झारखंड छात्र लाठीचार्ज पर संसद में घमासान: निकम, कंगना, चुघ ने राहुल गांधी से माँगा जवाब
सारांश
मुख्य बातें
झारखंड में विधानसभा घेराव के दौरान छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई को लेकर 11 अगस्त 2026 को संसद में तीखी सियासी बहस छिड़ गई। राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के कई सांसदों ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी को सीधे घेरते हुए माँग की कि वे झारखंड में छात्रों पर हुए लाठीचार्ज के मामले में सदन के भीतर जवाब दें। यह ऐसे समय में आया है जब संसद की कार्यवाही कथित तौर पर पिछले दो सप्ताह से बाधित बताई जा रही है।
निकम का आरोप: सदन बाधित, चर्चा नदारद
भारतीय जनता पार्टी (BJP) के सांसद उज्ज्वल निकम ने कहा कि पिछले दो सप्ताह से न लोकसभा और न ही राज्यसभा में ज़रूरी मुद्दों पर ठीक से चर्चा हो पाई है। उन्होंने कहा, 'बहस लोकतंत्र के लिए ज़रूरी है, लेकिन कांग्रेस पार्टी जिस तरह सदन की कार्यवाही को बाधित कर रही है, वह शर्मनाक है।' निकम ने आरोप लगाया कि विपक्ष झारखंड में छात्रों की पिटाई के मुद्दे पर चर्चा करने से बच रहा है और राहुल गांधी को इस पर जवाब देना चाहिए।
चुघ का 'दोहरे रवैये' पर हमला
BJP सांसद तरुण चुघ ने राहुल गांधी पर 'दोहरा रवैया' अपनाने का आरोप लगाया। चुघ के अनुसार, 'राहुल गांधी सदन से भी भाग रहे हैं और झारखंड में बच्चों पर हुए लाठीचार्ज के मुद्दे पर भी चुप हैं।' उन्होंने कहा कि देश इस दोहरी नीति को देख रहा है और राहुल गांधी को संसद में इस पर स्पष्टीकरण देना चाहिए।
कंगना रनौत और अरुण सिंह का विपक्ष पर प्रहार
BJP सांसद कंगना रनौत ने भी झारखंड की घटना पर कांग्रेस को कटघरे में खड़ा किया। उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल गांधी चर्चा से इनकार कर रहे हैं। रनौत ने दावा किया कि पहले विपक्ष की ओर से कुछ अन्य विरोध प्रदर्शनों पर चर्चा की माँग की गई, लेकिन जब चर्चा का अवसर मिला तो उसे स्वीकार नहीं किया गया। उन्होंने विपक्ष पर 'देश और संसद के साथ धोखा' करने का आरोप लगाया।
BJP सांसद अरुण सिंह ने राहुल गांधी और प्रियंका गांधी को घेरते हुए कहा कि झारखंड में कांग्रेस की सरकार है और वहाँ युवाओं की बेरहमी से पिटाई हुई है। उन्होंने सवाल उठाया कि दोनों नेता झारखंड क्यों नहीं जाते और मौके पर जाकर स्थिति क्यों नहीं देखते।
शिंदे बोले: सरकार तैयार, विपक्ष नहीं
शिवसेना सांसद श्रीकांत शिंदे ने कहा कि सरकार और केंद्रीय गृह मंत्री झारखंड के छात्र विरोध प्रदर्शन से जुड़े मुद्दे पर संसद में चर्चा के लिए पूरी तरह तैयार हैं। शिंदे के अनुसार, विपक्ष की मानसिकता सदन को चलने देने की नहीं है और वह जानबूझकर झारखंड के मुद्दे पर बहस से बच रहा है।
आगे क्या
गौरतलब है कि झारखंड में विधानसभा घेराव के दौरान छात्रों पर पुलिस की कार्रवाई का मामला अब केवल राज्य की राजनीति तक सीमित नहीं रहा — यह संसद के मानसून सत्र में केंद्रीय मुद्दा बन गया है। NDA और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप का यह दौर संसद की शेष कार्यवाही को प्रभावित कर सकता है।