25 सितंबर 2026
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हिमाचल CM सुक्खू का बड़ा लक्ष्य: 2027 तक आत्मनिर्भर, 2032 तक देश का सबसे समृद्ध राज्य

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हिमाचल CM सुक्खू का बड़ा लक्ष्य: 2027 तक आत्मनिर्भर, 2032 तक देश का सबसे समृद्ध राज्य

सारांश

हिमाचल के मुख्यमंत्री सुक्खू का दोहरा दांव — 2027 तक आत्मनिर्भरता और 2032 तक देश का सबसे अमीर राज्य। ₹401 करोड़ वाइल्ड फ्लावर हॉल से, ₹150 करोड़ सालाना जिंदल से और किशाऊ परियोजना से ₹1,500 करोड़ — यह सरकारी संसाधन जुटाने की नई रणनीति का हिस्सा है।

मुख्य बातें

CM सुखविंदर सिंह सुक्खू ने 25 सितंबर 2026 को सोलन में हिमाचल को 2027 तक आत्मनिर्भर और 2032 तक देश का सबसे समृद्ध राज्य बनाने का लक्ष्य दोहराया।
भ्रष्टाचार पर लगाम और नए राजस्व स्रोतों से ₹4,000–5,000 करोड़ की बचत का अनुमान।
वाइल्ड फ्लावर हॉल से 23 वर्षों की अनुपस्थिति के बाद ₹401 करोड़ खजाने में जमा; JSW जिंदल से ₹150 करोड़ सालाना की वसूली।
किशाऊ परियोजना से भावी पीढ़ियों को करीब ₹1,500 करोड़ का लाभ मिलने की उम्मीद।
मंत्रिमंडल में एक मंत्री पद और डिप्टी स्पीकर पद खाली; 11 दिसंबर से पहले भरने का प्रयास।

हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने 25 सितंबर 2026 को सोलन में कहा कि राज्य सरकार का स्पष्ट लक्ष्य वर्ष 2027 तक हिमाचल प्रदेश को आत्मनिर्भर और 2032 तक देश का सबसे समृद्ध राज्य बनाना है। उन्होंने कहा कि राजस्व के नए स्रोत तलाशना, भ्रष्टाचार के कथित रास्ते बंद करना और प्रदेश की आर्थिक नींव को मजबूत करना — ये तीनों इस रणनीति के केंद्र में हैं।

आत्मनिर्भरता का संकल्प और अब तक की प्रगति

मुख्यमंत्री सुक्खू ने कहा कि कांग्रेस सरकार ने सत्ता में आते ही हिमाचल को आत्मनिर्भर बनाने का संकल्प लिया था और अब उस दिशा में किए गए प्रयासों के परिणाम दिखने लगे हैं। उन्होंने किशाऊ परियोजना का विशेष उल्लेख करते हुए कहा कि इस लड़ाई में सरकार की जीत से उनका आत्मविश्वास बढ़ा है। साथ ही उन्होंने कहा कि यदि केंद्र सरकार की ओर से मिलने वाली राजस्व घाटा अनुदान (आरडीजी) बंद न की गई होती, तो हिमाचल प्रदेश अब तक आत्मनिर्भर हो चुका होता।

वित्तीय संसाधनों की उम्मीद और बचत का अनुमान

सुक्खू ने बताया कि सरकार फिलहाल एरियर से मिलने वाली संभावित करीब ₹500 करोड़ की राशि और वाटर तथा शानन प्रोजेक्ट से जुड़े मामलों के परिणाम का इंतजार कर रही है। उनके अनुसार, भ्रष्टाचार के कथित रास्ते बंद करने और विभिन्न आय स्रोतों को बढ़ाने के प्रयासों से आने वाले वर्षों में करीब ₹4,000 से ₹5,000 करोड़ की बचत होने का अनुमान है।

मुख्य उदाहरण: वाइल्ड फ्लावर हॉल और जेएसडब्ल्यू जिंदल

वाइल्ड फ्लावर हॉल का उदाहरण देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि 23 वर्षों तक वहाँ से कोई राशि नहीं मिली, लेकिन अब सरकार ने करीब ₹401 करोड़ प्रदेश के खजाने में जमा करवाए हैं। इसी तरह उन्होंने जेएसडब्ल्यू जिंदल कंपनी से करीब ₹150 करोड़ सालाना लेने की बात कही, जिसे उनके अनुसार पिछले कई वर्षों से नहीं लिया गया था। किशाऊ परियोजना से आने वाली पीढ़ियों को करीब ₹1,500 करोड़ का लाभ मिलने की उम्मीद जताई गई।

