28 जून 2026
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सरिस्का बाघ पुनर्स्थापन के 18 वर्ष: 56 बाघों के साथ विश्व का अनुकरणीय संरक्षण मॉडल

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सरिस्का बाघ पुनर्स्थापन के 18 वर्ष: 56 बाघों के साथ विश्व का अनुकरणीय संरक्षण मॉडल

सारांश

दुनिया के पहले सफल बाघ पुनर्वास की 18वीं वर्षगाँठ पर सरिस्का अब 56 बाघों का घर है — लेकिन यह सफलता नई चुनौतियाँ भी लाई है। कई रिजर्व क्षमता से अधिक भरे हैं, जबकि कुछ में बाघ हैं ही नहीं। इंसान-बाघ टकराव बढ़ रहा है। NTCA की यह कार्यशाला उसी असंतुलन को दूर करने की कोशिश है।

मुख्य बातें

सरिस्का टाइगर रिजर्व में बाघ पुनर्स्थापन कार्यक्रम के 18 वर्ष पूरे होने पर 28 जून 2026 को अलवर में राष्ट्रीय कार्यशाला आयोजित हुई।
वर्तमान में सरिस्का में 56 बाघ मौजूद हैं, जो इस संरक्षण मॉडल की बड़ी सफलता है।
केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव ने इसे 'प्रकृति के पुनर्जागरण की प्रेरक कहानी' बताया।
देश के 11 बाघ-आबादी वाले राज्यों के मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक और 20 टाइगर रिजर्व के फील्ड डायरेक्टर शामिल हुए।
यादव ने चेताया कि कई रिजर्व में बाघों की संख्या क्षमता से अधिक हो गई है, जिससे इंसान-बाघ टकराव बढ़ रहा है।
मध्यप्रदेश के अधिकारियों ने चीता पुनर्वास कार्यक्रम के अनुभव भी साझा किए।

सरिस्का टाइगर रिजर्व में बाघ पुनर्स्थापन कार्यक्रम के 18 वर्ष पूरे होने पर 28 जून 2026 को अलवर, राजस्थान में एक राष्ट्रीय कार्यशाला आयोजित की गई, जिसमें देश के 11 बाघ-आबादी वाले राज्यों के मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक और 20 टाइगर रिजर्व व राष्ट्रीय उद्यानों के फील्ड डायरेक्टर शामिल हुए। यह कार्यशाला राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) द्वारा आयोजित की गई और इसे दुनिया के पहले सफल बाघ पुनर्वास कार्यक्रम की ऐतिहासिक उपलब्धि के रूप में रेखांकित किया गया।

कार्यशाला का उद्घाटन और मुख्य संदेश

कार्यशाला का उद्घाटन केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव और राजस्थान के वन राज्य मंत्री संजय शर्मा ने संयुक्त रूप से किया। पत्रकारों से बात करते हुए भूपेंद्र यादव ने कहा कि कभी बाघ विहीन हो चुका यह क्षेत्र आज समृद्ध जैव विविधता का प्रतीक बन चुका है। उन्होंने इसे "केवल बाघों की वापसी नहीं, बल्कि प्रकृति के पुनर्जागरण, वैज्ञानिक संरक्षण और सामूहिक संकल्प की प्रेरक कहानी" बताया।

वर्तमान में सरिस्का में 56 बाघों की मौजूदगी इस संरक्षण मॉडल की सफलता को दर्शाती है। यादव ने देशवासियों और पर्यावरण प्रेमियों को इस उपलब्धि पर बधाई दी और कहा कि सरिस्का का यह मॉडल भारत ही नहीं, बल्कि विश्व के लिए अनुकरणीय बन चुका है।

राज्यों के अनुभव और चीता पुनर्वास की जानकारी

कार्यशाला में विभिन्न राज्यों के अधिकारियों ने बाघ संरक्षण की स्थिति, चुनौतियों और वन्यजीव आवास प्रबंधन के अनुभव साझा किए। मध्यप्रदेश के वन अधिकारियों ने अपने राज्य में चल रहे चीता पुनर्वास कार्यक्रम और उससे जुड़े अनुभवों की भी विस्तृत जानकारी दी। वन राज्य मंत्री संजय शर्मा ने राजस्थान के अन्य वन क्षेत्रों की उपलब्धियों और चुनौतियों पर प्रकाश डाला।

