विश्व शेर दिवस 2026: योगी आदित्यनाथ, रेखा गुप्ता, धामी और भजनलाल ने शेर संरक्षण का लिया संकल्प
सारांश
मुख्य बातें
विश्व शेर दिवस के अवसर पर 10 अगस्त 2026 को देशभर के कई मुख्यमंत्रियों ने शेरों के संरक्षण का संकल्प लेते हुए शुभकामनाएं दीं। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से लेकर दिल्ली, उत्तराखंड और राजस्थान के मुख्यमंत्रियों ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट कर जैव विविधता और प्राकृतिक संतुलन की रक्षा का आह्वान किया।
विश्व शेर दिवस का महत्व
प्रत्येक वर्ष 10 अगस्त को मनाया जाने वाला विश्व शेर दिवस शेरों की घटती आबादी और उनके प्राकृतिक आवासों के संरक्षण के प्रति जन-जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से मनाया जाता है। यह दिन वन्यजीव प्रेमियों, पर्यावरणविदों और नीति-निर्माताओं के लिए संरक्षण प्रतिबद्धताओं को नवीनीकृत करने का अवसर है।
योगी आदित्यनाथ का संदेश
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एक्स पर पोस्ट किया, 'शक्ति, शौर्य और स्वाभिमान के प्रतीक 'शेर' का संरक्षण केवल एक वन्यजीव प्रजाति की रक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि यह हमारी समृद्ध जैव-विविधता और प्रकृति के संतुलन को बनाए रखने की एक समग्र दृष्टि है।' उन्होंने आगे लिखा कि उत्तर प्रदेश सरकार पर्यावरण संरक्षण और पारिस्थितिकी संतुलन के प्रति निरंतर प्रतिबद्ध है और आने वाली पीढ़ियों के लिए एक सुरक्षित एवं समृद्ध धरा विरासत में देने का संकल्प दोहराया।
दिल्ली, उत्तराखंड और राजस्थान के मुख्यमंत्रियों की प्रतिक्रिया
दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने एक्स पर लिखा कि शेर भारत की समृद्ध जैव विविधता और वन्यजीव विरासत का गौरव हैं, और जनभागीदारी को मजबूत कर ऐसा वातावरण बनाने का आह्वान किया जहाँ वन्यजीव और प्रकृति दोनों सुरक्षित रहें।
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अपने संदेश में कहा कि शेर प्रकृति के संतुलन और वन्यजीव संरक्षण के महत्व का प्रतीक हैं। उन्होंने सभी वन्यजीवों के प्रति संवेदनशीलता बढ़ाने और उनके प्राकृतिक आवासों की रक्षा का संकल्प लेने का आह्वान किया।
राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने एक्स पर लिखा कि शेर समृद्ध जैव विविधता, प्राकृतिक संतुलन और वन्यजीव विरासत का महत्वपूर्ण आधार हैं। उन्होंने भावी पीढ़ियों के लिए सुरक्षित प्राकृतिक धरोहर के निर्माण हेतु जन-जागरूकता बढ़ाने का आग्रह किया।
संरक्षण की व्यापक पृष्ठभूमि
गौरतलब है कि भारत एशियाई शेरों का एकमात्र प्राकृतिक आवास है, जो मुख्यतः गुजरात के गिर राष्ट्रीय उद्यान में पाए जाते हैं। वैश्विक स्तर पर शेरों की संख्या में पिछले दशकों में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई है, जो इस दिवस की प्रासंगिकता को और अधिक महत्वपूर्ण बनाती है। विशेषज्ञों का कहना है कि राजनीतिक नेतृत्व की जागरूकता और सार्वजनिक प्रतिबद्धता संरक्षण नीतियों को ज़मीनी स्तर पर लागू करने में सहायक होती है।
आगे की राह
नेताओं के इन संदेशों से वन्यजीव संरक्षण के प्रति राजनीतिक इच्छाशक्ति का संकेत मिलता है, लेकिन विशेषज्ञ मानते हैं कि प्रतीकात्मक प्रतिबद्धताओं के साथ-साथ ठोस नीतिगत कदम, बजटीय आवंटन और वन क्षेत्रों में अतिक्रमण रोकने जैसे उपाय भी आवश्यक हैं। विश्व शेर दिवस 2026 इस दिशा में जन-चेतना को और गहरा करने का अवसर है।