एथेनॉल वाहनों में 1% बदलाव से ₹195 करोड़ की विदेशी मुद्रा बचत संभव: हरदीप पुरी
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने बुधवार को नई दिल्ली में कहा कि यदि भारत में सालाना बिकने वाले कुल वाहनों में एथेनॉल संचालित वाहनों की हिस्सेदारी मात्र एक प्रतिशत भी हो जाए, तो देश एक एथेनॉल सप्लाई ईयर में लगभग ₹195 करोड़ की विदेशी मुद्रा बचा सकता है। यह बयान राष्ट्रीय राजधानी में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान फ्लेक्स-फ्यूल मोबिलिटी की औपचारिक बाजार-शुरुआत के अवसर पर आया।
फ्लेक्स-फ्यूल मोबिलिटी की बड़े पैमाने पर शुरुआत
पुरी ने घोषणा की कि बड़े पैमाने पर फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों की शुरुआत बुधवार से हो गई है। उन्होंने इसे आयातित जीवाश्म ईंधनों पर निर्भरता घटाने और स्वच्छ परिवहन विकल्पों की दिशा में भारत के प्रयासों की एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया।
मंत्री ने कहा, ‘यह कदम न केवल देश की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करेगा बल्कि घरेलू स्तर पर उत्पादित जैव ईंधनों को बढ़ावा देने की सरकार की व्यापक रणनीति को भी समर्थन देगा।’
ई85 ईंधन की उपलब्धता
पुरी ने घोषणा की कि ई85 ईंधन — जिसमें पेट्रोल के साथ 85 प्रतिशत तक एथेनॉल मिलाया जाता है — देशभर के निर्दिष्ट ईंधन वितरण केंद्रों पर उपलब्ध कराया जाएगा। उनके अनुसार, ई85 पारंपरिक पेट्रोल की तुलना में काफी सस्ता होगा, जिससे यह उपभोक्ताओं के लिए एक किफायती विकल्प बनेगा।
ऊर्जा सुरक्षा और किसानों पर असर
मंत्री ने कहा, ‘एथेनॉल से चलने वाले वाहनों को अधिक अपनाने से कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पादों के लिए भारत के आयात बिल में काफी कमी आ सकती है, साथ ही घरेलू स्तर पर उत्पादित एथेनॉल की अतिरिक्त मांग भी पैदा हो सकती है।’ गौरतलब है कि भारत जीवाश्म ईंधन आयात कम करने, कार्बन उत्सर्जन में कटौती करने और जैव ईंधन मूल्य श्रृंखला के माध्यम से किसानों को अतिरिक्त आय के अवसर देने की रणनीति के तहत पेट्रोल में एथेनॉल का मिश्रण लगातार बढ़ा रहा है।
गडकरी का एथेनॉल चूल्हा
इस बीच, केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने पिछले महीने 25 मई को नागपुर में एक कार्यक्रम में स्वदेशी एथेनॉल आधारित चूल्हे की तकनीक का अनावरण किया था। उन्होंने कहा कि यह तकनीक एथेनॉल और पानी के मिश्रण से खाना पकाने योग्य लौ उत्पन्न करती है और व्यावसायिक एलपीजी सिलेंडरों की तुलना में सस्ती है।
गडकरी ने कहा, ‘पानी में 7 प्रतिशत एथेनॉल मिलाकर चूल्हे जैसी लौ उत्पन्न की जा सकती है, और यह खाना पकाने की गैस से भी सस्ती है। यह हमारे देश में ही विकसित की गई है।’
क्या होगा आगे
फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों के व्यापक रोलआउट और ई85 के वितरण नेटवर्क के विस्तार के साथ, सरकार की कोशिश परिवहन क्षेत्र में एथेनॉल की हिस्सेदारी को संरचनात्मक रूप से बढ़ाने की होगी, जिसका सीधा असर आयात बिल और गन्ना-मक्का किसानों की आय पर पड़ सकता है।