NSE शेयर लिस्टिंग के दूसरे दिन 1.20% फिसले, ₹1,796 पर कारोबार; मार्केट कैप ₹4.49 लाख करोड़
सारांश
मुख्य बातें
नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) के शेयरों में शुक्रवार, 25 सितंबर 2026 को लिस्टिंग के अगले ही दिन मुनाफावसूली का दबाव देखने को मिला। शेयर कारोबार के दौरान करीब 1.6 प्रतिशत गिरकर ₹1,790 के इंट्राडे निचले स्तर तक पहुँचा, और खबर लिखे जाने तक ₹1,796 के आसपास कारोबार कर रहा था — जो पिछले बंद स्तर से 1.20 प्रतिशत कम था। हालाँकि शेयर अपने लिस्टिंग मूल्य से मामूली ऊपर बना रहा।
लिस्टिंग का प्रदर्शन: पहले दिन उछाल, दूसरे दिन दबाव
गुरुवार, 24 सितंबर को NSE के शेयर अपने इश्यू प्राइस की तुलना में लगभग 0.8 प्रतिशत प्रीमियम पर सूचीबद्ध हुए थे। लिस्टिंग के दिन शेयर ने दिन के कारोबार में 5 प्रतिशत से अधिक की उछाल दर्ज की, लेकिन अंत में 1.8 प्रतिशत की बढ़त के साथ बंद हुआ। दूसरे दिन यह उत्साह थम गया और निवेशकों ने मुनाफावसूली का रास्ता चुना — जो बाज़ार विशेषज्ञों के अनुसार किसी भी बड़े आईपीओ के तुरंत बाद एक सामान्य प्रक्रिया है।
भारत का दूसरा सबसे बड़ा आईपीओ
NSE का आईपीओ भारत के बाज़ार इतिहास का दूसरा सबसे बड़ा सार्वजनिक निर्गम रहा, जिसका इश्यू आकार ₹22,568.94 करोड़ था। इससे पहले वर्ष 2024 में हुंडई मोटर इंडिया का ₹27,870 करोड़ का आईपीओ सबसे बड़ा इश्यू रहा था। 17 से 21 सितंबर तक खुले इस बहुप्रतीक्षित इश्यू को निवेशकों की ओर से जबरदस्त प्रतिक्रिया मिली थी — यह 5.71 गुना सब्सक्राइब हुआ और कुल ₹90,287.33 करोड़ की बोलियाँ प्राप्त हुईं।
मार्केट कैप और भारत की शीर्ष कंपनियों में स्थान
लिस्टिंग के बाद NSE का बाज़ार पूंजीकरण (मार्केट कैप) लगभग ₹4.49 लाख करोड़ पर पहुँच गया है। इसके साथ ही कंपनी भारत की 10वीं सबसे मूल्यवान सूचीबद्ध कंपनी बन गई है और बाज़ार मूल्य के लिहाज़ से सन फार्मास्युटिकल्स और टाइटन जैसी स्थापित कंपनियों से आगे निकल गई है।
मार्केट कैप के आधार पर NSE फिलहाल रिलायंस इंडस्ट्रीज, HDFC बैंक, भारती एयरटेल, ICICI बैंक, SBI, TCS, बजाज फाइनेंस, L&T और हिंदुस्तान यूनिलीवर के बाद अपना स्थान रखती है। यह ऐसे समय में आया है जब भारत का पूंजी बाज़ार तीव्र विस्तार के दौर में है।
NSE की आय और व्यापार मॉडल
NSE की कमाई का बड़ा आधार ट्रांजैक्शन शुल्क है। वित्त वर्ष 2025-26 में कंपनी की परिचालन आय का 78.65 प्रतिशत हिस्सा ट्रांजैक्शन चार्जेज से प्राप्त हुआ — जो एक्सचेंज के व्यापार मॉडल की मज़बूती को रेखांकित करता है। गौरतलब है कि ट्रेडिंग वॉल्यूम में किसी भी बड़े उतार-चढ़ाव का सीधा असर NSE की आमदनी पर पड़ सकता है।
प्रबंधन का दृष्टिकोण और दीर्घकालिक संभावनाएँ
NSE के प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी आशीष कुमार चौहान ने कहा कि एक्सचेंज एक व्यापक मोबाइल-फर्स्ट प्लेटफॉर्म पर काम कर रहा है, जिसका उद्देश्य निवेशकों को उनके ट्रेडिंग डेटा, पोर्टफोलियो जानकारी और विश्लेषणात्मक सुविधाएँ एक ही मंच पर उपलब्ध कराना है। बाज़ार विशेषज्ञों के अनुसार, लिस्टिंग के बाद अल्पकालिक मुनाफावसूली सामान्य है, लेकिन भारत के पूंजी बाज़ार के तेज़ विस्तार और NSE की मज़बूत बाज़ार स्थिति के कारण दीर्घकालिक निवेशकों की रुचि बनी रह सकती है।