ई20 इथेनॉल ईंधन पुराने वाहनों पर कठोर परीक्षण के बाद मंजूर, उद्योग विशेषज्ञों ने दूर की भ्रांतियाँ
सारांश
मुख्य बातें
पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने 4 जुलाई 2026 को नई दिल्ली में भारी उद्योग मंत्रालय और सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के साथ संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस का आयोजन किया, जिसमें ऊर्जा और ऑटोमोबाइल क्षेत्र के शीर्ष विशेषज्ञों ने ई20 इथेनॉल-मिश्रित पेट्रोल कार्यक्रम को लेकर वाहन मालिकों की आशंकाओं का खंडन किया। विशेषज्ञों ने एकमत से कहा कि यह कार्यक्रम वैज्ञानिक रूप से संचालित, चरणबद्ध और व्यापक परीक्षणों पर आधारित है।
कौन-कौन से विशेषज्ञ थे मौजूद
प्रेस कॉन्फ्रेंस में इंजीनियर्स इंडिया लिमिटेड (EIL) की पूर्व अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक वर्तिका शुक्ला, टोयोटा किर्लोस्कर मोटर (TKM) के कंट्री हेड एवं कार्यकारी उपाध्यक्ष विक्रम गुलाटी, मारुति सुजुकी के वरिष्ठ कार्यकारी अधिकारी राहुल भारती, हीरो मोटोकॉर्प के मुख्य व्यवसाय अधिकारी आशुतोष वर्मा, TVS मोटर कंपनी के वरिष्ठ उपाध्यक्ष प्रसाद कृष्णन, हुंडई मोटर इंडिया के एसोसिएट उपाध्यक्ष पुनीत आनंद और बजाज ऑटो लिमिटेड के सर्कल हेड सेल्स मनप्रीत सिंह बिंद्रा उपस्थित रहे।
विक्रम गुलाटी: इथेनॉल 1900 से उपयोग में, परीक्षण प्रोटोकॉल से समझौता नहीं
विक्रम गुलाटी ने कहा कि ऑटोमोटिव उद्योग सबसे कड़ाई से विनियमित क्षेत्रों में से एक है, जहाँ वाहनों को बाज़ार में उतारने से पहले और बाद में स्वतंत्र, वैश्विक स्तर पर मान्यता प्राप्त एजेंसियों द्वारा कठोर परीक्षण और प्रमाणन से गुज़रना पड़ता है। उन्होंने इथेनॉल को 1900 के दशक की शुरुआत से उपयोग में आने वाला और फॉर्मूला रेसिंग में भी इस्तेमाल होने वाला उच्च-प्रदर्शन, स्वच्छ ईंधन बताया।
गुलाटी ने स्पष्ट किया कि ई20 पर जाने का निर्णय पुराने वाहनों पर कठोर परीक्षण के बाद ही लिया गया। उन्होंने यह भी बताया कि हाल ही में लॉन्च किए गए ई85 वितरण स्टेशन विशेष रूप से फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों के लिए हैं, जो भविष्य की नीति की दिशा को दर्शाता है। परीक्षण एजेंसियों की स्वतंत्रता पर उन्होंने कहा कि भारत UNECE का सदस्य है और परीक्षण प्रक्रियाएँ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मानकीकृत हैं — इन प्रोटोकॉल से समझौता नहीं किया जा सकता।
राहुल भारती: 2.84 करोड़ सर्विस्ड कारों में ई20 से कोई समस्या नहीं
राहुल भारती ने बताया कि ई10 के लिए डिज़ाइन किए गए वाहनों का ई20 ईंधन के साथ सभी मापदंडों पर परीक्षण किया गया और कोई भी समस्या सामने नहीं आई। उन्होंने उल्लेख किया कि वित्त वर्ष 2025-26 में मारुति सुजुकी द्वारा सर्विस की गई 2.84 करोड़ कारों में से 1.5 करोड़ से अधिक कारें तीन साल से अधिक पुरानी थीं और ई20 प्रमाणित नहीं थीं — फिर भी जंग, टूट-फूट या पुर्जों के जीवनकाल में कमी जैसी कोई ई20-संबंधित समस्या फील्ड से रिपोर्ट नहीं हुई।
माइलेज पर प्रभाव के बारे में भारती ने बताया कि ई20 का कैलोरी मान ई10 से लगभग 3 से 3.5 प्रतिशत कम है। 20 किमी प्रति लीटर माइलेज देने वाली कार के लिए यह प्रभाव केवल 0.6 किमी प्रति लीटर तक सीमित है। उन्होंने जोड़ा कि टायर का दबाव, ड्राइविंग का तरीका, गियर का सही उपयोग और रखरखाव जैसे कारक माइलेज में कहीं अधिक अंतर पैदा करते हैं। इथेनॉल से बेहतर त्वरण, बेहतर एंटी-नॉकिंग और शुद्ध पेट्रोल की तुलना में काफी कम प्रदूषण जैसे लाभ इस मामूली कमी की भरपाई कर देते हैं।
भारती ने यह भी स्पष्ट किया कि वाहनों को ई20 मानकों के अनुपालन से कहीं अधिक सुरक्षा कारकों के साथ डिज़ाइन किया गया है और बाज़ार में कोई रेट्रोफिटमेंट किट उपलब्ध नहीं है — ऐसे समाधान अभी अनुसंधान एवं विकास तक ही सीमित हैं।
वर्तिका शुक्ला और आशुतोष वर्मा की राय
वर्तिका शुक्ला ने कहा कि इथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम सभी हितधारकों के साथ विचार-विमर्श के बाद तैयार किया गया है और यह वैश्विक सर्वोत्तम प्रथाओं के अनुरूप है। उन्होंने बताया कि ई20 ईंधन BIS मानक और BS-VI उत्सर्जन मानदंडों के अनुरूप है और देश भर के सभी खुदरा दुकानों पर समान रूप से उपलब्ध है। कई देशों में इथेनॉल मिश्रण कई वर्षों से उपयोग में है।
आशुतोष वर्मा ने कहा कि दुनिया के सबसे बड़े दोपहिया वाहन निर्माताओं में से एक होने के नाते हीरो मोटोकॉर्प ने व्यापक सेवा डेटा का विश्लेषण किया है और पाया है कि पहले के ईंधनों की तुलना में ई20 पर चलने वाले वाहनों में अधिक क्षति की कोई घटना नहीं हुई है।
उद्योग का सामूहिक संदेश
पैनल ने ई20 कार्यक्रम में उद्योग के सामूहिक विश्वास की पुष्टि करते हुए कहा कि उपभोक्ताओं के प्रश्नों को पारदर्शिता के साथ संबोधित करने की प्रतिबद्धता बनी रहेगी। गौरतलब है कि यह प्रेस कॉन्फ्रेंस ऐसे समय में आई है जब सोशल मीडिया पर ई20 ईंधन से वाहनों को नुकसान पहुँचने की अफवाहें फैल रही थीं। आने वाले समय में फ्लेक्स-फ्यूल नीति और ई85 के विस्तार से भारत की ऊर्जा स्वतंत्रता की दिशा और स्पष्ट होगी।