नई चुनौतियाँ: इंसान और बाघ के बीच बढ़ता टकराव

आईबीसीए के महानिदेशक डॉ. एस.पी. यादव ने कार्यशाला में चेताया कि प्रोजेक्ट टाइगर की सफलता अब नई चुनौतियाँ भी लेकर आई है। उन्होंने कहा, "आज हमारे कई टाइगर रिजर्व में बाघों की संख्या या तो उनकी क्षमता से ज़्यादा हो गई है या फिर सीमा पर पहुँच गई है। साथ ही, देश में ऐसे टाइगर रिजर्व भी हैं जहाँ बाघ नहीं हैं या उनकी संख्या बहुत कम है।" पर्यावरणविद् और वन्यजीव संरक्षणवादी चिंता जता रहे हैं कि बाघों की बढ़ती आबादी से इंसान और बाघ के बीच टकराव में वृद्धि हो रही है।

फील्ड विजिट और आगे की योजना

कार्यशाला के समापन के बाद प्रतिभागियों को सरिस्का टाइगर रिजर्व का फील्ड विजिट कराया जाएगा, ताकि ज़मीनी स्तर पर संरक्षण प्रयासों को प्रत्यक्ष रूप से समझा जा सके। वन राज्य मंत्री संजय शर्मा ने भरोसा दिलाया कि आने वाले दिनों में वन विभाग की सहायता से और भी उल्लेखनीय कार्य होंगे। यह कार्यशाला देश में बाघ संरक्षण की रणनीति को और अधिक समन्वित और प्रभावी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

कुछ में नाममात्र — और इंसान-बाघ टकराव के आँकड़े लगातार बढ़ रहे हैं। सफलता का अगला पड़ाव संख्या बढ़ाना नहीं, बल्कि बाघों का संतुलित पुनर्वितरण और सीमांत समुदायों के साथ साझेदारी है — जो अभी तक नीतिगत प्राथमिकता में नहीं आया।
RashtraPress
28 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सरिस्का बाघ पुनर्स्थापन कार्यक्रम क्या है और यह क्यों खास है?
सरिस्का टाइगर रिजर्व में 2008 में शुरू हुआ बाघ पुनर्स्थापन कार्यक्रम दुनिया का पहला सफल बाघ पुनर्वास प्रयोग माना जाता है, जहाँ बाघ पूरी तरह समाप्त हो जाने के बाद उन्हें दूसरे रिजर्व से लाकर बसाया गया। आज सरिस्का में 56 बाघ हैं, जो इसे वैश्विक संरक्षण का अनुकरणीय मॉडल बनाता है।
28 जून 2026 को अलवर में कौन-सी कार्यशाला हुई?
राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) ने सरिस्का बाघ पुनर्स्थापन के 18 वर्ष पूरे होने पर अलवर में राष्ट्रीय कार्यशाला आयोजित की। इसमें 11 बाघ-आबादी वाले राज्यों के मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक और 20 टाइगर रिजर्व व राष्ट्रीय उद्यानों के फील्ड डायरेक्टर शामिल हुए।
सरिस्का में अभी कितने बाघ हैं?
वर्तमान में सरिस्का टाइगर रिजर्व में 56 बाघ मौजूद हैं। केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने इसे इस संरक्षण मॉडल की बड़ी सफलता बताया।
बाघ संरक्षण की सफलता से कौन-सी नई चुनौतियाँ सामने आई हैं?
आईबीसीए के महानिदेशक डॉ. एस.पी. यादव के अनुसार, कई टाइगर रिजर्व में बाघों की संख्या उनकी क्षमता से अधिक हो गई है, जबकि कुछ रिजर्व में बाघ हैं ही नहीं या बहुत कम हैं। इससे इंसान और बाघ के बीच टकराव बढ़ रहा है, जो पर्यावरणविदों और वन्यजीव संरक्षणवादियों के लिए चिंता का विषय है।
इस कार्यशाला में मध्यप्रदेश की क्या भूमिका रही?
मध्यप्रदेश के वन अधिकारियों ने कार्यशाला में अपने राज्य में चल रहे चीता पुनर्वास कार्यक्रम और उससे जुड़े अनुभव साझा किए। यह जानकारी अन्य राज्यों के लिए वन्यजीव पुनर्वास रणनीति बनाने में उपयोगी मानी जा रही है।
राष्ट्र प्रेस
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