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ई85 फ्यूल स्टेशन 2027 तक 5,000 होंगे: हरदीप पुरी का बड़ा ऐलान, NCR-मुंबई से होगी शुरुआत

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ई85 फ्यूल स्टेशन 2027 तक 5,000 होंगे: हरदीप पुरी का बड़ा ऐलान, NCR-मुंबई से होगी शुरुआत

सारांश

भारत सरकार का फ्लेक्स-फ्यूल दांव महज़ एक ईंधन नीति नहीं — यह किसान आय, ऊर्जा सुरक्षा और जलवायु लक्ष्यों को एक साथ साधने की कोशिश है। 2027 तक 5,000 ई85 स्टेशन, ₹12,403 करोड़ की किसान आय और 66.4 लाख मीट्रिक टन कम कार्बन — पेट्रोलियम मंत्री पुरी का यह ऐलान भारत की ऊर्जा राजनीति में नया अध्याय है।

मुख्य बातें

पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने 4 जून 2026 को 2027 के अंत तक 5,000 ई85 फ्यूल स्टेशन स्थापित करने का लक्ष्य घोषित किया।
पहले चरण में NCR, मुंबई, पुणे और नागपुर में लगभग 100 स्टेशन ; दिसंबर 2026 तक संख्या 500 की जाएगी।
50% नए वाहनों द्वारा फ्लेक्स-फ्यूल अपनाने पर 311.8 करोड़ लीटर अतिरिक्त एथेनॉल माँग और ₹12,403 करोड़ किसान आय वृद्धि संभव।
फ्लेक्स-फ्यूल अपनाने से करीब 66.4 लाख मीट्रिक टन कार्बन उत्सर्जन में कमी का अनुमान।
मारुति सुजुकी वैगनआर फ्लेक्स-फ्यूल मॉडल लॉन्च के साथ चारपहिया खंड भी इस इकोसिस्टम में शामिल।
सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने और वाहन निर्माताओं के फ्लेक्स-फ्यूल में प्रवेश की उम्मीद जताई।

पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने 4 जून 2026 को नई दिल्ली में घोषणा की कि केंद्र सरकार 2027 के अंत तक देशभर में 5,000 ई85 ईंधन वितरण स्टेशन स्थापित करेगी। यह घोषणा मारुति सुजुकी वैगनआर के फ्लेक्स-फ्यूल मॉडल के लॉन्च कार्यक्रम के दौरान की गई। इस पहल का पहला चरण राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR), मुंबई, पुणे और नागपुर से शुरू होगा।

चरणबद्ध विस्तार की योजना

मंत्री पुरी ने बताया कि सर्वप्रथम प्रमुख शहरी केंद्रों में लगभग 100 ई85 फ्यूल डिस्पेंसिंग स्टेशन शुरू किए जाएंगे। इसके बाद दिसंबर 2026 तक यह संख्या बढ़ाकर 500 की जाएगी। अंतिम लक्ष्य 2027 के अंत तक देश के प्रमुख शहरों में 5,000 स्टेशन स्थापित करना है।

ई85 एक ईंधन मिश्रण है जिसमें 85 प्रतिशत तक एथेनॉल होता है। भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) ने इसे फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों के लिए मानक ईंधन के रूप में अधिसूचित किया है।

पर्यावरण और किसानों पर असर

मंत्री पुरी के अनुसार, यदि देश में बिकने वाले नए दोपहिया और चारपहिया वाहनों में से 50 प्रतिशत फ्लेक्स-फ्यूल तकनीक अपनाते हैं, तो इससे 311.8 करोड़ लीटर अतिरिक्त एथेनॉल की माँग उत्पन्न होगी। इसके साथ ही किसानों की आय में लगभग ₹12,403 करोड़ की अतिरिक्त वृद्धि और करीब 66.4 लाख मीट्रिक टन कार्बन उत्सर्जन में कमी संभव है।

पुरी ने कहा, 'इससे हमारे किसान केवल अन्नदाता ही नहीं, बल्कि ऊर्जादाता भी बनेंगे।' यह पहल ऊर्जा आयात बिल घटाने के साथ-साथ ग्रामीण आय का एक नया और स्थायी स्रोत बनाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

ई85 बनाम इलेक्ट्रिक वाहन

मंत्री ने दावा किया कि ई85 को देश के सबसे स्वच्छ ईंधन विकल्पों में गिना जा रहा है, और कई परिस्थितियों में यह इलेक्ट्रिक वाहनों की तुलना में भी अधिक पर्यावरण-अनुकूल साबित हो सकता है। विशेषज्ञ इस तुलना पर अलग-अलग मत रखते हैं, क्योंकि ईवी की पर्यावरणीय उपयोगिता काफी हद तक विद्युत उत्पादन के स्रोत पर निर्भर करती है।

गौरतलब है कि फ्लेक्स-फ्यूल तकनीक अब केवल दोपहिया वाहनों तक सीमित नहीं रही — मारुति सुजुकी वैगनआर के फ्लेक्स-फ्यूल संस्करण की लॉन्चिंग इस बात का प्रमाण है कि चारपहिया खंड भी इस इकोसिस्टम में प्रवेश कर चुका है।

