गुजरात में एशियाई शेरों की आबादी 891 हुई, सीएम भूपेंद्र पटेल बोले — इकोसिस्टम की रक्षा ही असली लक्ष्य
सारांश
मुख्य बातें
गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने 10 अगस्त 2026 को विश्व शेर दिवस के अवसर पर स्पष्ट किया कि राज्य में एशियाई शेरों के संरक्षण का उद्देश्य केवल उनकी संख्या बढ़ाना नहीं, बल्कि जंगलों, जल स्रोतों और मानव जीवन को एकसाथ सुरक्षित रखना है। पोरबंदर के ताजावाला हॉल में आयोजित कार्यक्रम में वर्चुअली शामिल होते हुए उन्होंने यह संदेश दिया। राज्य सरकार के आंकड़ों के अनुसार, गुजरात में शेरों की आबादी अब बढ़कर 891 हो गई है।
मुख्यमंत्री का संरक्षण संदेश
मुख्यमंत्री पटेल ने गांधीनगर से वर्चुअल माध्यम से संबोधित करते हुए कहा, 'शेरों के संरक्षण का मतलब सिर्फ उनकी संख्या बढ़ाना नहीं है, बल्कि पूरे इकोसिस्टम की रक्षा करने का संकल्प है। जंगलों, जल स्रोतों, खेती और इंसानी जिंदगी की सुरक्षा आपस में गहराई से जुड़ी हुई है।' उन्होंने नागरिकों से प्रकृति और पर्यावरण संरक्षण में सक्रिय भागीदारी की अपील की। कार्यक्रम में वन और पर्यावरण मंत्री अर्जुन मोधवाडिया पोरबंदर में उपस्थित रहे।
गुजरात का चार-स्तंभीय संरक्षण मॉडल
मुख्यमंत्री पटेल ने शेरों की बढ़ती आबादी का श्रेय राज्य के एक विशेष संरक्षण मॉडल को दिया, जो चार स्तंभों पर आधारित है — आधुनिक तकनीक, वैज्ञानिक शोध, लोगों की भागीदारी और असरदार प्रशासन। उन्होंने बताया कि यह मॉडल जैव विविधता संरक्षण, जल स्रोतों की सुरक्षा और स्थानीय समुदायों की सक्रिय भूमिका पर केंद्रित है। गौरतलब है कि गुजरात दुनिया में एकमात्र ऐसा स्थान है जहाँ आज़ाद घूमने वाले एशियाई शेर पाए जाते हैं।
बारडा हिल्स में ऐतिहासिक वापसी
पटेल ने बताया कि पिछले ढाई दशकों में शेरों का दायरा 3 जिलों से बढ़कर 11 जिलों तक फैल गया है। उन्होंने 143 साल बाद बारडा हिल्स में शेरों की वापसी को एक ऐतिहासिक उपलब्धि बताया। 2023 में पहले शेर के आगमन के बाद अब इस इलाके में 26 शेर निवास कर रहे हैं। शेरों ने बारडा वन्यजीव अभयारण्य को स्वाभाविक रूप से अपने नए आवास के रूप में अपना लिया है।
प्रोजेक्ट लायन और सफारी पार्क की योजना
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा शुरू किए गए प्रोजेक्ट लायन का उल्लेख करते हुए पटेल ने कहा कि इस पहल ने शेरों के आवासों की बहाली, स्थानीय समुदायों की भागीदारी और पर्यावरण-विकास संतुलन को नई दिशा दी है। वन और पर्यावरण मंत्री मोधवाडिया ने बताया कि जंगल सफारी पहल के अंतर्गत बारडा में लगभग 270 हेक्टेयर भूमि पर एक सफारी पार्क बनाने की योजना है। उन्होंने नागरिकों और पर्यटकों से अनुरोध किया कि वे शेरों को परेशान न करें और वन्यजीवों से सुरक्षित दूरी बनाए रखें।
विशेषज्ञों की राय
प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख डॉ. जयपाल सिंह ने शेर संरक्षण के लिए राज्य और केंद्र सरकारों द्वारा किए जा रहे समन्वित प्रयासों की विस्तृत जानकारी दी। गिर में आयोजित नेशनल बोर्ड फॉर वाइल्डलाइफ की बैठक का हवाला देते हुए पटेल ने कहा कि इसने वन्यजीव संरक्षण नीति को नई ऊर्जा दी है। यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक स्तर पर एशियाई शेरों के भविष्य को लेकर संरक्षणवादी चिंतित हैं और गुजरात का मॉडल एक सफल उदाहरण के रूप में उभर रहा है।