23 जुलाई 2026
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NSE की इक्विटी ऑप्शंस बाज़ार हिस्सेदारी तीन वर्षों में 22% से अधिक घटी, वित्त वर्ष 2026 में 74.71% पर आई

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NSE की इक्विटी ऑप्शंस बाज़ार हिस्सेदारी तीन वर्षों में 22% से अधिक घटी, वित्त वर्ष 2026 में 74.71% पर आई

सारांश

देश के सबसे बड़े एक्सचेंज NSE की इक्विटी ऑप्शंस में पकड़ ढीली पड़ रही है — तीन वर्षों में बाज़ार हिस्सेदारी 96.9% से 74.71% पर आ गई। IPO की दहलीज़ पर खड़े एक्सचेंज के लिए परिचालन आय में 3% की गिरावट और ट्रांज़ैक्शन चार्जेज में 4% की कमी चिंता का विषय है।

मुख्य बातें

NSE की इक्विटी ऑप्शंस (प्रीमियम वैल्यू) बाज़ार हिस्सेदारी वित्त वर्ष 2023-24 के 96.9% से घटकर वित्त वर्ष 2025-26 में 74.71% पर आ गई — तीन वर्षों में 22.2 प्रतिशत अंक की गिरावट।
इक्विटी कैश सेगमेंट में NSE की हिस्सेदारी 92-93% के दायरे में स्थिर; इक्विटी फ्यूचर्स में 99.79% पर मज़बूत।
कुल परिचालन आय वित्त वर्ष 2026 में ₹16,601.30 करोड़ — वित्त वर्ष 2025 के ₹17,140.67 करोड़ से 3% से अधिक कम।
ट्रांज़ैक्शन चार्जेज ₹13,635.76 करोड़ से घटकर ₹13,057.01 करोड़ — सालाना 4% की गिरावट।
क्लियरिंग एवं सेटलमेंट सेवाओं से आय 21.8% गिरकर ₹251.45 करोड़ रही।
NSE ने गिरावट पर पूछे गए सवालों का खबर प्रकाशन तक कोई जवाब नहीं दिया।

नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) की इक्विटी ऑप्शंस (प्रीमियम वैल्यू) सेगमेंट में बाज़ार हिस्सेदारी पिछले तीन वित्त वर्षों में 22.2 प्रतिशत से अधिक घट चुकी है — वित्त वर्ष 2023-24 के 96.9% से फिसलकर वित्त वर्ष 2025-26 में 74.71% पर आ गई है। एक्सचेंज के अपने वार्षिक प्रतिवेदनों और रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (RHP) में दर्ज आँकड़े यह प्रवृत्ति स्पष्ट रूप से दर्शाते हैं।

बाज़ार हिस्सेदारी में गिरावट का क्रम

NSE के RHP और वार्षिक रिपोर्टों के अनुसार, इक्विटी ऑप्शंस सेगमेंट में एक्सचेंज की हिस्सेदारी वित्त वर्ष 2023-24 में 96.9% थी, जो वित्त वर्ष 2024-25 में घटकर 87.4% और वित्त वर्ष 2025-26 में 74.71% रह गई। यह गिरावट तीन वर्षों में 22.19 प्रतिशत अंक की है — जो देश के सबसे बड़े एक्सचेंज के लिए एक उल्लेखनीय संकुचन है।

यह ऐसे समय में आया है जब NSE अपना आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (IPO) लाने की तैयारी में है और बाज़ार की निगाहें उसके वित्तीय प्रदर्शन पर टिकी हैं।

अन्य सेगमेंट में NSE की पकड़ मज़बूत

हालाँकि, इक्विटी ऑप्शंस के विपरीत, अन्य प्रमुख सेगमेंट में NSE का वर्चस्व बरकरार है। इक्विटी कैश सेगमेंट में एक्सचेंज की हिस्सेदारी वित्त वर्ष 2023-24 में 92.7%, वित्त वर्ष 2024-25 में 93.6% और वित्त वर्ष 2025-26 में 92.99% रही — यानी लगभग स्थिर।

