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NSE IPO से SBI और LIC को मिल सकता है बड़ा मुनाफा, सरकारी संस्थानों की हिस्सेदारी का मूल्य हज़ारों करोड़ में

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NSE IPO से SBI और LIC को मिल सकता है बड़ा मुनाफा, सरकारी संस्थानों की हिस्सेदारी का मूल्य हज़ारों करोड़ में

सारांश

NSE का IPO दशकों पुराने सरकारी निवेश को सोने में बदल सकता है — SBI ने ₹0.80 प्रति शेयर पर खरीदी हिस्सेदारी अब ₹5,000 करोड़ की हो सकती है। DRHP दाखिल होने के साथ भारतीय पूंजी बाज़ार के सबसे बड़े IPO में से एक की उल्टी गिनती शुरू हो गई है।

मुख्य बातें

NSE ने 18 जून 2025 को SEBI और BSE के पास DRHP दाखिल किया।
SBI OFS के तहत 2.475 करोड़ शेयर बेचेगा; अनुमानित मूल्य पर हिस्सेदारी करीब ₹5,000 करोड़ की।
LIC के पास NSE की 10.72% हिस्सेदारी है, लेकिन वह OFS में शेयर नहीं बेच रही।
बैंक ऑफ बड़ौदा (~₹2,197 करोड़), GIC रि (~₹2,131 करोड़), न्यू इंडिया एश्योरेंस (~₹2,100 करोड़) और स्टॉक होल्डिंग कॉरपोरेशन (~₹2,178 करोड़) भी बड़ी हिस्सेदारी बेचने की स्थिति में।
अधिकांश संस्थानों की औसत लागत ₹1 से भी कम प्रति शेयर; अनुमानित IPO मूल्य ₹2,000 प्रति शेयर ।
सभी हिस्सेदारियों का अंतिम मूल्य IPO लॉन्च के समय तय होगा।

नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) के बहुप्रतीक्षित आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (IPO) से भारतीय स्टेट बैंक (SBI), जीवन बीमा निगम (LIC) और अन्य सरकारी वित्तीय संस्थानों को भारी लाभ मिलने की संभावना है। NSE ने बुधवार, 18 जून 2025 को भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) तथा बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) के पास ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (DRHP) दाखिल किया, जिससे यह IPO आधिकारिक रूप से प्रक्रिया में आ गया है।

SBI की हिस्सेदारी और अनुमानित लाभ

SBI ने NSE में अपने शेयर औसतन मात्र ₹0.80 प्रति शेयर की लागत पर खरीदे थे। DRHP के अनुसार, SBI ऑफर फॉर सेल (OFS) के तहत 2.475 करोड़ शेयर बेचने की योजना बना रहा है। यदि IPO का मूल्य अनुमानित ₹2,000 प्रति शेयर के आसपास तय होता है, तो SBI की यह हिस्सेदारी करीब ₹5,000 करोड़ की हो सकती है — जो उसकी मूल लागत से हज़ारों गुना अधिक है।

LIC और अन्य बीमा कंपनियों की स्थिति

LIC, जो NSE की सबसे बड़ी शेयरधारक है और जिसके पास 10.72 प्रतिशत हिस्सेदारी है, OFS में शेयर बेचने वालों की सूची में शामिल नहीं है। फिर भी, IPO के बाद उसकी हिस्सेदारी के मूल्य का बाज़ार-आधारित खुलासा निवेशकों का ध्यान आकर्षित कर सकता है।

न्यू इंडिया एश्योरेंस कंपनी और नेशनल इंश्योरेंस कंपनी ने NSE के शेयर औसतन ₹0.32 प्रति शेयर की लागत पर खरीदे थे। अनुमानित IPO मूल्य के अनुसार, न्यू इंडिया एश्योरेंस की पेश की जाने वाली हिस्सेदारी का मूल्य करीब ₹2,100 करोड़ और नेशनल इंश्योरेंस की हिस्सेदारी लगभग ₹1,200 करोड़ हो सकती है।

यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस कंपनी, जिसने अपने शेयर औसतन ₹0.50 प्रति शेयर की कीमत पर खरीदे थे, वह भी लगभग ₹1,200 करोड़ मूल्य के शेयर बेच सकती है।

