झारखंड परीक्षा घोटाला: भाजपा सांसदों ने संसद में हेमंत सरकार को घेरा, कांग्रेस पर दोहरे रवैये का आरोप
सारांश
मुख्य बातें
मानसून सत्र के दौरान बुधवार, 12 अगस्त को संसद में भारतीय जनता पार्टी (BJP) के कई सांसदों ने झारखंड में परीक्षाओं और भर्ती प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं को लेकर राज्य की हेमंत सोरेन सरकार और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) पर तीखा हमला बोला। सांसदों का आरोप है कि झारखंड में छात्र सड़कों पर उतरने को मजबूर हैं, लेकिन राज्य सरकार उनकी अनदेखी कर रही है।
मुख्य घटनाक्रम: दामोदर अग्रवाल का आरोप
BJP सांसद दामोदर अग्रवाल ने सदन में कहा कि झारखंड में परीक्षाओं और भर्ती प्रक्रिया में गड़बड़ियाँ हुई हैं और राज्य सरकार छात्रों के हितों की रक्षा करने में विफल रही है। उन्होंने कहा, 'झारखंड में छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया गया और उनकी उम्मीदों को कुचला गया, जिसके कारण छात्र सड़कों पर उतरने को मजबूर हैं।' अग्रवाल ने यह भी सवाल उठाया कि जो लोग अन्य मुद्दों पर मुखर रहते हैं, वे झारखंड के छात्रों के प्रति सहानुभूति क्यों नहीं दिखा रहे।
संसद में गतिरोध और विपक्ष पर निशाना
BJP सांसद जगदंबिका पाल ने कहा कि झारखंड की घटनाओं पर विपक्ष की चुप्पी गंभीर सवाल खड़े करती है। उन्होंने कहा कि गृह मंत्री सदन में जवाब देने को तैयार हैं, फिर भी सदन की कार्यवाही बाधित की जा रही है। पाल ने आरोप लगाया कि विपक्ष राजनीतिक कारणों से चर्चा से भाग रहा है और संसद को चलने नहीं दे रहा।
BJP सांसद दिनेश शर्मा ने विपक्ष की रणनीति पर सवाल उठाते हुए कहा कि पहले चर्चा की माँग की गई, फिर गृह मंत्री के वक्तव्य की माँग रखी गई, और इसके बाद नया मुद्दा उठाया गया। उनके अनुसार, विपक्ष लगातार अपनी माँगें बदल रहा है और उसका असली उद्देश्य संसद की कार्यवाही को बाधित करना है। शर्मा ने यह भी कहा कि विपक्ष के पास विकास और देश की सुरक्षा से जुड़े ठोस मुद्दे नहीं हैं।
कांग्रेस पर दोहरे रवैये का आरोप
BJP सांसद आदित्य साहू ने कहा कि झारखंड में सरकार कांग्रेस के समर्थन से चल रही है और कांग्रेस दिल्ली में अलग तथा झारखंड में अलग रुख अपनाती है। उन्होंने कहा कि जनता अब कांग्रेस के इस कथित दोहरे रवैये को समझ रही है। यह ऐसे समय में आया है जब झारखंड में छात्र आंदोलन तेज़ हो रहा है और भर्ती परीक्षाओं की पारदर्शिता पर सवाल उठ रहे हैं।
परीक्षा अनियमितताओं पर तुलनात्मक विश्लेषण
दिनेश शर्मा ने झारखंड की स्थिति की तुलना उन मामलों से की जहाँ परीक्षा रद्द कर दोबारा पारदर्शी परीक्षा कराई गई। उन्होंने आरोप लगाया कि झारखंड में परीक्षा रद्द करने और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की दिशा में पर्याप्त कदम नहीं उठाए गए। गौरतलब है कि देश के कई राज्यों में भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर छात्र आंदोलन एक बड़ी राजनीतिक चुनौती बन चुके हैं।
शून्यकाल: महाराजा रणजीत सिंह की विरासत का मुद्दा
इसी सत्र में BJP सांसद सतनाम सिंह संधू ने शून्यकाल में महाराजा रणजीत सिंह की विरासत के संरक्षण का मुद्दा उठाया। उन्होंने रोपड़ में सतलुज नदी के किनारे महाराजा रणजीत सिंह और तत्कालीन गवर्नर जनरल लॉर्ड विलियम बेंटिक के बीच हुई ऐतिहासिक संधि का उल्लेख करते हुए इसे भारत के कूटनीतिक इतिहास की महत्वपूर्ण घटना बताया। संधू ने इस विरासत को संरक्षित करने की आवश्यकता पर जोर दिया। मानसून सत्र में झारखंड का यह मुद्दा आने वाले दिनों में और तेज़ राजनीतिक बहस का केंद्र बन सकता है।