इक्विटी फ्यूचर्स में NSE की पकड़ और भी मज़बूत है: वित्त वर्ष 2023-24 में 99.9%, वित्त वर्ष 2024-25 में 99.9% और वित्त वर्ष 2025-26 में 99.79%। गौरतलब है कि इक्विटी ऑप्शंस ही वह सेगमेंट है जहाँ प्रतिस्पर्धा सबसे तेज़ी से बढ़ी है।

परिचालन आय में भी दबाव

RHP के आँकड़ों के अनुसार, NSE की कुल परिचालन आय वित्त वर्ष 2025 के ₹17,140.67 करोड़ से घटकर वित्त वर्ष 2026 में ₹16,601.30 करोड़ रह गई — सालाना आधार पर 3% से अधिक की गिरावट।

आय का मुख्य स्रोत ट्रांज़ैक्शन चार्जेज भी इस दबाव से अछूता नहीं रहा। यह मद ₹13,635.76 करोड़ से घटकर ₹13,057.01 करोड़ पर आ गई — सालाना आधार पर लगभग 4% की गिरावट।

इसी अवधि में क्लियरिंग एवं सेटलमेंट सेवाओं से आय 21.8% गिरकर ₹251.45 करोड़ रह गई, जो वित्त वर्ष 2025 में ₹321.34 करोड़ थी।

NSE का पक्ष

बाज़ार हिस्सेदारी और परिचालन प्रदर्शन में आ रही गिरावट पर NSE से सवाल पूछे गए थे, परंतु खबर प्रकाशित होने तक एक्सचेंज की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं मिली।

आगे क्या

NSE के प्रस्तावित IPO से पहले इक्विटी ऑप्शंस सेगमेंट में घटती हिस्सेदारी और राजस्व पर दबाव निवेशकों के लिए एक अहम संकेत है। विश्लेषकों की नज़र इस बात पर होगी कि क्या एक्सचेंज इस प्रतिस्पर्धी दबाव को रोकने के लिए कोई रणनीतिक कदम उठाता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

IPO के दस्तावेज़ों में दर्ज ये आँकड़े ही बाज़ार की राय बनाएंगे।
RashtraPress
23 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

NSE की इक्विटी ऑप्शंस बाज़ार हिस्सेदारी कितनी घटी है?
NSE के अपने वार्षिक प्रतिवेदनों और RHP के अनुसार, इक्विटी ऑप्शंस (प्रीमियम वैल्यू) सेगमेंट में बाज़ार हिस्सेदारी वित्त वर्ष 2023-24 के 96.9% से घटकर वित्त वर्ष 2025-26 में 74.71% पर आ गई है — तीन वर्षों में 22.2 प्रतिशत अंक की गिरावट।
क्या अन्य सेगमेंट में भी NSE की हिस्सेदारी घटी है?
नहीं। इक्विटी कैश सेगमेंट में NSE की हिस्सेदारी 92-93% के दायरे में स्थिर रही है और इक्विटी फ्यूचर्स में वित्त वर्ष 2025-26 में 99.79% पर बनी हुई है। गिरावट केवल इक्विटी ऑप्शंस सेगमेंट में देखी गई है।
वित्त वर्ष 2026 में NSE की परिचालन आय कितनी रही?
RHP के आँकड़ों के अनुसार, NSE की कुल परिचालन आय वित्त वर्ष 2026 में ₹16,601.30 करोड़ रही, जो वित्त वर्ष 2025 के ₹17,140.67 करोड़ से सालाना आधार पर 3% से अधिक कम है।
NSE के IPO पर इस गिरावट का क्या असर पड़ सकता है?
NSE अपना IPO लाने की तैयारी में है और इक्विटी ऑप्शंस में घटती हिस्सेदारी तथा राजस्व में दबाव संभावित निवेशकों के लिए एक महत्वपूर्ण जोखिम कारक के रूप में उभर सकता है। RHP में दर्ज ये आँकड़े सार्वजनिक रूप से उपलब्ध हैं और बाज़ार मूल्यांकन को प्रभावित कर सकते हैं।
NSE ने इस गिरावट पर क्या कहा है?
खबर प्रकाशित होने तक NSE ने बाज़ार हिस्सेदारी और परिचालन प्रदर्शन में आ रही गिरावट पर पूछे गए सवालों का कोई जवाब नहीं दिया है।
राष्ट्र प्रेस
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