ई20 पेट्रोल विवाद पर हरदीप सिंह पुरी का पलटवार — 'वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित, ई85 लॉन्च के बाद शुरू हुई दुष्प्रचार मुहिम'
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने 9 जुलाई 2026 को एथेनॉल मिश्रित ईंधन ई20 के विरुद्ध उठ रही आलोचनाओं को सिरे से नकारते हुए कहा कि यह ईंधन पूरी तरह वैज्ञानिक परीक्षण से गुज़रा हुआ, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्वीकृत और सुरक्षित विकल्प है। उन्होंने आरोप लगाया कि 5 जून को फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों के लिए ई85 ईंधन लॉन्च होने के तुरंत बाद एथेनॉल मिश्रण के खिलाफ भ्रामक सूचनाएँ फैलाने का अभियान शुरू हो गया।
मंत्री का बयान और समयरेखा
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर की गई पोस्ट में पुरी ने स्पष्ट किया कि भारत में अप्रैल 2023 से ई15, अप्रैल 2024 से ई19 और अप्रैल 2025 से ई20 ईंधन का इस्तेमाल हो रहा है। उन्होंने कहा, 'इतने बड़े पैमाने पर उपयोग के बावजूद कोई गंभीर समस्या सामने नहीं आई है।' उनके अनुसार आलोचनाओं का समय और ई85 लॉन्च के बीच का संयोग 'नज़रअंदाज़ करना मुश्किल' है।
वाहनों पर असर — आँकड़े क्या कहते हैं
पुरी ने दावा किया कि देश में 20 करोड़ से अधिक दोपहिया वाहन और 20 लाख से ज़्यादा चारपहिया वाहन कई वर्षों से ई20 ईंधन पर सफलतापूर्वक चल रहे हैं। उन्होंने कहा, 'अचानक एथेनॉल मिश्रण के खिलाफ अभियान तेज हो गया है, जबकि ज़मीनी अनुभव इसके उलट है।' यह आँकड़े मंत्री के अपने बयान पर आधारित हैं और स्वतंत्र रूप से सत्यापित नहीं किए गए हैं।
ऊर्जा सुरक्षा और किसानों का सवाल
मंत्री ने ई20 कार्यक्रम को भारत की ऊर्जा सुरक्षा से जोड़ते हुए कहा कि भारत अपनी कच्चे तेल की ज़रूरत का 85 प्रतिशत से अधिक आयात करता है और वैश्विक तेल माँग में वृद्धि का करीब 30 प्रतिशत हिस्सा भारत से आता है। उन्होंने तर्क दिया कि पेट्रोल में मिलाया जाने वाला प्रत्येक लीटर एथेनॉल — कच्चे तेल का आयात घटाता है, वायु प्रदूषण कम करता है, विदेशी मुद्रा बचाता है और किसानों को आय का अतिरिक्त स्रोत देता है। पुरी ने कहा कि एथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम ने देश के 'अन्नदाता' किसानों को 'ऊर्जादाता' बनाने का काम किया है।
राजनीतिक आरोप और कांग्रेस का संदर्भ
पुरी ने यह भी रेखांकित किया कि एथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम की नींव पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में रखी गई थी। उन्होंने कहा कि ऐसे में अब इसके विस्तार का विरोध 'राजनीतिक कारणों से प्रेरित प्रतीत होता है।' आलोचकों ने इस आरोप पर अभी तक कोई औपचारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है।
आगे की राह
ई85 के लॉन्च के साथ फ्लेक्स-फ्यूल तकनीक को बढ़ावा देना सरकार की दीर्घकालिक ऊर्जा रणनीति का हिस्सा है, जिसका लक्ष्य भू-राजनीतिक उथल-पुथल और वैश्विक तेल कीमतों के उतार-चढ़ाव से भारत को अधिक सुरक्षित बनाना है। ई20 विवाद का अंतिम फैसला तकनीकी साक्ष्य और उपभोक्ता अनुभव के आधार पर ही होगा।