29 जुलाई 2026
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विश्व बाघ दिवस 2026: रणदीप हुड्डा और श्रिया पिलगांवकर ने माँगी वन्यजीव गलियारों की सुरक्षा

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विश्व बाघ दिवस 2026: रणदीप हुड्डा और श्रिया पिलगांवकर ने माँगी वन्यजीव गलियारों की सुरक्षा

सारांश

विश्व बाघ दिवस पर रणदीप हुड्डा और श्रिया पिलगांवकर ने सिर्फ बधाई नहीं दी — उन्होंने एक असुविधाजनक सवाल उठाया: क्या बाघों की बढ़ती गिनती पर्याप्त है, जब उनके जंगल खनन और विकास की भेंट चढ़ रहे हैं? भारत में दुनिया के 70% जंगली बाघ हैं — यह उपलब्धि और ज़िम्मेदारी दोनों है।

मुख्य बातें

29 जुलाई 2026 को अंतर्राष्ट्रीय बाघ दिवस पर रणदीप हुड्डा और श्रिया पिलगांवकर ने इंस्टाग्राम पर वन्यजीव संरक्षण का संदेश दिया।
रणदीप हुड्डा ने खनन और विकास परियोजनाओं द्वारा बाघों के जंगल और गलियारों के विनाश पर चिंता जताई।
श्रिया पिलगांवकर ने बताया कि भारत दुनिया के लगभग 70% जंगली बाघों का घर है।
दोनों कलाकारों ने बाघों की संख्या के साथ-साथ उनके प्राकृतिक आवास और वन्यजीव गलियारों की रक्षा की अपील की।
अंतर्राष्ट्रीय बाघ दिवस की शुरुआत 2010 में सेंट पीटर्सबर्ग टाइगर समिट से हुई थी।

अंतर्राष्ट्रीय बाघ दिवस पर 29 जुलाई 2026 को अभिनेता रणदीप हुड्डा और अभिनेत्री श्रिया पिलगांवकर ने इंस्टाग्राम के ज़रिए बाघों के प्राकृतिक आवास और वन्यजीव गलियारों की रक्षा का आह्वान किया। दोनों कलाकारों ने बाघों की बढ़ती संख्या के साथ-साथ उनके जंगलों को बचाने की ज़रूरत पर ज़ोर दिया।

रणदीप हुड्डा का संदेश: संख्या नहीं, आवास बचाओ

वन्यजीव प्रेमी रणदीप हुड्डा ने इंस्टाग्राम पर बाघ की तस्वीरें साझा करते हुए एक तीखा सवाल उठाया। उन्होंने लिखा, 'हम बाघों की बढ़ती संख्या पर गर्व तो करते हैं लेकिन दूसरी ओर खनन और विकास परियोजनाओं के नाम पर उनके जंगलों और उन रास्तों को लगातार नष्ट कर रहे हैं, जिन पर उनका जीवन निर्भर करता है।'

उन्होंने आगे लिखा, 'बाघों को बचाने का मतलब सिर्फ उनकी संख्या बढ़ाना नहीं है बल्कि उनके प्राकृतिक आवास और जंगलों की रक्षा करना भी है। अगर हम उनके घरों को बचाएंगे, तो हम प्रकृति और आखिरकार खुद को भी सुरक्षित रख पाएंगे।' यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब देश में कई वन्यजीव गलियारे खनन और बुनियादी ढाँचा परियोजनाओं के दबाव में हैं।

श्रिया पिलगांवकर का अनुभव: जंगल में पहली मुलाकात

अभिनेत्री श्रिया पिलगांवकर ने इंस्टाग्राम पर बाघों की तस्वीरें पोस्ट करते हुए अपना एक निजी अनुभव साझा किया। उन्होंने लिखा, 'पहली बार जंगल में बाघों को उनके प्राकृतिक आवास में देखना मेरे जीवन के सबसे यादगार अनुभवों में से एक था। उन्हें खुले जंगल में देखना मन को विनम्रता और प्रकृति के प्रति सम्मान से भर देता है।'

उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि आज भारत दुनिया में सबसे अधिक जंगली बाघों का घर है और विश्व के लगभग 70 प्रतिशत जंगली बाघ भारत में पाए जाते हैं।

