NSE IPO से पहले परिचालन आय ₹16,601 करोड़ पर, ट्रांजैक्शन चार्जेज और ट्रेडिंग वॉल्यूम में गिरावट
सारांश
मुख्य बातें
नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) का परिचालन प्रदर्शन आईपीओ की तैयारियों के बीच कमज़ोर पड़ा है। सेबी (SEBI) के पास दाखिल ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (DRHP) में दिए आँकड़ों के अनुसार, एक्सचेंज की कुल परिचालन आय वित्त वर्ष 2026 में घटकर ₹16,601.30 करोड़ रह गई, जो वित्त वर्ष 2025 में ₹17,140.67 करोड़ थी — यानी सालाना आधार पर 3 प्रतिशत से अधिक की गिरावट। देश के सबसे बड़े एक्सचेंज के लिए यह गिरावट ऐसे समय में आई है जब वह बाज़ार में अपनी लिस्टिंग की तैयारी कर रहा है।
ट्रांजैक्शन चार्जेज में गिरावट
NSE की आय का सबसे बड़ा स्रोत — ट्रांजैक्शन चार्जेज — भी दबाव में है। DRHP के अनुसार, यह आय वित्त वर्ष 2025 के ₹13,635.76 करोड़ से घटकर वित्त वर्ष 2026 में ₹13,057.01 करोड़ पर आ गई, जो सालाना आधार पर 4 प्रतिशत की कमी है। यह गिरावट सीधे तौर पर ट्रेडिंग वॉल्यूम में आई कमी को दर्शाती है।
क्लियरिंग एवं सेटलमेंट सेवाओं पर असर
NSE की क्लियरिंग एंड सेटलमेंट सर्विसेज से होने वाली आय में और भी तीखी गिरावट दर्ज की गई है। वित्त वर्ष 2026 में यह 21.8 प्रतिशत घटकर ₹251.45 करोड़ रह गई, जबकि वित्त वर्ष 2025 में यह ₹321.34 करोड़ थी। हालाँकि, इसी अवधि में लिस्टिंग सर्विसेज से आय 10 प्रतिशत बढ़कर ₹352.43 करोड़ हो गई, जो पिछले वर्ष ₹313.82 करोड़ थी — यह एकमात्र उत्साहजनक संकेत रहा।
ट्रेडिंग वॉल्यूम में बड़ी गिरावट
DRHP में दिए आँकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2026 में कैश मार्केट में औसत दैनिक ट्रेडिंग वॉल्यूम (ADTV) ₹1,05,516.66 करोड़ रहा, जो वित्त वर्ष 2025 के ₹1,12,963.24 करोड़ से 6.59 प्रतिशत कम है।
फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस (F&O) सेगमेंट में गिरावट और भी गहरी रही। इक्विटी फ्यूचर्स में ADTV ₹1,59,443.21 करोड़ रहा, जो वित्त वर्ष 2025 के ₹1,85,901.44 करोड़ की तुलना में 14.23 प्रतिशत की बड़ी गिरावट है। इसी तरह, इक्विटी ऑप्शन (प्रीमियम वैल्यू) का ADTV ₹57,661.75 करोड़ रहा, जो वित्त वर्ष 2025 के ₹62,448.66 करोड़ से 7.66 प्रतिशत कम है।
NSE की अपनी चेतावनी
NSE ने अपनी DRHP में स्वयं स्वीकार किया है कि यदि वॉल्यूम और लेनदेन की वैल्यू में गिरावट जारी रही, तो उत्पादों की माँग घट सकती है, जिसका सीधा असर एक्सचेंज की वृद्धि, वित्तीय स्थिति, कारोबार और कैशफ्लो पर पड़ सकता है। गौरतलब है कि यह स्वीकारोक्ति ऐसे समय में आई है जब NSE निवेशकों को अपने IPO में भाग लेने के लिए आमंत्रित करने की तैयारी में है।
आगे की राह
आँकड़ों के अनुसार, NSE के समक्ष मुख्य चुनौती अपने कोर रेवेन्यू स्ट्रीम — ट्रांजैक्शन चार्जेज और F&O वॉल्यूम — को पुनः पटरी पर लाना है। लिस्टिंग सर्विसेज में वृद्धि एक सकारात्मक संकेत है, लेकिन यह मुख्य कारोबार की गिरावट की भरपाई करने के लिए पर्याप्त नहीं है। IPO की सफलता काफी हद तक इस बात पर निर्भर करेगी कि एक्सचेंज अपने वॉल्यूम में सुधार का कितना विश्वसनीय रोडमैप पेश कर पाता है।