भारत में दुनिया के 75% जंगली बाघ सुरक्षित: भूपेंद्र यादव ने बताया टाइगर कंजर्वेशन का रोडमैप
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने 28 जून को अलवर में आयोजित दो दिवसीय तकनीकी कार्यशाला के दौरान कहा कि भारत ने बाघ संरक्षण के क्षेत्र में स्वयं को एक वैश्विक आदर्श के रूप में स्थापित कर लिया है। उन्होंने बताया कि आज विश्व के लगभग 75 प्रतिशत जंगली बाघ भारत में सुरक्षित हैं, जो देश की संरक्षण नीति, जन-भागीदारी और प्रकृति के प्रति सांस्कृतिक आस्था का प्रमाण है।
सेंट पीटर्सबर्ग लक्ष्य और भारत की उपलब्धि
भूपेंद्र यादव ने कहा कि भारत एकमात्र ऐसा देश है जिसने सेंट पीटर्सबर्ग टाइगर समिट में तय किए गए लक्ष्य — अपनी बाघ आबादी को दोगुना करना — को सफलतापूर्वक पूरा किया है। उन्होंने बताया कि दुनिया के लगभग 70 प्रतिशत बाघ भारत में पाए जाते हैं। देश में टाइगर रिजर्व की संख्या के साथ-साथ बाघ संरक्षण के अंतर्गत आने वाले क्षेत्रफल में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।
यह उपलब्धि ऐसे समय में और भी महत्वपूर्ण हो जाती है जब वैश्विक स्तर पर वन्यजीव आवासों पर दबाव लगातार बढ़ रहा है। गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार ने वन्यजीव संरक्षण को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने की नीति अपनाई है।
इंटरनेशनल बिग कैट अलायंस और वैश्विक साझेदारी
मंत्री ने बताया कि भारत केवल बाघ संरक्षण तक सीमित नहीं है, बल्कि दुनियाभर में पाई जाने वाली बिग कैट की पाँचों प्रजातियों के संरक्षण के लिए प्रतिबद्ध है। इसी उद्देश्य से भारत ने अपने जलवायु कार्य पहल के हिस्से के रूप में इंटरनेशनल बिग कैट अलायंस की स्थापना की है। उन्होंने बताया कि इस अलायंस में अब 27 से अधिक देश और प्रतिष्ठित संगठन सदस्य बन चुके हैं। हालाँकि कुछ कारणों से अलायंस की एक प्रस्तावित बैठक नहीं हो सकी, लेकिन सदस्य देशों के साथ सहयोग जारी है।
58 टाइगर रिजर्व के लिए वैज्ञानिक दृष्टिकोण
भूपेंद्र यादव ने कहा कि देश के 58 टाइगर रिजर्व के लिए वैज्ञानिक पद्धति और क्षमता-निर्माण पर आधारित एक व्यापक योजना तैयार करना आवश्यक है। इसी लक्ष्य के साथ अलवर में दो दिवसीय तकनीकी कार्यशाला आयोजित की गई, जिसमें सफलता की कहानियों से प्राप्त जानकारी साझा करना, चुनौतियों की पहचान करना और नए वैज्ञानिक हस्तक्षेप की आवश्यकता वाले क्षेत्रों को चिह्नित करना शामिल था।
उन्होंने बताया कि इस कार्यशाला के परिणामों के आधार पर टाइगर रिजर्व की कमियों को दूर किया जाएगा और मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने के लिए विज्ञान-आधारित उपाय अपनाए जाएंगे।
स्थानीय समुदाय और महिलाओं की भागीदारी
मंत्री ने मानव-पशु टकराव को एक गंभीर चुनौती बताते हुए कहा कि इसके समाधान के लिए रेस्क्यू सेंटर स्थापित करने पर विचार किया जा रहा है। उन्होंने जोर दिया कि संरक्षण प्रयासों में उन पारंपरिक समुदायों की भागीदारी अनिवार्य है जो वन क्षेत्रों में वर्षों से निवास कर रहे हैं। सरकार का लक्ष्य इन समुदायों की आजीविका को पर्यटन गतिविधियों से जोड़ना और महिलाओं की आर्थिक भागीदारी बढ़ाना है।
प्रदूषण नियंत्रण और सतत विकास का रोडमैप
प्रदूषण के मुद्दे पर भूपेंद्र यादव ने बताया कि नेशनल क्लीन एयर प्रोग्राम के तहत 130 शहरों पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में वाहन प्रदूषण, धूल प्रदूषण, औद्योगिक प्रदूषण और हरित आवरण के विकास पर एक साथ काम हो रहा है। उन्होंने मिशन लाइफ के सिद्धांतों — ऊर्जा बचत, जल संरक्षण, सॉलिड वेस्ट प्रबंधन, ई-वेस्ट प्रबंधन और सिंगल-यूज प्लास्टिक पर प्रतिबंध — को बढ़ावा देने की बात कही। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि प्रधानमंत्री मोदी ने मन की बात के 135वें एपिसोड में मध्य प्रदेश के ब्यावरा में महिलाओं द्वारा प्लास्टिक पुनर्उपयोग और मेघालय के लिविंग रूट ब्रिज जैसे प्रेरणादायक उदाहरणों का जिक्र किया। मंत्री ने स्पष्ट किया कि पारिस्थितिकी और अर्थव्यवस्था को साथ-साथ चलना होगा, और सर्कुलर इकॉनमी ही भविष्य का मार्ग है।