डीजीसीए का एयरलाइंस को पश्चिम एशिया के नौ देशों के हवाई क्षेत्र से बचने का निर्देश
सारांश
Key Takeaways
- डीजीसीए का निर्देश तुरंत प्रभावी है।
- नौ देशों के एयरस्पेस का उपयोग न करने का आदेश।
- सऊदी अरब और ओमान के ऊपर कुछ शर्तों के तहत उड़ानें संभव।
- उड़ान सुरक्षा के लिए व्यापक सुरक्षा जोखिम मूल्यांकन की आवश्यकता।
- फ्लाइट क्रू को नवीनतम जानकारी से अद्यतित रखना आवश्यक।
नई दिल्ली, 20 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। भारत की विमानन नियामक नागर विमानन महानिदेशालय (डीजीसीए) ने ईरान-अमेरिका और इजरायल के बीच चल रहे युद्ध के कारण प्रभावित नौ देशों के एयरस्पेस का उपयोग न करने का आदेश दिया है।
इन देशों में बहरीन, ईरान, इराक, इजरायल, जॉर्डन, कुवैत, लेबनान, कतर और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) शामिल हैं।
हालांकि, नागरिक विमानन प्राधिकरण (डीजीसीए) की सूचना के अनुसार, कुछ विशेष शर्तों के तहत ओमान और सऊदी अरब के ऊपर उड़ानों की अनुमति दी जा सकती है।
नियमक के अनुसार, अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान में हाल ही में किए गए सैन्य हमलों ने नागरिक विमानन के लिए एक उच्च जोखिम वाला वातावरण बना दिया है। इसके साथ ही, ईरान की संभावित प्रतिक्रिया ने इस खतरे को और बढ़ा दिया है, जिससे उड़ान संचालन को गंभीर खतरों का सामना करना पड़ सकता है।
इसके अलावा, एयरलाइंस को सऊदी अरब और ओमान के निर्दिष्ट हवाई क्षेत्र में 32,000 फीट (एलएल320) से नीचे उड़ान न भरने की सलाह दी गई है।
नियामक ने संभावित व्यवधानों, जिनमें मार्ग परिवर्तन शामिल हैं, से निपटने के लिए व्यापक सुरक्षा जोखिम मूल्यांकन और मजबूत आकस्मिक योजनाओं की आवश्यकता पर जोर दिया है।
यह सलाह तुरंत प्रभाव से लागू हो गई है और 28 मार्च तक प्रभावी रहेगी, जब तक कि बदलते हालात के आधार पर इसमें संशोधन नहीं किया जाता।
डीजीसीए ने एयरलाइंस को सभी उड़ान स्तरों और ऊंचाइयों पर प्रभावित हवाई क्षेत्रों में संचालन से बचने का निर्देश दिया है।
डीजीसीए ने कहा कि इस क्षेत्र में जिन भी हवाई अड्डों का संचालन हो रहा है, वहां किसी भी आकस्मिक स्थिति से निपटने के लिए व्यवस्थाएं होनी चाहिए।
अंत में, एयरलाइनों को यह सुनिश्चित करने के लिए कहा गया है कि फ्लाइट क्रू को लेटेस्ट नोटम (नोटिस टू एयरमेन) के बारे में बताया जाए, जो हवाई क्षेत्र प्रतिबंधों और परिचालन स्थितियों के बारे में वास्तविक समय की जानकारी प्रदान करते हैं।