्धि में पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील कोरी क्रीक क्षेत्र के 12,450 हेक्टेयर शामिल हैं, जो भौगोलिक दृष्टि से चुनौतीपूर्ण इलाका माना जाता है। गौरतलब है कि यह मिश्ती कार्यक्रम केंद्रीय बजट 2023-24 में घोषित किया गया था और इसे देश के नौ राज्यों और चार केंद्र शासित प्रदेशों में लागू किया जा रहा है।

नई पहलें: एटलस, कॉफी टेबल बुक और जीआईएस पोर्टल

कार्यशाला के दौरान भूपेंद्र यादव ने तीन महत्वपूर्ण पहलों का उद्घाटन किया — कच्छ मैंग्रोव कॉफी टेबल बुक, गुजरात मैंग्रोव एटलस और मैंग्रोव जीआईएस (MGIS) पोर्टल। उन्होंने कहा कि ये उपकरण मैंग्रोव क्षेत्रों की वैज्ञानिक निगरानी को और सुदृढ़ करेंगे तथा साक्ष्य-आधारित नीति-निर्माण में सहायक होंगे।

MGIS पोर्टल विशेष रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि यह रिमोट सेंसिंग डेटा और ज़मीनी सर्वेक्षण को एकीकृत कर वास्तविक समय में मैंग्रोव आच्छादन की निगरानी संभव बनाएगा — जो अब तक देश के अधिकांश तटीय राज्यों में उपलब्ध नहीं था।

गुनेरी बायोडायवर्सिटी हेरिटेज साइट को सम्मान

केंद्रीय मंत्री ने गुनेरी इनलैंड मैंग्रोव विलेज बायोडायवर्सिटी मैनेजमेंट कमेटी को सम्मानित किया और समुदाय-नेतृत्व वाले संरक्षण प्रयासों की प्रशंसा की। गुनेरी के मैंग्रोव तटीय क्षेत्र से दूर स्थित एक दुर्लभ आंतरिक पारिस्थितिकी तंत्र है, जिसे जनवरी 2025 में गुजरात का पहला जैव विविधता विरासत स्थल (Biodiversity Heritage Site) घोषित किया गया था।

यह मान्यता स्थानीय समुदायों की पर्यावरण संरक्षण में भूमिका को संस्थागत स्वीकृति दिलाती है और अन्य राज्यों के लिए एक अनुकरणीय मॉडल प्रस्तुत करती है।

राज्य सरकार की प्रतिबद्धता

कार्यशाला को गुजरात सरकार के वन, पर्यावरण, जलवायु परिवर्तन और विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री अर्जुन मोढवाडिया तथा उच्च एवं तकनीकी शिक्षा राज्य मंत्री त्रिकमभाई छांगा ने भी संबोधित किया। दोनों नेताओं ने मिश्ती कार्यक्रम के तहत मैंग्रोव संरक्षण और तटीय पारिस्थितिकी तंत्र के पुनर्स्थापन के प्रति राज्य की दृढ़ प्रतिबद्धता दोहराई।

आगे देखें तो मिश्ती कार्यक्रम का 2027 का लक्ष्य पूरा होने में लगभग 1,600 हेक्टेयर शेष है, और विशेषज्ञों का मानना है कि शेष कार्य निर्धारित समयसीमा में पूर्ण किया जा सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली प्रश्न यह है कि पुनर्स्थापित मैंग्रोव की जीवन-दर और दीर्घकालिक घनत्व कैसा है — क्योंकि पौधारोपण और परिपक्व पारिस्थितिकी तंत्र में बड़ा अंतर होता है। MGIS पोर्टल इस खाई को पाटने की दिशा में सही कदम है, बशर्ते डेटा सार्वजनिक रूप से उपलब्ध कराया जाए। गुनेरी जैसे सामुदायिक मॉडल को संस्थागत पहचान मिलना स्वागतयोग्य है, किंतु शेष तटीय राज्यों में ऐसी कमेटियों को मज़बूत करने की रफ्तार अभी भी धीमी है।
RashtraPress
14 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मिश्ती कार्यक्रम क्या है और इसके तहत गुजरात में क्या हुआ?
मिश्ती (MISHTI) केंद्र सरकार का राष्ट्रीय मैंग्रोव पुनर्स्थापन कार्यक्रम है, जिसे 2023-24 के केंद्रीय बजट में घोषित किया गया था। गुजरात ने 2023-27 के लिए निर्धारित 29,250 हेक्टेयर के लक्ष्य में से 27,652 हेक्टेयर पर पुनर्स्थापन पूरा कर लिया है, जिसमें कोरी क्रीक के 12,450 हेक्टेयर भी शामिल हैं।
MGIS पोर्टल क्या है और यह मैंग्रोव संरक्षण में कैसे मदद करेगा?
MGIS (मैंग्रोव जीआईएस) पोर्टल एक डिजिटल प्लेटफॉर्म है जो रिमोट सेंसिंग और ज़मीनी सर्वेक्षण डेटा को एकीकृत कर मैंग्रोव आच्छादन की वास्तविक समय निगरानी संभव बनाता है। यह साक्ष्य-आधारित नीति-निर्माण और वैज्ञानिक प्रबंधन को मज़बूत करेगा।
गुनेरी इनलैंड मैंग्रोव विशेष क्यों है?
गुनेरी के मैंग्रोव तटीय क्षेत्र से दूर स्थित एक दुर्लभ आंतरिक पारिस्थितिकी तंत्र है, जो इसे पारिस्थितिक दृष्टि से असाधारण बनाता है। जनवरी 2025 में इसे गुजरात का पहला जैव विविधता विरासत स्थल (Biodiversity Heritage Site) घोषित किया गया था।
मैंग्रोव तटीय सुरक्षा के लिए क्यों महत्वपूर्ण हैं?
मैंग्रोव वन तूफान, समुद्री तरंगों और तटीय कटाव के विरुद्ध प्राकृतिक अवरोधक का काम करते हैं। ये मत्स्य प्रजनन स्थल के रूप में भी कार्य करते हैं और तटीय समुदायों की आजीविका में अहम भूमिका निभाते हैं।
भुज कार्यशाला में कौन-कौन शामिल हुए?
कार्यशाला में केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव, गुजरात के वन मंत्री अर्जुन मोढवाडिया, राज्य मंत्री त्रिकमभाई छांगा, केंद्रीय मंत्रालय और गुजरात वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी, वैज्ञानिक, पर्यावरण विशेषज्ञ और स्थानीय समुदायों के प्रतिनिधि शामिल हुए।
राष्ट्र प्रेस
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