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NSE शेयर लिस्टिंग के दूसरे दिन 1.20% फिसले, ₹1,796 पर कारोबार; मार्केट कैप ₹4.49 लाख करोड़

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NSE शेयर लिस्टिंग के दूसरे दिन 1.20% फिसले, ₹1,796 पर कारोबार; मार्केट कैप ₹4.49 लाख करोड़

सारांश

NSE का शेयर लिस्टिंग के पहले दिन 5% उछला, लेकिन दूसरे दिन मुनाफावसूली ने उसे ₹1,796 तक खींच लाया। ₹4.49 लाख करोड़ के मार्केट कैप के साथ NSE अब भारत की 10वीं सबसे मूल्यवान कंपनी है — सन फार्मा और टाइटन से आगे।

मुख्य बातें

NSE के शेयर 25 सितंबर 2026 को लिस्टिंग के दूसरे दिन 1.20 प्रतिशत गिरकर ₹1,796 पर कारोबार कर रहे थे।
कारोबार के दौरान शेयर 1.6 प्रतिशत फिसलकर ₹1,790 के इंट्राडे निचले स्तर पर पहुँचा।
NSE का आईपीओ भारत का दूसरा सबसे बड़ा सार्वजनिक निर्गम रहा; इश्यू 5.71 गुना सब्सक्राइब हुआ, कुल बोलियाँ ₹90,287.33 करोड़ ।
लिस्टिंग के बाद मार्केट कैप ₹4.49 लाख करोड़ ; NSE भारत की 10वीं सबसे मूल्यवान सूचीबद्ध कंपनी बनी।
वित्त वर्ष 2025-26 में NSE की परिचालन आय का 78.65 प्रतिशत ट्रांजैक्शन चार्जेज से आया।
MD & CEO आशीष कुमार चौहान ने मोबाइल-फर्स्ट प्लेटफॉर्म के विस्तार की जानकारी दी।

नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) के शेयरों में शुक्रवार, 25 सितंबर 2026 को लिस्टिंग के अगले ही दिन मुनाफावसूली का दबाव देखने को मिला। शेयर कारोबार के दौरान करीब 1.6 प्रतिशत गिरकर ₹1,790 के इंट्राडे निचले स्तर तक पहुँचा, और खबर लिखे जाने तक ₹1,796 के आसपास कारोबार कर रहा था — जो पिछले बंद स्तर से 1.20 प्रतिशत कम था। हालाँकि शेयर अपने लिस्टिंग मूल्य से मामूली ऊपर बना रहा।

लिस्टिंग का प्रदर्शन: पहले दिन उछाल, दूसरे दिन दबाव

गुरुवार, 24 सितंबर को NSE के शेयर अपने इश्यू प्राइस की तुलना में लगभग 0.8 प्रतिशत प्रीमियम पर सूचीबद्ध हुए थे। लिस्टिंग के दिन शेयर ने दिन के कारोबार में 5 प्रतिशत से अधिक की उछाल दर्ज की, लेकिन अंत में 1.8 प्रतिशत की बढ़त के साथ बंद हुआ। दूसरे दिन यह उत्साह थम गया और निवेशकों ने मुनाफावसूली का रास्ता चुना — जो बाज़ार विशेषज्ञों के अनुसार किसी भी बड़े आईपीओ के तुरंत बाद एक सामान्य प्रक्रिया है।

भारत का दूसरा सबसे बड़ा आईपीओ

NSE का आईपीओ भारत के बाज़ार इतिहास का दूसरा सबसे बड़ा सार्वजनिक निर्गम रहा, जिसका इश्यू आकार ₹22,568.94 करोड़ था। इससे पहले वर्ष 2024 में हुंडई मोटर इंडिया का ₹27,870 करोड़ का आईपीओ सबसे बड़ा इश्यू रहा था। 17 से 21 सितंबर तक खुले इस बहुप्रतीक्षित इश्यू को निवेशकों की ओर से जबरदस्त प्रतिक्रिया मिली थी — यह 5.71 गुना सब्सक्राइब हुआ और कुल ₹90,287.33 करोड़ की बोलियाँ प्राप्त हुईं।

मार्केट कैप और भारत की शीर्ष कंपनियों में स्थान

लिस्टिंग के बाद NSE का बाज़ार पूंजीकरण (मार्केट कैप) लगभग ₹4.49 लाख करोड़ पर पहुँच गया है। इसके साथ ही कंपनी भारत की 10वीं सबसे मूल्यवान सूचीबद्ध कंपनी बन गई है और बाज़ार मूल्य के लिहाज़ से सन फार्मास्युटिकल्स और टाइटन जैसी स्थापित कंपनियों से आगे निकल गई है।

मार्केट कैप के आधार पर NSE फिलहाल रिलायंस इंडस्ट्रीज, HDFC बैंक, भारती एयरटेल, ICICI बैंक, SBI, TCS, बजाज फाइनेंस, L&T और हिंदुस्तान यूनिलीवर के बाद अपना स्थान रखती है। यह ऐसे समय में आया है जब भारत का पूंजी बाज़ार तीव्र विस्तार के दौर में है।

