काजीरंगा में उप-वयस्क बाघ का शव बरामद, पोस्टमार्टम में मौत का कारण अज्ञात
सारांश
मुख्य बातें
काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान एवं टाइगर रिजर्व (KNPTR) के मिहीमुख क्षेत्र से एक उप-वयस्क बाघ का शव बरामद होने के बाद वन विभाग ने जाँच शुरू कर दी है। शनिवार शाम नियमित गश्त के दौरान कोहारा रेंज के वनकर्मियों को यह शव मिला, जो अधिकारियों के अनुसार करीब चार दिन पुराना था। रविवार, 1 जून को अधिकारियों ने इस बात की पुष्टि की।
मुख्य घटनाक्रम
शव मिलते ही पार्क प्रशासन ने वन्यजीव संरक्षण नियमों के तहत आवश्यक प्रक्रियाएँ शुरू कीं। KNPTR की निदेशक सोनाली घोष ने राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) की मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) के तहत पोस्टमार्टम और शव के निस्तारण के लिए एक समिति का गठन किया। रविवार को पोस्टमार्टम किया गया।
हालाँकि, अधिकारियों के अनुसार शव काफी अधिक सड़-गल चुका था, जिसके कारण पोस्टमार्टम में मौत के वास्तविक कारणों का पता नहीं चल सका। जाँच अभी जारी है।
इस वर्ष बाघ मौतों का सिलसिला
गौरतलब है कि यह 2026 में काजीरंगा से बरामद होने वाला चौथा बाघ शव है। इससे पहले जनवरी और फरवरी में भी तीन बाघों के शव मिले थे।
7 फरवरी को बुरापहाड़ रेंज के घोराकाटी क्षेत्र में एक 12 से 13 वर्षीय नर बाघ का शव मिला था। प्रारंभिक जाँच में बाघों के बीच आपसी संघर्ष को मौत का कारण माना गया था।
18 जनवरी को बागोरी पश्चिमी रेंज के कथपोरा क्षेत्र से तीन से चार वर्ष की एक बाघिन का शव मिला था, जिसकी मौत भी कथित तौर पर आपसी संघर्ष के कारण हुई थी। इसके अलावा 14 जनवरी को बिस्वनाथ वन्यजीव प्रभाग के गामिरी स्थित थुटे चापोरी क्षेत्र में दो से तीन वर्ष के एक युवा रॉयल बंगाल टाइगर का शव मिला था, जिसमें पशु चिकित्सकीय जाँच में प्राकृतिक कारण या संघर्ष की संभावना जताई गई थी।
काजीरंगा का वन्यजीव महत्व
यूनेस्को विश्व धरोहर सूची में शामिल काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान भारत के प्रसिद्ध 'बिग फाइव' वन्यजीवों का घर है। नवीनतम आँकड़ों के अनुसार यहाँ 2,613 एक सींग वाले गैंडे, 104 बंगाल टाइगर, 1,228 एशियाई हाथी, 2,565 जंगली भैंसे और 1,129 पूर्वी दलदली हिरण पाए जाते हैं।
यह उद्यान गोलाघाट, नगांव, सोनितपुर और बिस्वनाथ जिलों में फैला हुआ है। राजस्व के लिहाज़ से भी यह महत्वपूर्ण है — वर्ष 2024-25 में इसने ₹10.90 करोड़ से अधिक और 2023-24 में ₹8.81 करोड़ से अधिक का राजस्व अर्जित किया।
आम जनता और संरक्षण पर असर
एक वर्ष में चार बाघों की मौत संरक्षणवादियों के लिए चिंता का विषय है, विशेषकर तब जब काजीरंगा को भारत के सफलतम बाघ अभयारण्यों में गिना जाता है। आँकड़ों के अनुसार उद्यान में केवल 104 बाघ हैं, और प्रत्येक मौत इस छोटी आबादी पर दबाव डालती है।
क्या होगा आगे
अधिकारियों ने बताया कि मौत के कारणों की पुष्टि के लिए जाँच जारी है। NTCA के दिशानिर्देशों के तहत आगे की कार्यवाही की जाएगी। यह ऐसे समय में आया है जब वन विभाग पर उद्यान में बाघों की निगरानी और सुरक्षा को और मजबूत करने का दबाव बढ़ रहा है।