क्या 33 साल बाद गुजरात फिर टाइगर स्टेट बन गया?

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क्या 33 साल बाद गुजरात फिर टाइगर स्टेट बन गया?

सारांश

गुजरात ने 33 साल के बाद फिर से टाइगर स्टेट का दर्जा प्राप्त किया है। रतनमहल वन्यजीव अभयारण्य में बाघ की मौजूदगी ने इस उपलब्धि को और महत्वपूर्ण बना दिया है। यह न केवल बाघों के लिए एक सुरक्षित आवास है, बल्कि राज्य की वन्यजीव संरक्षण की दिशा में उठाए गए कदमों का परिणाम भी है।

Key Takeaways

  • गुजरात 33 साल बाद फिर से टाइगर स्टेट बना है।
  • रतनमहल वन्यजीव अभयारण्य में बाघ की मौजूदगी दर्ज की गई है।
  • वन्यजीव संरक्षण के लिए विभिन्न उपाय किए जा रहे हैं।
  • गुजरात में एशियाई शेरों की संख्या में भी रिकॉर्ड बढ़ोतरी हुई है।
  • इको-टूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए प्रयास जारी हैं।

गांधीनगर, 21 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में गुजरात ने एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। गुजरात अब 33 साल बाद एक बार फिर टाइगर स्टेट बन चुका है।

हाल ही में दाहोद जिले के रतनमहल वन्यजीव अभयारण्य में एक बाघ देखा गया। यह बाघ सुरक्षित है और यहाँ स्थायी ठिकाना बना चुका है।

राज्य के वन और पर्यावरण मंत्री अर्जुन मोढवाडिया ने कहा कि यह गर्व की बात है कि गुजरात अब शेरों और तेंदुओं के अलावा बाघों के लिए भी एक प्राकृतिक आवास बन गया है। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व और मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के मार्गदर्शन में पिछले कुछ वर्षों में वन संरक्षण के प्रयासों ने राज्य को वन्यजीवों के लिए एक पसंदीदा जगह बना दिया है। जहां गुजरात में एशियाई शेरों की आबादी रिकॉर्ड संख्या तक पहुंच गई है, वहीं अब बाघों की मौजूदगी का मतलब है कि राज्य के जंगलों में शेर और बाघ दोनों घूमते हैं।

उन्होंने कहा कि जाहिर है कि तीन दशक पहले गुजरात के जंगलों में बाघ पाए जाते थे, यानी यहाँ का हैबिटेट बाघ के लिए अनुकूल है। पिछले साल फरवरी से यह बाघ रतनमहल वाइल्डलाइफ सेंचुरी में विचरण कर रहा है, और यह बेहद उत्साहित करने वाला है।

मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के मार्गदर्शन में बीते वर्षों में गुजरात में फॉरेस्ट कंजर्वेशन को बढ़ावा दिया गया है और इसी का नतीजा है कि राज्य वन्यजीवों के लिए पसंदीदा स्थल बन रहा है। आज एक तरफ जहां गुजरात में एशियाई शेरों की संख्या में रिकॉर्ड बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है, वहीं अब यहाँ बाघ की मौजूदगी दर्ज की गई है। यानी अब गुजरात के जंगलों में लॉयन और टाइगर दोनों की दहाड़ सुनाई दे रही है।

उन्होंने एक्स पोस्ट में बताया कि गांधीनगर में सीएम भूपेंद्र पटेल ने स्टेट वाइल्डलाइफ बोर्ड की मीटिंग में हिस्सा लिया और वाइल्डलाइफ कंजर्वेशन के कार्यों की समीक्षा की। गुजरात के लिए यह खुशी की बात है कि बनासकांठा में जेसोर बेयर सैंक्चुअरी को भारत सरकार के पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने नेशनल बेयर कंजर्वेशन प्रोग्राम में शामिल किया है।

उन्होंने बताया कि मीटिंग में कुछ मुख्य बिंदुओं पर चर्चा हुई, जैसे कि इको-टूरिज्म को बढ़ावा देना, इको-टूरिज्म के लिए विजिटर पॉलिसी गाइडलाइन बनाना, टाइगर कंजर्वेशन के लिए लोकल लोगों को ट्रेनिंग देना, और आने वाले समय में तेंदुओं के लिए एक सैंक्चुअरी पक्का करना। इसके अलावा, सैंक्चुअरी और नेशनल पार्क में सड़क, पानी की सप्लाई, ऑप्टिकल फाइबर, रिन्यूएबल एनर्जी, और ट्रांसमिशन लाइन समेत 18 डेवलपमेंट प्रपोजल पर विस्तार से चर्चा की गई।

Point of View

बल्कि पूरे देश के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ है। बाघों की मौजूदगी से यह स्पष्ट होता है कि गुजरात के जंगलों में प्राकृतिक संतुलन स्थापित हो रहा है। यह राज्य की वन्यजीव संरक्षण नीतियों का परिणाम है और हमें अन्य राज्यों को भी इस दिशा में प्रेरित करना चाहिए।
NationPress
21/01/2026

Frequently Asked Questions

गुजरात टाइगर स्टेट कब बना?
गुजरात ने 33 साल बाद फिर से टाइगर स्टेट का दर्जा प्राप्त किया है।
रतनमहल वन्यजीव अभयारण्य में क्या देखा गया?
रतनमहल वन्यजीव अभयारण्य में एक बाघ देखा गया है।
गुजरात में वन्यजीव संरक्षण के लिए क्या प्रयास किए गए हैं?
गुजरात में वन्यजीव संरक्षण के लिए कई कदम उठाए गए हैं, जैसे कि इको-टूरिज्म को बढ़ावा देना और लोकल लोगों को ट्रेनिंग देना।
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