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एथेनॉल वाहनों में 1% बदलाव से ₹195 करोड़ की विदेशी मुद्रा बचत संभव: हरदीप पुरी

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एथेनॉल वाहनों में 1% बदलाव से ₹195 करोड़ की विदेशी मुद्रा बचत संभव: हरदीप पुरी

सारांश

हरदीप पुरी का दावा है कि एथेनॉल संचालित वाहनों की मात्र 1% हिस्सेदारी भारत को सालाना ₹195 करोड़ की विदेशी मुद्रा बचा सकती है। बुधवार को फ्लेक्स-फ्यूल मोबिलिटी की बड़े पैमाने पर शुरुआत हुई और ई85 ईंधन देशभर के चुनिंदा केंद्रों पर मिलेगा — एक ऐसा कदम जो आयात बिल, किसानों की आय और स्वच्छ परिवहन तीनों मोर्चों पर असर डाल सकता है।

मुख्य बातें

केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी के अनुसार, एथेनॉल वाहनों की 1% हिस्सेदारी से भारत को एक सप्लाई ईयर में ₹195 करोड़ की विदेशी मुद्रा बचत संभव।
बड़े पैमाने पर फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों की शुरुआत बुधवार से, नई दिल्ली के कार्यक्रम में औपचारिक ऐलान।
ई85 ईंधन (85% एथेनॉल + पेट्रोल) देशभर के निर्दिष्ट वितरण केंद्रों पर उपलब्ध; पारंपरिक पेट्रोल से सस्ता होने का दावा।
नितिन गडकरी ने 25 मई को नागपुर में स्वदेशी एथेनॉल आधारित चूल्हे की तकनीक का अनावरण किया था, जो एलपीजी से सस्ती बताई जा रही है।
लक्ष्य: कच्चे तेल का आयात बिल घटाना, कार्बन उत्सर्जन कम करना और किसानों को जैव ईंधन मूल्य श्रृंखला से अतिरिक्त आय।

केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने बुधवार को नई दिल्ली में कहा कि यदि भारत में सालाना बिकने वाले कुल वाहनों में एथेनॉल संचालित वाहनों की हिस्सेदारी मात्र एक प्रतिशत भी हो जाए, तो देश एक एथेनॉल सप्लाई ईयर में लगभग ₹195 करोड़ की विदेशी मुद्रा बचा सकता है। यह बयान राष्ट्रीय राजधानी में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान फ्लेक्स-फ्यूल मोबिलिटी की औपचारिक बाजार-शुरुआत के अवसर पर आया।

फ्लेक्स-फ्यूल मोबिलिटी की बड़े पैमाने पर शुरुआत

पुरी ने घोषणा की कि बड़े पैमाने पर फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों की शुरुआत बुधवार से हो गई है। उन्होंने इसे आयातित जीवाश्म ईंधनों पर निर्भरता घटाने और स्वच्छ परिवहन विकल्पों की दिशा में भारत के प्रयासों की एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया।

मंत्री ने कहा, ‘यह कदम न केवल देश की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करेगा बल्कि घरेलू स्तर पर उत्पादित जैव ईंधनों को बढ़ावा देने की सरकार की व्यापक रणनीति को भी समर्थन देगा।’

ई85 ईंधन की उपलब्धता

पुरी ने घोषणा की कि ई85 ईंधन — जिसमें पेट्रोल के साथ 85 प्रतिशत तक एथेनॉल मिलाया जाता है — देशभर के निर्दिष्ट ईंधन वितरण केंद्रों पर उपलब्ध कराया जाएगा। उनके अनुसार, ई85 पारंपरिक पेट्रोल की तुलना में काफी सस्ता होगा, जिससे यह उपभोक्ताओं के लिए एक किफायती विकल्प बनेगा।

ऊर्जा सुरक्षा और किसानों पर असर

मंत्री ने कहा, ‘एथेनॉल से चलने वाले वाहनों को अधिक अपनाने से कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पादों के लिए भारत के आयात बिल में काफी कमी आ सकती है, साथ ही घरेलू स्तर पर उत्पादित एथेनॉल की अतिरिक्त मांग भी पैदा हो सकती है।’ गौरतलब है कि भारत जीवाश्म ईंधन आयात कम करने, कार्बन उत्सर्जन में कटौती करने और जैव ईंधन मूल्य श्रृंखला के माध्यम से किसानों को अतिरिक्त आय के अवसर देने की रणनीति के तहत पेट्रोल में एथेनॉल का मिश्रण लगातार बढ़ा रहा है।

