5 सितंबर 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

झारखंड में मंत्री-नौकरशाही टकराव पर BJP का हमला, CM हेमंत सोरेन की चुप्पी पर उठे सवाल

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
झारखंड में मंत्री-नौकरशाही टकराव पर BJP का हमला, CM हेमंत सोरेन की चुप्पी पर उठे सवाल

सारांश

झारखंड में वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर और नौकरशाही के बीच कथित टकराव अब राजनीतिक रूप ले चुका है। BJP प्रवक्ता प्रदीप सिन्हा का सीधा आरोप है कि CM हेमंत सोरेन की चुप्पी अधिकारियों को खुली छूट दे रही है — और DGP प्रकरण ने इस विवाद को नया आयाम दे दिया है।

मुख्य बातें

BJP प्रवक्ता प्रदीप सिन्हा ने 21 जुलाई को आरोप लगाया कि झारखंड में वरिष्ठ मंत्रियों की नौकरशाही द्वारा लगातार अनदेखी हो रही है।
वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर के मुद्दों पर करीब एक महीने से पत्राचार जारी है और कई बातें सार्वजनिक हो चुकी हैं।
BJP प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू का डीजीपी को किया फोन न उठाया गया, न व्हाट्सएप का जवाब मिला।
एक वरिष्ठ मंत्री को अधिकारी से मिलने के लिए 15 मिनट प्रतीक्षा करनी पड़ी — BJP ने इसे शासन संकट का प्रमाण बताया।
कांग्रेस झारखंड प्रभारी के.
राजू ने हस्तक्षेप किया, लेकिन BJP का कहना है कि उनके बयान में कोई ठोस समाधान नहीं था।
प्रोजेक्ट भवन में पत्रकारों के प्रवेश पर रोक को लेकर भी BJP ने प्रेस स्वतंत्रता पर सवाल उठाए।

भारतीय जनता पार्टी (BJP) के झारखंड प्रदेश प्रवक्ता प्रदीप सिन्हा ने 21 जुलाई को रांची में राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला और आरोप लगाया कि वरिष्ठ मंत्रियों की लगातार अनदेखी हो रही है, जबकि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन इस पूरे विवाद पर मौन साधे हुए हैं। BJP का कहना है कि यह चुप्पी इस बात का संकेत है कि शीर्ष पदों पर बैठे नौकरशाहों को सरकारी संरक्षण प्राप्त है।

मुख्य घटनाक्रम

प्रदीप सिन्हा के अनुसार, पिछले लगभग एक महीने से वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर द्वारा उठाए गए मुद्दों को लेकर पत्राचार जारी है और इससे जुड़ी कई बातें सार्वजनिक भी हो चुकी हैं। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में कार्यपालिका और विधायिका दोनों की अपनी-अपनी जिम्मेदारियाँ और सीमाएँ होती हैं, और दोनों को परस्पर समन्वय से काम करना चाहिए।

सिन्हा ने एक विशेष घटना का उल्लेख करते हुए कहा कि यदि राज्य का एक वरिष्ठ मंत्री किसी अधिकारी से मिलने जाए और उसे 15 मिनट तक प्रतीक्षा करनी पड़े, तो यह स्पष्ट रूप से दर्शाता है कि प्रशासनिक हालात नियंत्रण से बाहर हो रहे हैं।

DGP प्रकरण और BJP अध्यक्ष की शिकायत

BJP प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू ने कथित तौर पर राज्य के डीजीपी से फोन पर संपर्क करने का प्रयास किया, लेकिन न फोन उठाया गया, न व्हाट्सएप संदेश का जवाब दिया गया और न ही बाद में कॉल बैक की गई। सिन्हा ने इसे राजनीतिक दलों के प्रति असम्मानजनक व्यवहार बताते हुए मुख्यमंत्री से नौकरशाही को संवैधानिक सीमाओं के भीतर काम करने के निर्देश देने की माँग की।

कांग्रेस प्रभारी की भूमिका पर BJP की आपत्ति

सिन्हा ने यह भी कहा कि इस विवाद के चलते कांग्रेस के झारखंड प्रभारी के. राजू को भी हस्तक्षेप करना पड़ा। हालाँकि, BJP का आरोप है कि राजू के बयान में समस्या के समाधान की कोई स्पष्ट दिशा नहीं थी और उन्होंने मुख्यमंत्री से बातचीत करने का संकल्प भी नहीं जताया — केवल कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं से वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर के साथ एकजुट रहने की अपील की।