NSE की आय और व्यापार मॉडल

NSE की कमाई का बड़ा आधार ट्रांजैक्शन शुल्क है। वित्त वर्ष 2025-26 में कंपनी की परिचालन आय का 78.65 प्रतिशत हिस्सा ट्रांजैक्शन चार्जेज से प्राप्त हुआ — जो एक्सचेंज के व्यापार मॉडल की मज़बूती को रेखांकित करता है। गौरतलब है कि ट्रेडिंग वॉल्यूम में किसी भी बड़े उतार-चढ़ाव का सीधा असर NSE की आमदनी पर पड़ सकता है।

प्रबंधन का दृष्टिकोण और दीर्घकालिक संभावनाएँ

NSE के प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी आशीष कुमार चौहान ने कहा कि एक्सचेंज एक व्यापक मोबाइल-फर्स्ट प्लेटफॉर्म पर काम कर रहा है, जिसका उद्देश्य निवेशकों को उनके ट्रेडिंग डेटा, पोर्टफोलियो जानकारी और विश्लेषणात्मक सुविधाएँ एक ही मंच पर उपलब्ध कराना है। बाज़ार विशेषज्ञों के अनुसार, लिस्टिंग के बाद अल्पकालिक मुनाफावसूली सामान्य है, लेकिन भारत के पूंजी बाज़ार के तेज़ विस्तार और NSE की मज़बूत बाज़ार स्थिति के कारण दीर्घकालिक निवेशकों की रुचि बनी रह सकती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि बड़े आईपीओ की एक जानी-पहचानी स्क्रिप्ट है — पहले दिन उत्साह, दूसरे दिन मुनाफावसूली। असली सवाल यह है कि जिस एक्सचेंज की आय का लगभग 79 प्रतिशत हिस्सा ट्रांजैक्शन शुल्क से आता है, वह शेयरधारकों को दीर्घकालिक मूल्य कैसे देगा — खासकर तब जब SEBI के नियामकीय फैसले सीधे ट्रेडिंग वॉल्यूम को प्रभावित कर सकते हैं। ₹4.49 लाख करोड़ का मार्केट कैप प्रभावशाली है, लेकिन निवेशकों को यह भी देखना होगा कि मोबाइल-फर्स्ट विस्तार जैसी महत्वाकांक्षाएँ आय-विविधीकरण में कब और कितनी तब्दील होती हैं।
RashtraPress
25 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

NSE का शेयर लिस्टिंग के दूसरे दिन क्यों गिरा?
बाज़ार विशेषज्ञों के अनुसार, लिस्टिंग के तुरंत बाद अल्पकालिक मुनाफावसूली एक सामान्य प्रक्रिया है। NSE का शेयर पहले दिन 5 प्रतिशत से अधिक उछला था, जिसके बाद दूसरे दिन निवेशकों ने मुनाफा बुक कर लिया और शेयर 1.20 प्रतिशत गिरकर ₹1,796 पर आ गया।
NSE का आईपीओ कितने गुना सब्सक्राइब हुआ था?
NSE का आईपीओ 5.71 गुना सब्सक्राइब हुआ था। ₹22,568.94 करोड़ के इश्यू आकार के मुकाबले कुल ₹90,287.33 करोड़ की बोलियाँ प्राप्त हुईं। यह इश्यू 17 से 21 सितंबर 2026 तक खुला था।
लिस्टिंग के बाद NSE का मार्केट कैप कितना है और वह किन कंपनियों से आगे है?
लिस्टिंग के बाद NSE का बाज़ार पूंजीकरण लगभग ₹4.49 लाख करोड़ हो गया है, जिससे वह भारत की 10वीं सबसे मूल्यवान सूचीबद्ध कंपनी बन गई है। बाज़ार मूल्य के लिहाज़ से NSE सन फार्मास्युटिकल्स और टाइटन से आगे निकल गई है।
NSE की आय का मुख्य स्रोत क्या है?
NSE की आय का प्रमुख स्रोत ट्रांजैक्शन शुल्क है। वित्त वर्ष 2025-26 में कंपनी की परिचालन आय का 78.65 प्रतिशत हिस्सा ट्रांजैक्शन चार्जेज से प्राप्त हुआ, जो एक्सचेंज के व्यापार मॉडल की मज़बूती को दर्शाता है।
NSE का आईपीओ भारत के इतिहास में किस स्थान पर है?
NSE का आईपीओ भारत के इतिहास का दूसरा सबसे बड़ा सार्वजनिक निर्गम है। इससे पहले वर्ष 2024 में हुंडई मोटर इंडिया का ₹27,870 करोड़ का आईपीओ सबसे बड़ा इश्यू रहा था।
राष्ट्र प्रेस
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