गडकरी का एथेनॉल चूल्हा

इस बीच, केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने पिछले महीने 25 मई को नागपुर में एक कार्यक्रम में स्वदेशी एथेनॉल आधारित चूल्हे की तकनीक का अनावरण किया था। उन्होंने कहा कि यह तकनीक एथेनॉल और पानी के मिश्रण से खाना पकाने योग्य लौ उत्पन्न करती है और व्यावसायिक एलपीजी सिलेंडरों की तुलना में सस्ती है।

गडकरी ने कहा, ‘पानी में 7 प्रतिशत एथेनॉल मिलाकर चूल्हे जैसी लौ उत्पन्न की जा सकती है, और यह खाना पकाने की गैस से भी सस्ती है। यह हमारे देश में ही विकसित की गई है।’

क्या होगा आगे

फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों के व्यापक रोलआउट और ई85 के वितरण नेटवर्क के विस्तार के साथ, सरकार की कोशिश परिवहन क्षेत्र में एथेनॉल की हिस्सेदारी को संरचनात्मक रूप से बढ़ाने की होगी, जिसका सीधा असर आयात बिल और गन्ना-मक्का किसानों की आय पर पड़ सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह तभी सार्थक होगा जब फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों की बिक्री और ई85 का वितरण नेटवर्क वास्तव में पैमाने पर पहुँचे — पिछले एथेनॉल मिश्रण लक्ष्यों का अनुभव मिश्रित रहा है। असली परीक्षा OMCs के पंप-स्तरीय रोलआउट, ऑटो निर्माताओं की फ्लेक्स-फ्यूल लाइनअप की कीमत, और गन्ना-मक्का आपूर्ति की स्थिरता में होगी। साथ ही, खाद्य-बनाम-ईंधन का सवाल और एथेनॉल उत्पादन में पानी की खपत ऐसे ढाँचागत मुद्दे हैं जिन पर मुख्यधारा की चर्चा अक्सर चुप रहती है। नीति की दिशा सही है, पर निष्पादन ही इसे सुर्खी से उपलब्धि में बदलेगा।
RashtraPress
19 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

हरदीप पुरी के अनुसार एथेनॉल वाहनों से भारत कितनी विदेशी मुद्रा बचा सकता है?
केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी के अनुसार, यदि भारत में सालाना बिकने वाले कुल वाहनों में एथेनॉल संचालित वाहनों की हिस्सेदारी मात्र 1% हो जाए, तो देश एक एथेनॉल सप्लाई ईयर में लगभग ₹195 करोड़ की विदेशी मुद्रा बचा सकता है। यह बचत मुख्य रूप से कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पादों के आयात बिल में कमी से आएगी।
ई85 ईंधन क्या है और यह कहाँ मिलेगा?
ई85 एक ऐसा ईंधन है जिसमें पेट्रोल के साथ 85 प्रतिशत तक एथेनॉल मिलाया जाता है। पुरी की घोषणा के अनुसार, यह ईंधन देशभर के निर्दिष्ट वितरण केंद्रों पर उपलब्ध कराया जाएगा और पारंपरिक पेट्रोल की तुलना में काफी सस्ता होगा।
फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों की बड़े पैमाने पर शुरुआत कब हुई?
मंत्री हरदीप पुरी के बयान के अनुसार, बड़े पैमाने पर फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों की शुरुआत बुधवार से हो गई है। इसे भारत के स्वच्छ परिवहन और जैव ईंधन रणनीति का एक महत्वपूर्ण कदम बताया गया है।
नितिन गडकरी के एथेनॉल चूल्हे की तकनीक क्या है?
केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने 25 मई को नागपुर में स्वदेशी एथेनॉल आधारित चूल्हे की तकनीक का अनावरण किया था, जो एथेनॉल और पानी के मिश्रण से खाना पकाने योग्य लौ उत्पन्न करती है। गडकरी के अनुसार, पानी में 7% एथेनॉल मिलाकर लौ बनाई जा सकती है और यह व्यावसायिक एलपीजी सिलेंडरों की तुलना में सस्ती है।
एथेनॉल को बढ़ावा देने से किसानों को क्या लाभ होगा?
सरकार की रणनीति के अनुसार, एथेनॉल आधारित जैव ईंधन मूल्य श्रृंखला किसानों के लिए अतिरिक्त आय के अवसर पैदा करती है। गन्ना, मक्का और अन्य फसलों से उत्पादित एथेनॉल की घरेलू मांग बढ़ने से किसानों को सीधा फायदा मिलने की उम्मीद है।
राष्ट्र प्रेस
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