विश्व हाथी दिवस: भारत में हैं दुनिया के 60% से अधिक जंगली एशियाई हाथी, PM मोदी ने किया संरक्षण का आह्वान
सारांश
मुख्य बातें
विश्व हाथी दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 12 अगस्त को जानकारी दी कि दुनिया के 60 प्रतिशत से अधिक जंगली एशियाई हाथी भारत में पाए जाते हैं। उन्होंने इसे राष्ट्रीय गर्व का विषय बताते हुए हाथियों के संरक्षण और उनके प्राकृतिक आवास की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने का आग्रह किया।
भारत की संरक्षण उपलब्धियाँ
प्रधानमंत्री मोदी ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर अपनी पोस्ट में बताया कि हाथियों के संरक्षण के लिए देशभर में 33 हाथी रिजर्व स्थापित किए गए हैं। ये रिजर्व हाथियों को सुरक्षित आवास उपलब्ध कराने के साथ-साथ उनके दीर्घकालिक संरक्षण प्रयासों को भी सुदृढ़ करते हैं। उन्होंने कहा कि हाथी भारत की समृद्ध पारिस्थितिक विरासत का अभिन्न हिस्सा हैं।
संरक्षण में योगदानकर्ताओं की सराहना
मोदी ने हाथी संरक्षण में भूमिका निभाने वाले वन कर्मियों, वैज्ञानिकों, पशु चिकित्सकों, महावतों और स्थानीय समुदायों की विशेष सराहना की। उनके अनुसार, इन सभी के सामूहिक प्रयास ही हाथियों के सुरक्षित भविष्य की नींव हैं।
केंद्रीय मंत्री और राज्य नेताओं की प्रतिक्रिया
केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने भी इस अवसर पर संरक्षण के प्रति भारत के संकल्प को दोहराया। उन्होंने बताया कि 14 राज्यों में फैले 33 हाथी रिजर्व, वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित 150 हाथी कॉरिडोर और उन्नत जनसंख्या निगरानी प्रणाली के माध्यम से भारत हाथी संरक्षण को निरंतर मजबूत कर रहा है। उन्होंने कहा कि जब हम हाथियों का भविष्य सुरक्षित करते हैं, तो हम अपने जंगलों, जैव-विविधता और पारिस्थितिक विरासत को भी सुरक्षित करते हैं।
मध्यप्रदेश भारतीय जनता पार्टी (BJP) के प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने एक्स पर लिखा कि मध्यप्रदेश के जंगलों में हाथियों की बढ़ती मौजूदगी समृद्ध वन्यजीवन और स्वस्थ पारिस्थितिकी तंत्र का संकेत है। उन्होंने मुख्यमंत्री मोहन यादव के नेतृत्व में मानव-हाथी सह-अस्तित्व को सुदृढ़ करने के प्रयासों का उल्लेख किया।
मानव-हाथी संघर्ष की चुनौती
यह ऐसे समय में आया है जब मानव-हाथी संघर्ष भारत के कई राज्यों में एक गंभीर चिंता का विषय बना हुआ है। गौरतलब है कि 150 वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित हाथी कॉरिडोर इसी संघर्ष को कम करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माने जाते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि संरक्षित क्षेत्रों के बाहर भी मानव बस्तियों और हाथी आवासों के बीच समन्वय ज़रूरी है।
आगे की राह
विश्व हाथी दिवस पर नेताओं के इन संदेशों ने एक बार फिर वन्यजीव संरक्षण को राष्ट्रीय विमर्श के केंद्र में ला दिया है। आने वाली पीढ़ियों के लिए हाथियों के प्राकृतिक आवास और कॉरिडोर को अक्षुण्ण बनाए रखना भारत की पर्यावरण नीति की दीर्घकालिक प्राथमिकता बनी रहेगी।