मैंग्रोव संरक्षण पर भूपेंद्र यादव का जोर: भुज कार्यशाला में 27,652 हेक्टेयर पुनर्स्थापन की समीक्षा
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने 13 सितंबर 2026 को भुज, गुजरात में आयोजित एक राष्ट्रीय कार्यशाला में स्पष्ट किया कि तटीय जैव विविधता, मत्स्य संसाधनों और समुद्री किनारों की रक्षा के लिए मैंग्रोव पारिस्थितिकी तंत्र का संरक्षण अपरिहार्य है। उन्होंने वैज्ञानिक प्रबंधन, स्थानीय समुदायों की सक्रिय भागीदारी और प्रौद्योगिकी-आधारित निगरानी को इस प्रयास की तीन मुख्य धुरी बताया।
कार्यशाला की पृष्ठभूमि और उद्देश्य
कच्छ जिले के भुज में आयोजित 'मैंग्रोव संरक्षण, पुनर्स्थापन और सतत प्रबंधन' विषयक इस कार्यशाला में केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय और गुजरात वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ-साथ वैज्ञानिक, पर्यावरण विशेषज्ञ और तटीय आजीविका से जुड़े स्थानीय समुदायों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। यह कार्यक्रम ऐसे समय में आया है जब जलवायु परिवर्तन के कारण भारत के पश्चिमी तट पर तूफान और समुद्री침食 की घटनाएँ बढ़ रही हैं, और मैंग्रोव वन इनसे प्राकृतिक सुरक्षा कवच का काम करते हैं।
यादव ने कच्छ की विशिष्ट भौगोलिक और पारिस्थितिक परिस्थितियों का उल्लेख करते हुए कहा कि इस क्षेत्र के लिए क्षेत्र-विशिष्ट पुनर्स्थापन तकनीकों को अपनाया गया है। साथ ही जैव विविधता संरक्षण, समुद्री शैवाल (सीवीड) की खेती और स्थानीय निवासियों के लिए टिकाऊ आजीविका के अवसरों को बढ़ावा देने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
मिश्ती कार्यक्रम: गुजरात की प्रगति
केंद्र सरकार के मिश्ती (Mangrove Initiative for Shoreline Habitats and Tangible Incomes) कार्यक्रम के तहत गुजरात में मैंग्रोव पुनर्स्थापन के लक्ष्यों की समीक्षा करते हुए यादव ने बताया कि 2023-27 की अवधि के लिए निर्धारित 29,250 हेक्टेयर के लक्ष्य के सापेक्ष अब तक 27,652 हेक्टेयर क्षेत्र में पुनर्स्थापन कार्य पूरा हो चुका है। यह लक्ष्य का लगभग 94.5% है।
इस उपलब्धि में पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील कोरी क्रीक क्षेत्र के 12,450 हेक्टेयर शामिल हैं, जो भौगोलिक दृष्टि से चुनौतीपूर्ण इलाका माना जाता है। गौरतलब है कि यह मिश्ती कार्यक्रम केंद्रीय बजट 2023-24 में घोषित किया गया था और इसे देश के नौ राज्यों और चार केंद्र शासित प्रदेशों में लागू किया जा रहा है।
नई पहलें: एटलस, कॉफी टेबल बुक और जीआईएस पोर्टल
कार्यशाला के दौरान भूपेंद्र यादव ने तीन महत्वपूर्ण पहलों का उद्घाटन किया — कच्छ मैंग्रोव कॉफी टेबल बुक, गुजरात मैंग्रोव एटलस और मैंग्रोव जीआईएस (MGIS) पोर्टल। उन्होंने कहा कि ये उपकरण मैंग्रोव क्षेत्रों की वैज्ञानिक निगरानी को और सुदृढ़ करेंगे तथा साक्ष्य-आधारित नीति-निर्माण में सहायक होंगे।
MGIS पोर्टल विशेष रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि यह रिमोट सेंसिंग डेटा और ज़मीनी सर्वेक्षण को एकीकृत कर वास्तविक समय में मैंग्रोव आच्छादन की निगरानी संभव बनाएगा — जो अब तक देश के अधिकांश तटीय राज्यों में उपलब्ध नहीं था।
गुनेरी बायोडायवर्सिटी हेरिटेज साइट को सम्मान
केंद्रीय मंत्री ने गुनेरी इनलैंड मैंग्रोव विलेज बायोडायवर्सिटी मैनेजमेंट कमेटी को सम्मानित किया और समुदाय-नेतृत्व वाले संरक्षण प्रयासों की प्रशंसा की। गुनेरी के मैंग्रोव तटीय क्षेत्र से दूर स्थित एक दुर्लभ आंतरिक पारिस्थितिकी तंत्र है, जिसे जनवरी 2025 में गुजरात का पहला जैव विविधता विरासत स्थल (Biodiversity Heritage Site) घोषित किया गया था।
यह मान्यता स्थानीय समुदायों की पर्यावरण संरक्षण में भूमिका को संस्थागत स्वीकृति दिलाती है और अन्य राज्यों के लिए एक अनुकरणीय मॉडल प्रस्तुत करती है।
राज्य सरकार की प्रतिबद्धता
कार्यशाला को गुजरात सरकार के वन, पर्यावरण, जलवायु परिवर्तन और विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री अर्जुन मोढवाडिया तथा उच्च एवं तकनीकी शिक्षा राज्य मंत्री त्रिकमभाई छांगा ने भी संबोधित किया। दोनों नेताओं ने मिश्ती कार्यक्रम के तहत मैंग्रोव संरक्षण और तटीय पारिस्थितिकी तंत्र के पुनर्स्थापन के प्रति राज्य की दृढ़ प्रतिबद्धता दोहराई।
आगे देखें तो मिश्ती कार्यक्रम का 2027 का लक्ष्य पूरा होने में लगभग 1,600 हेक्टेयर शेष है, और विशेषज्ञों का मानना है कि शेष कार्य निर्धारित समयसीमा में पूर्ण किया जा सकता है।