ई85 ईंधन लॉन्च: पुरी ने दिल्ली में किया उद्घाटन, पेट्रोल से ₹20 सस्ता और 61% कम उत्सर्जन
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने 5 जून 2026 को विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर नई दिल्ली के एक इंडियन ऑयल फ्यूल स्टेशन पर ई85 ईंधन का औपचारिक उद्घाटन किया। यह ईंधन विशेष रूप से फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों के लिए तैयार किया गया है और पेट्रोल की तुलना में ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में 61 प्रतिशत तक की कमी का दावा किया गया है।
ई85 ईंधन क्या है और कैसे काम करता है
ई85 एथेनॉल और पेट्रोल का मिश्रित ईंधन है, जिसमें 80 से 85 प्रतिशत एथेनॉल और 14 से 19 प्रतिशत पेट्रोल होता है। यह केवल फ्लेक्स-फ्यूल तकनीक से लैस वाहनों में उपयोग के लिए उपयुक्त है। मंत्री पुरी ने बताया कि इस ईंधन को अनुकूल बनाने वाली तकनीकें काफी हद तक स्वदेशी हैं, जो भारत के आत्मनिर्भरता के लक्ष्य के अनुरूप है।
कीमत और उपभोक्ताओं पर असर
नई दिल्ली में ई85 ईंधन का दाम ₹82.12 प्रति लीटर तय किया गया है, जबकि मौजूदा सामान्य पेट्रोल ₹102.12 प्रति लीटर पर उपलब्ध है। इस प्रकार यह ईंधन उपभोक्ताओं को ₹20 प्रति लीटर की बचत कराएगा। फ्लेक्स-फ्यूल वाहन चालकों के लिए यह मूल्य अंतर दीर्घकालिक रूप से उल्लेखनीय बचत का स्रोत बन सकता है।
मंत्री पुरी का बयान
मंत्री पुरी ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट में कहा, "विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वच्छ, हरित एवं ऊर्जा सुरक्षित भारत की विजन से प्रेरणा लेकर आज दिल्ली में फ्लैक्स फ्यूल पर चलने वाले वाहनों के लिए दिल्ली के पेट्रोल पंप पर ई85 ईंधन का ऐतिहासिक उद्घाटन किया।" उन्होंने आगे जोड़ा, "ये ना केवल भारत के ऊर्जा क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण पहल है, बल्कि किसानों की अतिरिक्त आय का साधन भी है।"
किसानों और ऊर्जा सुरक्षा से जुड़ाव
ई85 में एथेनॉल की उच्च मात्रा का सीधा संबंध गन्ना और मक्का उत्पादक किसानों से है, क्योंकि एथेनॉल मुख्यतः इन्हीं फसलों से बनाया जाता है। पुरी ने कहा कि इस पहल से "ऊर्जादाताओं के जीवन में खुशहाली और उन्नति बनी रहेगी।" यह ऐसे समय में आया है जब भारत सरकार 2025-26 तक पेट्रोल में 20 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रण के लक्ष्य को हासिल करने की दिशा में काम कर रही है।
आगे की राह
मंत्री ने स्पष्ट किया कि ई85 ईंधन का विस्तार भारत के ग्रीन एनर्जी ट्रांजिशन को गति देगा, ऊर्जा आयात बिल घटाएगा और देश की समग्र ऊर्जा सुरक्षा को मज़बूत करेगा। फिलहाल यह ईंधन फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों तक सीमित है; व्यापक उपयोग के लिए वाहन उद्योग को अनुकूल इंजन तकनीक को बड़े पैमाने पर अपनाना होगा।