वर्ल्ड लायन डे: एशियाई शेरों की संख्या 523 से बढ़कर 891 हुई, भूपेंद्र यादव ने संरक्षण प्रतिबद्धता दोहराई
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने 10 अगस्त 2026 को वर्ल्ड लायन डे के अवसर पर एशियाई शेरों की आबादी में हुई उल्लेखनीय वृद्धि का उल्लेख करते हुए वन्यजीव संरक्षण के प्रति भारत की प्रतिबद्धता दोहराई। आधिकारिक आँकड़ों के अनुसार, एशियाई शेरों की संख्या 2015 में 523 से बढ़कर 2025 में 891 हो गई है — यह एक दशक में 70% से अधिक की वृद्धि है।
मंत्री की सराहना और संदेश
यादव ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर साझा किए गए अपने पोस्ट में इस उपलब्धि का श्रेय वन अधिकारियों, संरक्षणवादियों और स्थानीय समुदायों को दिया। उन्होंने लिखा, 'वर्ल्ड लायन डे' पर हम शेर संरक्षण में भारत की उल्लेखनीय यात्रा का जश्न मना रहे हैं। एशियाई शेर के संरक्षण में भारत की सफलता वन्यजीवों और जैव विविधता के प्रति हमारी अटूट प्रतिबद्धता का एक गर्वपूर्ण प्रमाण है।
मंत्री ने यह भी कहा कि जरूरी आवासों की सुरक्षा से लेकर संरक्षण के प्रयासों को मजबूत करने तक, भारत ने यह सिद्ध किया है कि विकास और प्रकृति का संरक्षण साथ-साथ चल सकते हैं। उन्होंने आह्वान किया कि आने वाली पीढ़ियों के लिए एशियाई शेर की दहाड़ को जीवित रखने का संकल्प लिया जाए।
केंद्रीय राज्य मंत्री का बयान
केंद्रीय राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने भी इस अवसर पर अपनी प्रतिक्रिया साझा की। उन्होंने कहा कि आवासों की सुरक्षा, संरक्षण कार्यक्रमों को सुदृढ़ करने और सह-अस्तित्व को बढ़ावा देकर भारत ने दुनिया को दिखाया है कि विकास और प्रकृति एक साथ फल-फूल सकते हैं।
प्रोजेक्ट लायन: दायरा और दृष्टिकोण
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 15 अगस्त 2020 को प्रोजेक्ट लायन की घोषणा की थी, जिसका उद्देश्य एशियाई शेर के दीर्घकालिक संरक्षण को सुनिश्चित करना है। इस परियोजना के तहत शेरों का विचरण क्षेत्र 2020 में लगभग 30,000 वर्ग किलोमीटर से बढ़कर अब लगभग 35,000 वर्ग किलोमीटर हो गया है।
यह परियोजना जैव विविधता संरक्षण के लिए एक समग्र दृष्टिकोण अपनाती है, जिसमें आवास सुधार, बीमारी की निगरानी, पशु चिकित्सा सहायता, वैज्ञानिक जनसंख्या निगरानी, तकनीक-आधारित उपाय, जैव विविधता सुरक्षा, लाभ-साझेदारी और समुदाय की सक्रिय भागीदारी शामिल है।
आम जनता और पर्यावरण पर असर
गौरतलब है कि एशियाई शेर केवल भारत के गुजरात स्थित गिर वन में पाए जाते हैं, और यह दुनिया में एकमात्र स्थान है जहाँ यह प्रजाति जंगल में जीवित है। शेरों की बढ़ती संख्या और विस्तारित विचरण क्षेत्र स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र के स्वास्थ्य का संकेत है, साथ ही यह पर्यावरण-पर्यटन को भी बढ़ावा देता है।
आगे की राह
यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक स्तर पर शेरों की आबादी दबाव में है और अफ्रीकी शेरों की संख्या में गिरावट दर्ज की जा रही है। भारत की सफलता एक वैश्विक संरक्षण मॉडल के रूप में उभर रही है। प्रोजेक्ट लायन के अगले चरण में समुदाय-आधारित संरक्षण और तकनीकी निगरानी को और विस्तार दिए जाने की उम्मीद है।