झारखंड में मंत्री-नौकरशाही टकराव पर BJP का हमला, CM हेमंत सोरेन की चुप्पी पर उठे सवाल
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय जनता पार्टी (BJP) के झारखंड प्रदेश प्रवक्ता प्रदीप सिन्हा ने 21 जुलाई को रांची में राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला और आरोप लगाया कि वरिष्ठ मंत्रियों की लगातार अनदेखी हो रही है, जबकि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन इस पूरे विवाद पर मौन साधे हुए हैं। BJP का कहना है कि यह चुप्पी इस बात का संकेत है कि शीर्ष पदों पर बैठे नौकरशाहों को सरकारी संरक्षण प्राप्त है।
मुख्य घटनाक्रम
प्रदीप सिन्हा के अनुसार, पिछले लगभग एक महीने से वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर द्वारा उठाए गए मुद्दों को लेकर पत्राचार जारी है और इससे जुड़ी कई बातें सार्वजनिक भी हो चुकी हैं। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में कार्यपालिका और विधायिका दोनों की अपनी-अपनी जिम्मेदारियाँ और सीमाएँ होती हैं, और दोनों को परस्पर समन्वय से काम करना चाहिए।
सिन्हा ने एक विशेष घटना का उल्लेख करते हुए कहा कि यदि राज्य का एक वरिष्ठ मंत्री किसी अधिकारी से मिलने जाए और उसे 15 मिनट तक प्रतीक्षा करनी पड़े, तो यह स्पष्ट रूप से दर्शाता है कि प्रशासनिक हालात नियंत्रण से बाहर हो रहे हैं।
DGP प्रकरण और BJP अध्यक्ष की शिकायत
BJP प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू ने कथित तौर पर राज्य के डीजीपी से फोन पर संपर्क करने का प्रयास किया, लेकिन न फोन उठाया गया, न व्हाट्सएप संदेश का जवाब दिया गया और न ही बाद में कॉल बैक की गई। सिन्हा ने इसे राजनीतिक दलों के प्रति असम्मानजनक व्यवहार बताते हुए मुख्यमंत्री से नौकरशाही को संवैधानिक सीमाओं के भीतर काम करने के निर्देश देने की माँग की।
कांग्रेस प्रभारी की भूमिका पर BJP की आपत्ति
सिन्हा ने यह भी कहा कि इस विवाद के चलते कांग्रेस के झारखंड प्रभारी के. राजू को भी हस्तक्षेप करना पड़ा। हालाँकि, BJP का आरोप है कि राजू के बयान में समस्या के समाधान की कोई स्पष्ट दिशा नहीं थी और उन्होंने मुख्यमंत्री से बातचीत करने का संकल्प भी नहीं जताया — केवल कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं से वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर के साथ एकजुट रहने की अपील की।
मीडिया स्वतंत्रता पर आरोप
BJP प्रवक्ता ने राज्य सरकार पर प्रेस की स्वतंत्रता को प्रभावित करने का भी आरोप लगाया। उनके अनुसार, प्रोजेक्ट भवन में पत्रकारों के प्रवेश पर रोक जैसी स्थिति पारदर्शिता के लिए गंभीर खतरा है। सिन्हा ने कहा कि जो लोग स्वयं को संविधान के सबसे बड़े प्रहरी बताते हैं, वही अब पत्रकारों के कामकाज पर अंकुश लगाने की कोशिश कर रहे हैं — यह लोकतांत्रिक मूल्यों के विरुद्ध है।
आगे क्या होगा
BJP ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से तत्काल हस्तक्षेप की माँग की है। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सत्तारूढ़ गठबंधन इस आंतरिक तनाव को कैसे संभालता है और क्या मुख्यमंत्री कार्यालय इस पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया देता है।