वन्यजीव संरक्षण का व्यापक संदर्भ

श्रिया पिलगांवकर ने अपने संदेश में स्पष्ट किया, 'यह इस बात की याद दिलाता है कि वन्यजीव संरक्षण कितना जरूरी है। हमारे जंगलों की रक्षा करना सिर्फ बाघों को बचाना नहीं बल्कि पूरी प्रकृति और उससे जुड़े जीवन को सुरक्षित रखना है।' गौरतलब है कि हर वर्ष 29 जुलाई को अंतर्राष्ट्रीय बाघ दिवस मनाया जाता है, जिसकी शुरुआत 2010 में सेंट पीटर्सबर्ग टाइगर समिट से हुई थी।

आम जनता पर असर और आगे की राह

दोनों कलाकारों की यह अपील सोशल मीडिया पर व्यापक रूप से साझा की गई। विशेषज्ञों का मानना है कि सार्वजनिक हस्तियों की आवाज़ वन्यजीव संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाने में अहम भूमिका निभाती है। बाघ संरक्षण केवल गिनती तक सीमित नहीं, बल्कि उनके प्राकृतिक आवास और गलियारों की निरंतर रक्षा पर भी निर्भर करता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन वन्यजीव गलियारे सिकुड़ते रहते हैं। भारत का '70% जंगली बाघ' वाला गौरव तब तक टिकाऊ नहीं, जब तक आवास संरक्षण को विकास परियोजनाओं की मंज़ूरी प्रक्रिया में बराबर की प्राथमिकता नहीं मिलती। मुख्यधारा की कवरेज अक्सर इन संदेशों को 'सेलिब्रिटी जागरूकता' तक सीमित कर देती है — असल सवाल यह है कि क्या नीतिगत ढाँचा इस चेतावनी को सुन रहा है।
RashtraPress
29 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अंतर्राष्ट्रीय बाघ दिवस कब और क्यों मनाया जाता है?
अंतर्राष्ट्रीय बाघ दिवस हर वर्ष 29 जुलाई को मनाया जाता है। इसकी शुरुआत 2010 में सेंट पीटर्सबर्ग टाइगर समिट में हुई थी, जिसका उद्देश्य बाघों के प्राकृतिक आवास की रक्षा और उनकी घटती संख्या के प्रति वैश्विक जागरूकता बढ़ाना है।
रणदीप हुड्डा ने विश्व बाघ दिवस पर क्या कहा?
रणदीप हुड्डा ने इंस्टाग्राम पर लिखा कि बाघों की बढ़ती संख्या पर गर्व करते हुए हम खनन और विकास परियोजनाओं के नाम पर उनके जंगलों और गलियारों को नष्ट कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि बाघों को बचाने का अर्थ उनके प्राकृतिक आवास की रक्षा करना भी है।
श्रिया पिलगांवकर ने बाघ संरक्षण पर क्या संदेश दिया?
श्रिया पिलगांवकर ने इंस्टाग्राम पर बताया कि जंगल में पहली बार बाघ देखना उनके जीवन का सबसे यादगार अनुभव था। उन्होंने कहा कि भारत दुनिया के लगभग 70% जंगली बाघों का घर है और जंगलों की रक्षा करना पूरी प्रकृति को सुरक्षित रखना है।
भारत में दुनिया के कितने प्रतिशत जंगली बाघ हैं?
श्रिया पिलगांवकर के अनुसार भारत में दुनिया के लगभग 70% जंगली बाघ पाए जाते हैं, जो भारत को वैश्विक बाघ संरक्षण का सबसे महत्वपूर्ण केंद्र बनाता है।
वन्यजीव गलियारों की सुरक्षा बाघों के लिए क्यों ज़रूरी है?
वन्यजीव गलियारे बाघों को एक जंगल से दूसरे जंगल तक सुरक्षित आवाजाही की अनुमति देते हैं, जो उनके प्रजनन और आनुवंशिक विविधता के लिए अनिवार्य है। खनन और विकास परियोजनाओं से इन गलियारों के कटने पर बाघ अलग-थलग पड़ जाते हैं, जिससे उनका दीर्घकालिक अस्तित्व खतरे में पड़ता है।
राष्ट्र प्रेस
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