वैश्विक तेल संकट की पृष्ठभूमि

यह पहल ऐसे समय में सामने आई है जब पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनावों के कारण वैश्विक कच्चे तेल की कीमतें ऊँचे स्तर पर बनी हुई हैं, जिसका सीधा असर देश की तेल विपणन कंपनियों पर पड़ रहा है। पुरी ने कहा कि वैश्विक चुनौतियों के बावजूद भारत में ईंधन मूल्यवृद्धि जापान जैसे देशों की तुलना में अपेक्षाकृत कम रही है।

गडकरी का समर्थन और आगे की राह

कार्यक्रम में उपस्थित केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने उम्मीद जताई कि आने वाले समय में और अधिक वाहन निर्माता कंपनियाँ फ्लेक्स-फ्यूल खंड में प्रवेश करेंगी। उन्होंने कहा कि भारत तेजी से स्वच्छ और पर्यावरण-अनुकूल परिवहन व्यवस्था की ओर बढ़ रहा है।

यह ऐसे समय में आया है जब सरकार एथेनॉल सम्मिश्रण कार्यक्रम को पहले ही 20 प्रतिशत के लक्ष्य की ओर आगे बढ़ा चुकी है। ई85 की व्यापक उपलब्धता उस नीतिगत दिशा को और पुख्ता करती है — बशर्ते इंफ्रास्ट्रक्चर निर्माण की गति समयसीमा के अनुरूप बनी रहे।

संपादकीय दृष्टिकोण

000 ई85 स्टेशनों का लक्ष्य महत्वाकांक्षी है, लेकिन असली परीक्षा क्रियान्वयन की गति की होगी — भारत का एथेनॉल सम्मिश्रण कार्यक्रम लक्ष्यों के मामले में आगे रहा है, पर इंफ्रास्ट्रक्चर विस्तार अक्सर पीछे छूटा है। ई85 की तुलना इलेक्ट्रिक वाहनों से 'अधिक पर्यावरण-अनुकूल' के रूप में करना विवादास्पद है, क्योंकि यह कोयला-आधारित विद्युत उत्पादन की स्थानीय वास्तविकता को नज़रअंदाज़ करता है। किसानों को ₹12,403 करोड़ के फायदे का अनुमान एक शर्त पर टिका है — 50% वाहनों का फ्लेक्स-फ्यूल अपनाना — जो अभी केवल एक परिदृश्य है, नीतिगत प्रतिबद्धता नहीं। बिना स्वतंत्र सत्यापन तंत्र के ये आँकड़े नीति-विज्ञापन और नीति-क्रियान्वयन के बीच की खाई को नहीं पाट सकते।
RashtraPress
21 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ई85 ईंधन क्या होता है और यह सामान्य पेट्रोल से कैसे अलग है?
ई85 एक ईंधन मिश्रण है जिसमें 85 प्रतिशत तक एथेनॉल और शेष पेट्रोल होता है। भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) ने इसे फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों के लिए मानक ईंधन के रूप में अधिसूचित किया है। यह सामान्य पेट्रोल की तुलना में कम कार्बन उत्सर्जन करता है और मुख्यतः गन्ने व अनाज से बने एथेनॉल पर आधारित है।
भारत में ई85 फ्यूल स्टेशन कब और कहाँ शुरू होंगे?
पहले चरण में NCR, मुंबई, पुणे और नागपुर में लगभग 100 स्टेशन शुरू होंगे। दिसंबर 2026 तक यह संख्या 500 और 2027 के अंत तक 5,000 तक पहुँचाने का लक्ष्य है।
फ्लेक्स-फ्यूल से किसानों को क्या फायदा होगा?
यदि 50% नए वाहन फ्लेक्स-फ्यूल तकनीक अपनाते हैं, तो किसानों की आय में लगभग ₹12,403 करोड़ की अतिरिक्त वृद्धि का अनुमान है। एथेनॉल की बढ़ती माँग गन्ना और अनाज उत्पादक किसानों को एक नया और स्थायी आय स्रोत देगी।
मारुति सुजुकी वैगनआर फ्लेक्स-फ्यूल मॉडल का क्या महत्व है?
मारुति सुजुकी वैगनआर का फ्लेक्स-फ्यूल संस्करण भारत में चारपहिया वाहनों में इस तकनीक के व्यावसायिक प्रवेश का प्रतीक है। अब तक यह तकनीक मुख्यतः दोपहिया खंड तक सीमित थी। इस लॉन्च से फ्लेक्स-फ्यूल इकोसिस्टम के तेज विस्तार की उम्मीद है।
ई85 को बढ़ावा देने का निर्णय अभी क्यों लिया गया?
पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनावों के कारण वैश्विक कच्चे तेल की कीमतें ऊँचे स्तर पर हैं, जिससे भारत का ऊर्जा आयात बिल बढ़ रहा है। ई85 जैसे घरेलू एथेनॉल-आधारित ईंधन को बढ़ावा देना आयात निर्भरता घटाने और ऊर्जा सुरक्षा मजबूत करने की दिशा में एक रणनीतिक कदम माना जा रहा है।
राष्ट्र प्रेस
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