विश्व बाघ दिवस 2026: PM मोदी बोले — 'भारत में है दुनिया की 70% बाघ आबादी', प्रोजेक्ट टाइगर की उपलब्धियाँ गिनाईं
सारांश
मुख्य बातें
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 29 जुलाई 2026 को विश्व बाघ दिवस के अवसर पर देशभर के वन्यजीव प्रेमियों, वन कर्मियों, वैज्ञानिकों और संरक्षणवादियों को शुभकामनाएं दीं और कहा कि दुनिया की लगभग 70 प्रतिशत बाघ आबादी का घर होना भारत के लिए गर्व का विषय है। उन्होंने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट कर यह संदेश साझा किया।
मोदी का संदेश: संस्कृति और विज्ञान का संगम
अपनी एक्स पोस्ट में प्रधानमंत्री मोदी ने लिखा, 'बाघों के संरक्षण के लिए भारत की कोशिशें प्रकृति के साथ मिल-जुलकर रहने की हमारी सदियों पुरानी संस्कृति से प्रेरित हैं और हमारे लोगों के सामूहिक संकल्प से आगे बढ़ रही हैं।' उन्होंने विज्ञान-आधारित संरक्षण, समुदाय की भागीदारी और टिकाऊ विकास के प्रति भारत की प्रतिबद्धता भी दोहराई।
मोदी ने यह भी कहा कि भारत स्थानीय समुदायों को सशक्त बनाने और इंसान व वन्यजीवों के बीच टकराव को कम करने के लिए प्रतिबद्ध है — एक ऐसा मुद्दा जो बाघ-बहुल राज्यों में आज भी चुनौतीपूर्ण बना हुआ है।
बाघ गणना 2022: अहम आँकड़े
अखिल भारतीय बाघ अनुमान (2022) के अनुसार, भारत में बाघों की संख्या 3,682 है। यह सर्वेक्षण 20 राज्यों में किया गया और 6.41 लाख किलोमीटर से अधिक का क्षेत्र पैदल तय कर डेटा एकत्र किया गया। गौरतलब है कि 2006 के बाद से देश में वैज्ञानिक पद्धति से गिनी गई बाघों की संख्या दोगुनी से भी अधिक हो चुकी है।
यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक स्तर पर बाघों की संख्या ऐतिहासिक रूप से निम्न स्तर पर रही है और भारत का यह प्रदर्शन अंतरराष्ट्रीय संरक्षण समुदाय में उदाहरण के रूप में उद्धृत किया जाता है।
प्रोजेक्ट टाइगर: ढाँचा और विस्तार
प्रोजेक्ट टाइगर केंद्र सरकार की एक प्रमुख केंद्रीय प्रायोजित योजना है, जिसे पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय लागू करता है। इसका उद्देश्य बाघों की आबादी को उनके प्राकृतिक आवासों में सुरक्षित रखना और बाघ-रेंज राज्यों को वित्तीय व तकनीकी सहायता देना है।
राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) की 2023 की रिपोर्ट के अनुसार, प्रोजेक्ट टाइगर ने 18 बाघ-रेंज राज्यों में 58 बाघ अभ्यारण्यों का नेटवर्क स्थापित किया है। ये अभ्यारण्य लगभग 84,500 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैले हैं, जो भारत के कुल भौगोलिक क्षेत्रफल का लगभग 2.56 प्रतिशत है।
तकनीक और सामुदायिक भागीदारी की भूमिका
तकनीक-आधारित निगरानी प्रणालियाँ, कैमरा ट्रैप, और उपग्रह-आधारित आवास विश्लेषण ने संरक्षण प्रयासों को वैज्ञानिक आधार दिया है। साथ ही, स्थानीय समुदायों को वन प्रबंधन में शामिल करने की नीति ने मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने में योगदान दिया है।
भारत वैश्विक बाघ संरक्षण के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग को भी बढ़ावा दे रहा है, और NTCA इस दिशा में बाघ-रेंज देशों के साथ तालमेल बनाए हुए है।
आगे की राह
विशेषज्ञों के अनुसार, बाघों की बढ़ती संख्या के साथ-साथ उनके प्राकृतिक आवास के विस्तार और मानव-वन्यजीव टकराव के प्रबंधन पर ध्यान देना अगली बड़ी चुनौती है। भारत की संरक्षण नीति का अगला चरण इन्हीं मुद्दों पर केंद्रित रहने की संभावना है।