नई परियोजनाएँ और युवाओं के लिए अवसर

सुक्खू ने बताया कि सरकार वेलनेस सेंटर, वाटर पार्क और जू जैसी परियोजनाओं पर भी काम कर रही है। उन्होंने कहा कि करीब 40 वर्षों से बिगड़ी व्यवस्थाओं को सुधारने में समय लगता है, लेकिन अब परिणाम दिखने शुरू हो गए हैं। जब राज्य के पास पर्याप्त संसाधन होंगे तो युवाओं के लिए नए अवसरों के द्वार खुलेंगे, किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में भी काम जारी है।

मंत्रिमंडल विस्तार पर संकेत

मंत्रिमंडल विस्तार और फेरबदल से जुड़े सवाल पर मुख्यमंत्री ने कहा कि इस विषय पर चर्चा चलती रहनी चाहिए। उन्होंने बताया कि मंत्रिमंडल में एक मंत्री पद और डिप्टी स्पीकर का पद खाली है। यदि इन्हें भरने का निर्णय होता है तो 11 दिसंबर से पहले इन पदों को भरने का प्रयास किया जाएगा। यह बयान ऐसे समय में आया है जब हिमाचल में सत्तारूढ़ कांग्रेस अपनी सरकार की आर्थिक उपलब्धियों को जन-जन तक पहुँचाने में जुटी है।

संपादकीय दृष्टिकोण

₹150 करोड़ जिंदल से — वास्तविक वसूली के उदाहरण हैं, लेकिन असली परीक्षा यह है कि क्या ये छिटपुट सफलताएँ एक व्यवस्थागत बदलाव में तब्दील हो सकती हैं। हिमाचल की वित्तीय संरचना केंद्रीय अनुदानों पर अत्यधिक निर्भर रही है और आरडीजी की कटौती से उत्पन्न खाई को राज्य के अपने स्रोतों से भरना एक कठिन चुनौती है। 2027 का आत्मनिर्भरता लक्ष्य महज़ डेढ़ वर्ष दूर है — इतने कम समय में ₹4,000–5,000 करोड़ की संरचनात्मक बचत सुनिश्चित करना बेहद महत्वाकांक्षी दिखता है। बिना स्पष्ट बेंचमार्क और स्वतंत्र सत्यापन के, ये घोषणाएँ चुनावी कथा-निर्माण का हिस्सा भी बन सकती हैं।
RashtraPress
25 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

CM सुक्खू का हिमाचल के लिए 2027 और 2032 का लक्ष्य क्या है?
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने 2027 तक हिमाचल प्रदेश को आत्मनिर्भर और 2032 तक देश का सबसे समृद्ध राज्य बनाने का लक्ष्य रखा है। इसके लिए राजस्व के नए स्रोत, भ्रष्टाचार पर लगाम और जल परियोजनाओं पर जोर दिया जा रहा है।
हिमाचल सरकार ₹4,000–5,000 करोड़ की बचत कैसे करेगी?
सरकार के अनुसार, भ्रष्टाचार के कथित रास्ते बंद करने और विभिन्न आय स्रोतों को सक्रिय करने से आने वाले वर्षों में ₹4,000 से ₹5,000 करोड़ की बचत होने का अनुमान है। इसमें JSW जिंदल से ₹150 करोड़ सालाना और एरियर से ₹500 करोड़ जैसी वसूलियाँ शामिल हैं।
किशाऊ परियोजना से हिमाचल को क्या फायदा होगा?
किशाऊ परियोजना से आने वाली पीढ़ियों को करीब ₹1,500 करोड़ का लाभ मिलने की उम्मीद है। मुख्यमंत्री ने इसे राज्य की आत्मनिर्भरता की दिशा में उठाए जा रहे महत्वपूर्ण कदमों में से एक बताया।
हिमाचल मंत्रिमंडल विस्तार कब होगा?
CM सुक्खू ने कहा कि मंत्रिमंडल में एक मंत्री पद और डिप्टी स्पीकर का पद खाली है। यदि इन्हें भरने का निर्णय होता है तो 11 दिसंबर से पहले इन्हें भरने का प्रयास किया जाएगा।
वाइल्ड फ्लावर हॉल से हिमाचल सरकार को कितना राजस्व मिला?
मुख्यमंत्री के अनुसार 23 वर्षों तक वाइल्ड फ्लावर हॉल से कोई राशि नहीं मिली थी, लेकिन वर्तमान सरकार ने वहाँ से करीब ₹401 करोड़ प्रदेश के खजाने में जमा करवाए हैं। इसे सरकार अपनी राजस्व वसूली की बड़ी उपलब्धि के रूप में प्रस्तुत कर रही है।
राष्ट्र प्रेस
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