NSE IPO का GMP 61% टूटा: ₹218 से घटकर ₹84, 24 सितंबर को होगी लिस्टिंग
सारांश
मुख्य बातें
नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) के ₹22,569 करोड़ के बहुप्रतीक्षित आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (IPO) का ग्रे मार्केट प्रीमियम (GMP) लिस्टिंग से ठीक पहले तीखी गिरावट का शिकार हो गया है। ग्रे मार्केट को ट्रैक करने वाले ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स के आंकड़ों के अनुसार, शनिवार को ₹218 प्रति शेयर के उच्चतम स्तर पर पहुँचा GMP शुक्रवार दोपहर तक घटकर ₹84 रह गया — यानी चोटी से करीब 61.46 प्रतिशत की गिरावट।
सब्सक्रिप्शन की स्थिति
GMP में उत्साह भले ही ठंडा पड़ा हो, लेकिन निवेशकों ने बोली प्रक्रिया में अच्छी भागीदारी दिखाई। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) के आंकड़ों के मुताबिक, बोली के दूसरे दिन शुक्रवार को यह इश्यू पूरी तरह सब्सक्राइब हो गया। उपलब्ध 8.86 करोड़ शेयरों के मुकाबले 10.28 करोड़ शेयरों के लिए बोलियाँ प्राप्त हुईं। यह IPO 21 सितंबर 2026 को बंद होगा और शेयरों के 24 सितंबर 2026 को बाज़ार में सूचीबद्ध होने की उम्मीद है।
IPO की संरचना और प्राइस बैंड
यह IPO पूरी तरह ऑफर फॉर सेल (OFS) आधारित है, जिसके अंतर्गत मौजूदा शेयरधारक 12.64 करोड़ इक्विटी शेयर बेच रहे हैं। इसका सीधा अर्थ है कि शेयर बिक्री से प्राप्त राशि सीधे NSE के खाते में नहीं जाएगी। कंपनी ने प्राइस बैंड ₹1,700 से ₹1,785 प्रति शेयर तय किया है। ऊपरी प्राइस बैंड पर NSE का बाज़ार पूंजीकरण (मार्केट कैप) लगभग ₹4.42 लाख करोड़ आँका गया है।
वित्तीय प्रदर्शन पर सवाल
NSE के वित्तीय आंकड़े मिले-जुले संकेत देते हैं। वित्त वर्ष 2025-26 में संचालन से राजस्व ₹16,601.31 करोड़ रहा, जो पिछले वित्त वर्ष के ₹17,140.67 करोड़ की तुलना में 3 प्रतिशत से अधिक कम है। इसी अवधि में एक्सचेंज की आय का प्रमुख स्रोत — ट्रांजेक्शन शुल्क — भी वित्त वर्ष 2024-25 के ₹13,635.76 करोड़ से घटकर ₹13,057.01 करोड़ हो गया, जो लगभग 4 प्रतिशत की सालाना गिरावट है। बाज़ार विश्लेषकों का मानना है कि यह राजस्व संकुचन GMP में ठंडक की एक प्रमुख वजह हो सकता है।
GMP की सीमाएँ
बाज़ार विशेषज्ञों के अनुसार, ग्रे मार्केट प्रीमियम केवल एक अनौपचारिक संकेतक होता है, जो यह बताता है कि निवेशक लिस्टिंग से पहले इश्यू मूल्य के ऊपर कितनी अतिरिक्त कीमत चुकाने को तैयार हैं। GMP किसी भी तरह से यह सुनिश्चित नहीं करता कि शेयर प्रीमियम पर ही सूचीबद्ध होगा। यह ऐसे समय में आया है जब भारतीय IPO बाज़ार में एक के बाद एक हाई-प्रोफाइल इश्यू आ रहे हैं और निवेशकों में लिस्टिंग-गेन की अपेक्षाएँ अक्सर वास्तविकता से अलग साबित हुई हैं।
आगे क्या
अब सभी की नज़रें 21 सितंबर को बंद होने वाले इस IPO के अंतिम सब्सक्रिप्शन आंकड़ों और 24 सितंबर 2026 की प्रस्तावित लिस्टिंग पर टिकी हैं। निवेशकों की वास्तविक प्रतिक्रिया और बाज़ार की उस दिन की दशा ही NSE के शेयर के शुरुआती प्रदर्शन का निर्धारण करेगी।