ईरान-इराक हवाई क्षेत्र से बचें एयरलाइंस: EASA की 31 अगस्त तक एडवाइजरी, मध्य पूर्व में बढ़ा तनाव
सारांश
मुख्य बातें
यूरोपीय संघ विमानन सुरक्षा एजेंसी (EASA) ने बुधवार, 8 जुलाई को सभी एयरलाइंस को ईरान और इराक के हवाई क्षेत्र में परिचालन से बचने की औपचारिक एडवाइजरी जारी की है। यह चेतावनी मध्य पूर्व में अमेरिका-ईरान के बीच बढ़ते सैन्य टकराव और आगे और हमलों की आशंका के मद्देनज़र दी गई है। एजेंसी ने स्पष्ट किया कि यह एडवाइजरी 31 अगस्त 2026 तक प्रभावी रहेगी।
एडवाइजरी का दायरा और पृष्ठभूमि
EASA की पिछली एडवाइजरी — जिसकी अवधि बुधवार को समाप्त हो रही थी — में लेबनान भी शामिल था। नई एडवाइजरी में लेबनान को हटाते हुए ईरान और इराक पर विशेष रूप से ध्यान केंद्रित किया गया है। इसके साथ ही एजेंसी ने बहरीन, कुवैत, इज़रायल, जॉर्डन, कतर, ओमान, संयुक्त अरब अमीरात (UAE) और सऊदी अरब के हवाई क्षेत्रों में उड़ान के दौरान अतिरिक्त सतर्कता बरतने की सलाह बरकरार रखी है।
मुख्य घटनाक्रम: अमेरिका-ईरान टकराव
यह एडवाइजरी ऐसे समय में आई है जब अमेरिका और ईरान के बीच हवाई हमलों का सिलसिला शुरू हो चुका है। अमेरिकी पक्ष ने कथित तौर पर 80 ठिकानों को निशाना बनाने का दावा किया है, जबकि ईरानी बलों ने 85 ठिकानों पर हमले का दावा किया है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के अनुसार, ये हमले स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में तीन वाणिज्यिक जहाजों पर ईरान के हमलों के जवाब में की गई कार्रवाई हैं।
ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) ने दावा किया है कि उन्होंने बहरीन और कुवैत में दर्जनों अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया। ईरानी सरकारी मीडिया के अनुसार, होर्मुज स्ट्रेट के आसपास कई धमाके सुने गए हैं।
समझौते पर दबाव और प्रतिबंध छूट रद्द
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दोनों देशों के बीच हुए समझौता ज्ञापन (MOU) को 'खत्म' बताया है, जिससे मध्य पूर्व संघर्ष को समाप्त करने के लिए हुए अंतरिम समझौते पर दबाव और बढ़ गया है। वाशिंगटन ने ईरानी तेल पर लागू अस्थायी प्रतिबंध छूट (सैंक्शंस वेवर) को भी रद्द कर दिया है। ईरान के विदेश मंत्रालय ने अमेरिका पर MOU का बार-बार उल्लंघन करने का आरोप लगाया है।
समुद्री गलियारे पर विवाद
इससे पहले ओमान के नज़दीक तीन वाणिज्यिक जहाजों को निशाना बनाया गया था। ओमान ने अपनी तटरेखा से सटे एक अस्थायी समुद्री गलियारे के प्रस्ताव का समर्थन किया था, लेकिन तेहरान ने इसका विरोध किया — कथित तौर पर इसलिए कि वह इस जलमार्ग से गुज़रने वाले जहाजों से शुल्क वसूलना चाहता है।
आम जनता और विमान यात्रियों पर असर
EASA की यह एडवाइजरी यूरोपीय एयरलाइंस के लिए बाध्यकारी दिशानिर्देश की तरह काम करती है और इसका सीधा असर भारत, एशिया तथा यूरोप के बीच उड़ानों के मार्गों पर पड़ सकता है। ईरान और इराक के हवाई क्षेत्र से बचने पर उड़ानों की अवधि और ईंधन खर्च बढ़ सकता है। गौरतलब है कि यह क्षेत्र अंतरराष्ट्रीय हवाई यातायात का एक महत्वपूर्ण गलियारा है। स्थिति की निगरानी जारी है और एडवाइजरी को आगे भी अपडेट किया जा सकता है।