झारखंड छात्र आंदोलन पर NDA का पलटवार: राहुल गांधी से पूछा — कांग्रेस समर्थित सरकार में लाठीचार्ज पर चुप क्यों?
सारांश
मुख्य बातें
नई दिल्ली, 11 अगस्त — झारखंड विधानसभा घेराव के दौरान प्रतियोगी परीक्षा सुधारों की माँग कर रहे छात्रों पर कथित लाठीचार्ज और आंसू गैस के इस्तेमाल को लेकर संसद के भीतर और बाहर सियासी तापमान तेज़ी से बढ़ा है। राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के सांसदों ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी और इंडी अलायंस को सीधे कठघरे में खड़ा करते हुए सवाल किया कि जब झारखंड में कांग्रेस के समर्थन से चल रही हेमंत सोरेन सरकार छात्रों पर बल प्रयोग कर रही है, तब विपक्ष की चुप्पी का क्या अर्थ है।
रविशंकर प्रसाद का सीधा सवाल
भारतीय जनता पार्टी (BJP) के वरिष्ठ सांसद रविशंकर प्रसाद ने राहुल गांधी से जवाब माँगते हुए कहा कि रांची में बच्चों पर लाठीचार्ज और आंसू गैस के इस्तेमाल पर कांग्रेस की खामोशी समझ से परे है। प्रसाद ने यह भी आरोप लगाया कि राज्य में परीक्षाओं के दौरान नौकरियाँ बेचे जाने और बिचौलियों के प्रभाव की शिकायतें लगातार सामने आती रही हैं। उन्होंने माँग की कि कथित परीक्षा घोटालों की केंद्रीय जाँच ब्यूरो (CBI) से जाँच होने पर ही सच्चाई उजागर हो सकती है।
प्रसाद ने संसद में विपक्ष के रवैये पर भी तीखी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि सरकार विपक्ष की हर बात सुनने और प्रत्येक बिंदु पर जवाब देने को तैयार है, लेकिन विपक्ष को भी सत्ता पक्ष की बात सुनने की ज़िम्मेदारी निभानी होगी।
शशांक मणि त्रिपाठी और मनोज तिवारी की प्रतिक्रिया
BJP सांसद शशांक मणि त्रिपाठी ने कहा, 'राहुल गांधी और विपक्ष एकदम बैकफुट पर आ गए हैं जब से झारखंड में आंदोलन शुरू हुआ है।' उन्होंने विपक्ष पर पूरे मानसून सत्र को बाधित करने का आरोप लगाते हुए कहा कि राजनीति सड़कों पर नहीं, संसद में होनी चाहिए। हालाँकि, त्रिपाठी ने यह भी स्वीकार किया कि 'झारखंड में जो हुआ वह गलत था' और शांतिपूर्ण विरोध कर रहे छात्रों के साथ सम्मानपूर्वक व्यवहार होना चाहिए था। उन्होंने राहुल गांधी को चुनौती दी कि अगर वे सच में छात्रों के साथ हुए अत्याचार का विरोध करते हैं, तो उन्हें हेमंत सोरेन सरकार से समर्थन वापस लेना चाहिए।
BJP सांसद मनोज तिवारी ने कहा कि छात्रों और बेटियों के साथ कथित तौर पर जिस तरह का व्यवहार किया गया, वह शर्मनाक है। उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल गांधी दिल्ली में बड़े-बड़े दावे करते हैं, लेकिन झारखंड में अपनी ही समर्थित सरकार से सवाल नहीं पूछते।
केंद्रीय मंत्री और अन्य सांसदों के आरोप
केंद्रीय मंत्री संजय सेठ ने हेमंत सोरेन सरकार पर 'दबाने की नीति' अपनाने का गंभीर आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक तरीके से अपनी माँग रखने वाले छात्रों के साथ इस तरह का व्यवहार किसी भी दृष्टि से उचित नहीं है।
BJP सांसद जगदंबिका पाल ने कहा कि जब राहुल गांधी संसद में केंद्रीय गृह मंत्री से जवाब माँग रहे थे, उसी समय रांची में छात्रों पर कथित लाठीचार्ज की खबरें आ रही थीं। पाल ने सवाल किया कि क्या राहुल गांधी झारखंड की हेमंत सोरेन सरकार को बचाने की कोशिश कर रहे हैं।
सांसद भागीरथ चौधरी ने विपक्ष पर संसद की कार्यवाही बाधित करने और बिना ठोस मुद्दे के हंगामा करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि जनप्रतिनिधियों की ज़िम्मेदारी है कि सदन को सुचारू रूप से चलाएँ ताकि जनता के मुद्दों पर सार्थक चर्चा हो सके।
राजनीतिक पृष्ठभूमि
यह विवाद ऐसे समय में उभरा है जब झारखंड में प्रतियोगी परीक्षाओं की पारदर्शिता और भर्ती प्रक्रिया को लेकर छात्र वर्ग लंबे समय से असंतुष्ट है। गौरतलब है कि झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (INC) के गठबंधन से बनी हेमंत सोरेन सरकार पर छात्र आंदोलन का सीधा राजनीतिक दबाव है। NDA इस मुद्दे को विपक्ष की 'दोहरी राजनीति' के प्रमाण के रूप में पेश कर रहा है।
आगे क्या होगा
संसद के मानसून सत्र में इस मुद्दे पर चर्चा की माँग और तेज़ होने की संभावना है। NDA सांसदों ने संकेत दिया है कि वे झारखंड में कथित परीक्षा अनियमितताओं और पुलिस कार्रवाई को संसद के भीतर और राज्य की राजनीति में आगे उठाते रहेंगे।