मीडिया स्वतंत्रता पर आरोप

BJP प्रवक्ता ने राज्य सरकार पर प्रेस की स्वतंत्रता को प्रभावित करने का भी आरोप लगाया। उनके अनुसार, प्रोजेक्ट भवन में पत्रकारों के प्रवेश पर रोक जैसी स्थिति पारदर्शिता के लिए गंभीर खतरा है। सिन्हा ने कहा कि जो लोग स्वयं को संविधान के सबसे बड़े प्रहरी बताते हैं, वही अब पत्रकारों के कामकाज पर अंकुश लगाने की कोशिश कर रहे हैं — यह लोकतांत्रिक मूल्यों के विरुद्ध है।

आगे क्या होगा

BJP ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से तत्काल हस्तक्षेप की माँग की है। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सत्तारूढ़ गठबंधन इस आंतरिक तनाव को कैसे संभालता है और क्या मुख्यमंत्री कार्यालय इस पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया देता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

तो यह मुख्यमंत्री कार्यालय की पकड़ पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगाता है। CM सोरेन की चुप्पी को BJP राजनीतिक हथियार बना रही है, लेकिन असली सवाल यह है कि क्या गठबंधन के भीतर ही शक्ति-संतुलन बिगड़ रहा है। DGP प्रकरण और प्रोजेक्ट भवन में मीडिया प्रतिबंध — दोनों मिलकर एक ऐसी तस्वीर बनाते हैं जिसे सत्तारूढ़ दल को नज़रअंदाज़ करना महँगा पड़ सकता है।
RashtraPress
5 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

झारखंड में मंत्री और नौकरशाही के बीच विवाद क्या है?
कथित तौर पर वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर और वरिष्ठ नौकरशाहों के बीच करीब एक महीने से पत्राचार और तनाव जारी है। BJP का आरोप है कि मंत्रियों की अनदेखी हो रही है और अधिकारी संवैधानिक सीमाओं से बाहर काम कर रहे हैं।
CM हेमंत सोरेन की चुप्पी पर BJP क्यों सवाल उठा रही है?
BJP प्रवक्ता प्रदीप सिन्हा का कहना है कि मुख्यमंत्री का मौन यह संकेत देता है कि शीर्ष अधिकारियों को सरकारी संरक्षण प्राप्त है। उनके अनुसार, CM को तत्काल हस्तक्षेप कर नौकरशाही को उसकी सीमाओं में रखना चाहिए था।
DGP और BJP अध्यक्ष आदित्य साहू का प्रकरण क्या है?
BJP प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू ने राज्य के DGP को फोन किया, लेकिन कथित तौर पर न फोन उठाया गया, न व्हाट्सएप संदेश का जवाब मिला और न ही बाद में कॉल बैक की गई। BJP ने इसे राजनीतिक दलों के प्रति असम्मानजनक आचरण बताया है।
कांग्रेस प्रभारी के. राजू की इस मामले में क्या भूमिका रही?
कांग्रेस के झारखंड प्रभारी के. राजू ने इस विवाद में हस्तक्षेप किया। हालाँकि, BJP का आरोप है कि उनके बयान में कोई ठोस समाधान नहीं था और उन्होंने CM से बातचीत करने की बात भी नहीं कही — केवल कांग्रेस कार्यकर्ताओं से वित्त मंत्री के साथ एकजुट रहने की अपील की।
प्रोजेक्ट भवन में पत्रकारों पर रोक का मामला क्या है?
BJP प्रवक्ता प्रदीप सिन्हा ने आरोप लगाया कि प्रोजेक्ट भवन में पत्रकारों के प्रवेश पर रोक लगाई जा रही है, जो प्रेस की स्वतंत्रता और सरकारी पारदर्शिता के लिए खतरनाक है। उन्होंने इसे लोकतांत्रिक मूल्यों के विरुद्ध बताया।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 3 सप्ताह पहले
  2. 3 सप्ताह पहले
  3. 3 सप्ताह पहले
  4. 3 सप्ताह पहले
  5. 3 सप्ताह पहले
  6. 3 महीने पहले
  7. 4 महीने पहले
  8. 5 महीने पहले