ई-20 पेट्रोल विवाद: केजरीवाल ने 29 ऑटो कंपनियों को भेजा नोटिस, पुरानी गाड़ियों की सुरक्षा और मुआवजे पर माँगा लिखित जवाब
सारांश
मुख्य बातें
आम आदमी पार्टी (AAP) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने 8 जुलाई 2026 को देश की 29 प्रमुख ऑटो निर्माता कंपनियों को पत्र लिखकर ई-20 पेट्रोल (20 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रित ईंधन) के 2023 से पहले निर्मित वाहनों में उपयोग की सुरक्षा पर एक सप्ताह के भीतर लिखित स्पष्टीकरण माँगा है। उन्होंने यह भी जानना चाहा है कि यदि इस ईंधन से माइलेज में गिरावट आती है या वाहन के पुर्जों को नुकसान पहुँचता है, तो क्या कंपनियाँ उपभोक्ताओं को आर्थिक मुआवजा देने के लिए तैयार हैं।
मुख्य घटनाक्रम
केजरीवाल ने 29 कंपनियों में से तीन प्रमुख निर्माताओं — मारुति सुजुकी, टोयोटा किर्लोस्कर मोटर और हीरो मोटोकॉर्प — को अलग से पत्र भेजा है। उनका आरोप है कि इन तीनों कंपनियों के प्रतिनिधियों ने 4 जुलाई को एक सरकारी प्रेस कॉन्फ्रेंस में दावा किया था कि पुरानी गाड़ियों में ई-20 पेट्रोल पूरी तरह सुरक्षित है और इससे केवल 4 से 5 प्रतिशत तक ही माइलेज घटती है, जबकि वाहन को कोई तकनीकी क्षति नहीं होती।
शेष 26 ऑटो निर्माता कंपनियों को भेजे पत्र में केजरीवाल ने पूछा है कि क्या उनकी पुरानी पेट्रोल गाड़ियों में ई-20 का उपयोग संभव है, औसत माइलेज में कितनी कमी आएगी, और इंजन या अन्य पुर्जों पर कोई प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा या नहीं।
मैनुअल और सार्वजनिक बयानों में विरोधाभास
केजरीवाल ने इन कंपनियों के आधिकारिक ओनर मैनुअल का हवाला देते हुए कहा कि 2023 से पहले बनी कई गाड़ियों के लिए मैनुअल में 10 प्रतिशत से अधिक एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल के उपयोग की अनुमति नहीं दी गई है। उनके अनुसार, जब कंपनियों के आधिकारिक दस्तावेज़ और उनके प्रतिनिधियों के सार्वजनिक बयान परस्पर विरोधी हों, तो करोड़ों वाहन मालिकों के बीच भ्रम की स्थिति स्वाभाविक है।
गौरतलब है कि यह विवाद ऐसे समय में उठा है जब केंद्र सरकार ई-20 पेट्रोल को देशभर में चरणबद्ध तरीके से लागू कर रही है और इसे ईंधन आयात घटाने तथा कार्बन उत्सर्जन कम करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बता रही है।
उपभोक्ता हित पर केजरीवाल का तर्क
केजरीवाल ने स्पष्ट किया कि यह मुद्दा केवल तकनीकी नहीं, बल्कि करोड़ों वाहन मालिकों से जुड़ा उपभोक्ता हित का सवाल है। उन्होंने कहा कि यदि किसी वाहन की माइलेज 5 से 10 प्रतिशत से अधिक घटती है या इंजन अथवा किसी महत्वपूर्ण कंपोनेंट को नुकसान पहुँचता है, तो संबंधित कंपनी को उपभोक्ता को आर्थिक हर्जाना देना चाहिए।
उन्होंने यह भी घोषणा की कि वे गुरुवार को दिल्ली के कुछ पेट्रोल पंपों, वाहन सर्विस सेंटरों और मैकेनिकों से मुलाकात कर ई-20 पेट्रोल को लेकर उपभोक्ताओं और विशेषज्ञों की ज़मीनी राय जानेंगे।
सरकार से जवाबदेही की माँग
केजरीवाल ने कहा कि सरकार ई-20 पेट्रोल को सुरक्षित बता रही है, लेकिन जनता के वास्तविक अनुभव भी सामने आने चाहिए। उनके अनुसार, सरकार को इस मुद्दे पर वैज्ञानिक तथ्यों और उपभोक्ता हितों को प्राथमिकता देनी चाहिए। आने वाले दिनों में ऑटो कंपनियों के जवाबों से यह स्पष्ट होगा कि ई-20 ईंधन की नीति पुराने वाहन मालिकों पर किस हद तक आर्थिक बोझ डालती है।