बैंक ऑफ बड़ौदा, स्टॉक होल्डिंग और GIC रि का हिस्सा

बैंक ऑफ बड़ौदा ने NSE के शेयर औसतन ₹0.54 प्रति शेयर की लागत पर खरीदे थे और अनुमानित मूल्य पर करीब ₹2,197 करोड़ मूल्य के शेयर बेच सकता है। स्टॉक होल्डिंग कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड ने अपने शेयर औसतन ₹0.46 प्रति शेयर पर खरीदे थे और लगभग ₹2,178 करोड़ की हिस्सेदारी बेच सकता है।

जनरल इंश्योरेंस कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (GIC रि) ने NSE के शेयर औसतन ₹5.26 प्रति शेयर की लागत पर खरीदे थे — जो अन्य संस्थानों की तुलना में अधिक है — फिर भी कंपनी इस IPO के ज़रिए ₹2,131 करोड़ से अधिक मूल्य की हिस्सेदारी बेच सकती है।

NSE IPO की प्रक्रिया और आगे की राह

गौरतलब है कि NSE का IPO वर्षों से लंबित था और नियामकीय अड़चनों के चलते इसमें देरी होती रही। DRHP दाखिल होने के बाद अब SEBI की समीक्षा प्रक्रिया शुरू होगी। प्रस्तावित लिस्टिंग के बाद NSE के शेयरों का कारोबार BSE पर होगा। उल्लेखनीय है कि सभी हिस्सेदारियों का अंतिम मूल्य IPO लॉन्च के समय ही तय होगा, और अभी जो आँकड़े सामने आए हैं वे अनुमानित हैं।

यह IPO न केवल सरकारी संस्थानों के लिए दशकों पुराने निवेश पर असाधारण रिटर्न का अवसर है, बल्कि भारतीय पूंजी बाज़ार के लिए भी एक ऐतिहासिक घटना होगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि इतने वर्षों की देरी में निवेशकों और बाज़ार को क्या कीमत चुकानी पड़ी। LIC का OFS से बाहर रहना रणनीतिक हो सकता है, पर इससे उसकी हिस्सेदारी के मूल्य पर बाज़ार की नज़र और पैनी होगी। यह IPO भारतीय पूंजी बाज़ार के लिए एक बड़ी परीक्षा भी है — NSE की लिस्टिंग से पारदर्शिता और प्रशासन पर दबाव बढ़ेगा, जो अतीत में विवादों का विषय रहा है।
RashtraPress
3 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

NSE के IPO से SBI को कितना फायदा होगा?
DRHP के अनुसार, SBI OFS के तहत 2.475 करोड़ शेयर बेचने की योजना में है। यदि IPO मूल्य अनुमानित ₹2,000 प्रति शेयर रहा, तो SBI की हिस्सेदारी करीब ₹5,000 करोड़ की हो सकती है, जबकि उसने ये शेयर औसतन मात्र ₹0.80 प्रति शेयर पर खरीदे थे।
LIC NSE IPO में शेयर क्यों नहीं बेच रही?
LIC NSE की सबसे बड़ी शेयरधारक है और उसके पास 10.72% हिस्सेदारी है, लेकिन वह OFS में शेयर बेचने वालों की सूची में शामिल नहीं है। IPO के बाद उसकी हिस्सेदारी का बाज़ार-आधारित मूल्यांकन सामने आएगा, जो निवेशकों के लिए महत्वपूर्ण होगा।
NSE का DRHP कब और कहाँ दाखिल किया गया?
NSE ने 18 जून 2025 को SEBI और BSE के पास DRHP दाखिल किया। प्रस्तावित लिस्टिंग के बाद NSE के शेयरों का कारोबार BSE पर होगा।
NSE IPO में कौन-कौन से सरकारी संस्थान शेयर बेच रहे हैं?
SBI, बैंक ऑफ बड़ौदा, स्टॉक होल्डिंग कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया, न्यू इंडिया एश्योरेंस, नेशनल इंश्योरेंस, यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस और GIC रि सहित कई सरकारी संस्थान OFS के ज़रिए हिस्सेदारी बेचने की स्थिति में हैं। इन सभी ने दशकों पहले बेहद कम कीमत पर NSE के शेयर खरीदे थे।
NSE IPO के शेयरों का अंतिम मूल्य कब तय होगा?
अभी जो आँकड़े सामने आए हैं वे अनुमानित हैं और ₹2,000 प्रति शेयर के संभावित मूल्य पर आधारित हैं। सभी हिस्सेदारियों का अंतिम मूल्य IPO लॉन्च होने के करीब तय किया जाएगा।
राष्ट्र प्रेस
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