ई25 ईंधन पर जल्दबाजी नहीं, परीक्षण के बाद फैसला: पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने 7 जुलाई 2026 को स्पष्ट किया कि सरकार फिलहाल ई25 इथेनॉल-मिश्रित ईंधन लागू करने की किसी जल्दी में नहीं है। मंत्री ने मीडिया से बातचीत में कहा कि ई25 से संबंधित परीक्षण अभी जारी हैं और नतीजे आने के बाद ही ऑटोमोबाइल निर्माताओं सहित सभी हितधारकों से विचार-विमर्श कर आगे का रास्ता तय किया जाएगा।
इथेनॉल मिश्रण की मौजूदा स्थिति
पुरी ने बताया कि भारत पिछले साढ़े तीन वर्षों से ई15 ईंधन का उपयोग कर रहा है, जबकि ई20 को अप्रैल 2025 से लागू किया गया था। उन्होंने कहा कि ई20 को लागू हुए एक वर्ष से अधिक का समय बीत चुका है और वाहन निर्माता तथा उपभोक्ता दोनों इस ईंधन से पूरी तरह सहज हैं। यह ऐसे समय में आया है जब सोशल मीडिया पर ई20 को लेकर भ्रामक दावे वायरल हो रहे हैं।
सरकार का रुख: परीक्षण पहले, निर्णय बाद में
मंत्री पुरी ने कहा, 'यदि कोई यह कह रहा है कि भारत जल्द ही ई25 पर जाने वाला है, तो यह सही नहीं है।' उन्होंने जोड़ा कि परीक्षण रिपोर्ट आने के बाद उनका मूल्यांकन होगा और फिर सभी हितधारकों, विशेष रूप से ऑटोमोबाइल निर्माताओं से चर्चा की जाएगी। उन्होंने यह भी कहा, 'मैं न तो कार बनाता हूं और न ही ईंधन' — यानी किसी भी नीतिगत बदलाव में उद्योग की भागीदारी अनिवार्य होगी। गौरतलब है कि ई85 ईंधन की शुरुआत अभी सीमित स्तर पर हुई है और इसके विस्तार के लिए नए पेट्रोल पंपों व बुनियादी ढाँचे का विकास किया जा रहा है।
वायरल वीडियो पर सरकार का खंडन
पुरी ने सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे उन वीडियो को सिरे से खारिज किया जिनमें दावा किया जा रहा है कि ईंधन में बदलाव के कारण वाहन खराब हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि ऐसी खबरें भ्रामक हैं और तथ्यों को गलत तरीके से पेश किया जा रहा है। उन्होंने लोगों से ऐसी अफवाहों पर विश्वास न करने की अपील की।
अंडमान में गैस खोज: ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में कदम
एक कार्यक्रम में बोलते हुए पुरी ने अंडमान क्षेत्र में हुई प्राकृतिक गैस खोज को भारत के ऊर्जा क्षेत्र के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि बताया। उन्होंने कहा कि तीन अन्वेषण कुओं में से दो में प्राकृतिक गैस मिली है। मंत्री के अनुसार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा पिछले वर्ष 15 अगस्त को शुरू किया गया 'समुद्र मंथन' अभियान 'विकसित भारत' की ऊर्जा क्रांति की नींव है।
एलपीजी संकट से सबक और उत्पादन क्षमता में विस्तार
पुरी ने वैश्विक ऊर्जा संकट के दौरान सरकार के कदमों का ब्यौरा देते हुए बताया कि 33 करोड़ से अधिक एलपीजी उपभोक्ताओं तक निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करना सबसे बड़ी चुनौती थी। उन्होंने कहा कि प्रभावी कूटनीतिक प्रयासों से फंसे हुए ऊर्जा जहाजों को सुरक्षित निकाला गया और घरेलू एलपीजी उत्पादन क्षमता को 35,000 मीट्रिक टन प्रतिदिन से बढ़ाकर 54,000 मीट्रिक टन प्रतिदिन कर दिया गया। इसी का परिणाम रहा कि संकट के दौरान देश में एलपीजी आपूर्ति बिना किसी रुकावट के जारी रही। आगे चलकर घरेलू ऊर्जा उत्पादन में यह वृद्धि विदेशी आयात पर निर्भरता को और कम करने में सहायक होगी।