कोझिकोड रेलवे स्टेशन का 130 साल पुराना क्लॉक टावर ढहा, प्लेटफॉर्म-2 पर मलबा; बड़ा हादसा टला
सारांश
मुख्य बातें
केरल के कोझिकोड रेलवे स्टेशन पर 9 जुलाई 2026 की सुबह करीब 130 वर्ष पुराना ऐतिहासिक क्लॉक टावर अचानक भरभराकर गिर गया। टावर का भारी मलबा प्लेटफॉर्म नंबर-2 और ओवरहेड बिजली लाइनों पर आ गिरा। सौभाग्यवश, उस समय प्लेटफॉर्म पर कोई यात्री मौजूद नहीं था, जिससे बड़ी जनहानि टल गई।
घटना का विवरण
यह हादसा गुरुवार की सुबह हुआ जब प्लेटफॉर्म नंबर-2 और 3 के बीच स्थित क्लॉक टावर का एक बड़ा हिस्सा और उसकी छत एक साथ ढह गई। उस समय टावर के निकट तैनात रेलवे कर्मचारियों ने इमारत को गिरते देखा और तत्काल वहाँ से हट गए — उनकी सतर्कता ने उन्हें बचा लिया।
कोझिकोड-कन्नूर पैसेंजर ट्रेन, जो दोपहर 2:05 बजे रवाना होने वाली थी, उस समय प्लेटफॉर्म नंबर-2 पर खड़ी थी। चूँकि ट्रेन के दरवाजे बंद थे और यात्रियों की चढ़ाई अभी शुरू नहीं हुई थी, इसलिए एक संभावित बड़ी दुर्घटना टल गई।
ट्रेन संचालन पर असर
मलबे की चपेट में आने से ओवरहेड बिजली लाइनें क्षतिग्रस्त हो गईं, जिससे ट्रेन परिचालन बाधित हुआ। मंगलुरु-तिरुवनंतपुरम एरानाड एक्सप्रेस को देरी का सामना करना पड़ा। एहतियात के तौर पर रेलवे ने प्लेटफॉर्म नंबर-2 और 3 को यात्रियों के लिए बंद कर दिया और पूरे प्रभावित क्षेत्र को खाली करा लिया। स्टेशन पर हाई अलर्ट घोषित कर दिया गया है।
गिरावट के संभावित कारण
रेलवे अधिकारियों के अनुसार, पिछले कई दिनों से कोझिकोड में हो रही लगातार भारी बारिश ने इस पुरानी इमारत की नींव को कमज़ोर कर दिया था। गुरुवार सुबह भी तेज़ बारिश जारी थी। इमारत में पहले से दरारें दिखाई दे रही थीं और उम्र के कारण इसकी संरचनात्मक स्थिति काफी जर्जर हो चुकी थी।
गौरतलब है कि स्टेशन पर इन दिनों पुनर्विकास कार्य चल रहा है, जिसमें पाइलिंग का काम भी शामिल है। आलोचकों का कहना है कि इन निर्माण कार्यों से उत्पन्न कंपन (वाइब्रेशन) ने पहले से जर्जर ढाँचे को और कमज़ोर किया। बार-बार चेतावनियाँ मिलने के बावजूद समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए।
राजनीतिक प्रतिक्रिया और सुरक्षा ऑडिट की माँग
स्थानीय विधायक मोहम्मद रियास ने पूरे कोझिकोड रेलवे स्टेशन का व्यापक सुरक्षा ऑडिट कराने की माँग की है। उन्होंने कहा कि हाल ही में डिविजनल रेलवे मैनेजर (DRM) ने भी इस स्थल का दौरा किया था और ऐतिहासिक इमारत की खराब हालत की जानकारी अधिकारियों को पहले से थी। इसके बावजूद न तो प्रभावी सुरक्षा उपाय किए गए और न ही लोगों की आवाजाही पर रोक लगाई गई। उन्होंने कहा कि यह केवल सौभाग्य की बात है कि इस हादसे में किसी की जान नहीं गई।
रेलवे अधिकारियों को आशंका है कि क्लॉक टावर का बचा हुआ हिस्सा भी अस्थिर हो सकता है। प्रभावित क्षेत्र को पूरी तरह घेर दिया गया है और जब तक ढाँचे को सुरक्षित घोषित नहीं किया जाता, तब तक वहाँ आम लोगों के प्रवेश पर रोक रहेगी।
क्या होगा आगे
यह घटना देश भर के रेलवे स्टेशनों पर मौजूद औपनिवेशिक युग की विरासत इमारतों की संरचनात्मक सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े करती है। यह ऐसे समय में आई है जब भारतीय रेलवे आधुनिकीकरण और पुनर्विकास की बड़ी परियोजनाओं पर काम कर रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि पुनर्विकास कार्यों के दौरान पुरानी इमारतों की संरचनात्मक जाँच अनिवार्य की जानी चाहिए।