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वैश्विक तेल संकट के बीच, सरकार का फ्लेक्स फ्यूल वाहनों को बढ़ावा देने का बड़ा कदम

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वैश्विक तेल संकट के बीच, सरकार का फ्लेक्स फ्यूल वाहनों को बढ़ावा देने का बड़ा कदम

सारांश

वैश्विक तेल संकट के कारण भारत सरकार फ्लेक्स फ्यूल वाहनों को प्रोत्साहित करने के लिए महत्वपूर्ण कदम उठा रही है। इसका उद्देश्य एथेनॉल के उपयोग को बढ़ाना और तेल आयात पर निर्भरता को कम करना है।

मुख्य बातें

सरकार का लक्ष्य: फ्लेक्स फ्यूल वाहनों को बढ़ावा देना।
एथेनॉल का उपयोग: ट्रांसपोर्ट सेक्टर में एथेनॉल के इस्तेमाल को बढ़ाना।
बैठक का उद्देश्य: एफएफवी अपनाने के लिए रोडमैप तैयार करना।
ऊर्जा सुरक्षा: भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करना।
ई20 कार्यक्रम: पेट्रोल में 20 प्रतिशत एथेनॉल मिलाना।

नई दिल्ली, 20 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। वैश्विक तेल बाजार में मिडिल ईस्ट के संकट के कारण उत्पन्न हुई अनिश्चितता के बीच, सरकार अब फ्लेक्स फ्यूल वाहनों (एफएफवी) को प्रोत्साहित करने के लिए तेजी से कदम उठा रही है। इसका मुख्य उद्देश्य ट्रांसपोर्ट सेक्टर में एथेनॉल के प्रयोग को बढ़ावा देना और तेल आयात पर निर्भरता को कम करना है।

विश्वसनीय जानकारी के अनुसार, पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय (एमओपीएनजी) इस विषय पर एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित करने जा रहा है, जिसमें भारत में एफएफवी को अपनाने के लिए एक रोडमैप तैयार किया जाएगा।

इस बैठक की अध्यक्षता पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव करेंगे, और इसमें भारतीय तेल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम जैसी तेल विपणन कंपनियों (ओएमसी), ऑटोमोबाइल कंपनियों और अन्य संबंधित पक्षों के प्रतिनिधि शामिल होंगे।

बैठक में नियमों के आगे बढ़ते हुए ईंधन में एथेनॉल मिलाने (ब्लेंडिंग) के लिए आवश्यक नीतियों पर चर्चा होने की संभावना है।

वर्तमान में, भारत में ई20 कार्यक्रम लागू है, जिसमें पेट्रोल में 20 प्रतिशत एथेनॉल मिलाया जाता है। अब सरकार ऐसे फ्लेक्स फ्यूल वाहनों को प्रोत्साहित करने पर विचार कर रही है, जो 85 प्रतिशत तक एथेनॉल मिश्रण का उपयोग कर सकें।

सरकार का यह कदम ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने के लिए उठाया जा रहा है, क्योंकि भारत अपनी आवश्यकता का 85 प्रतिशत से अधिक कच्चा तेल आयात करता है। इस तरह, वैश्विक बाजार में उतार-चढ़ाव का सीधा प्रभाव देश की अर्थव्यवस्था पर पड़ता है।

इसके अतिरिक्त, सरकार ने पेट्रोल में 20 प्रतिशत एथेनॉल मिलाने का लक्ष्य पहले 2030 तक रखा था, जिसे अब 2025-26 कर दिया गया है।

सरकार एथेनॉल ब्लेंडेड पेट्रोल (ईबीपी) कार्यक्रम के तहत पेट्रोल में एथेनॉल मिलाकर बेचने को प्रोत्साहित कर रही है, जिसमें सरकारी तेल कंपनियां महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।

एथेनॉल उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने कई कदम उठाए हैं। इसमें कच्चे माल (फीडस्टॉक) का दायरा बढ़ाना और एथेनॉल संयंत्रों के आसपास मक्का उत्पादन बढ़ाने के लिए क्लस्टर विकसित करना शामिल है।

इसके अलावा, सरकार ने फूड कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (एफसीआई) के अतिरिक्त चावल में से 52 लाख मीट्रिक टन चावल एथेनॉल उत्पादन के लिए देने की स्वीकृति दी है। साथ ही, 2024-25 के लिए 40 लाख मीट्रिक टन चीनी को भी एथेनॉल उत्पादन के लिए डायवर्ट करने की अनुमति दी गई है।

एथेनॉल उत्पादन एवं सप्लाई को प्रोत्साहित करने के लिए सरकार ने एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल (ईबीपी) कार्यक्रम के तहत एथेनॉल की खरीद के लिए तय कीमत लागू की है और एथेनॉल पर जीएसटी दर को घटाकर 5 प्रतिशत कर दिया है।

संपादकीय दृष्टिकोण

तो इससे तेल आयात पर निर्भरता कम होने के साथ-साथ पर्यावरण पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।
RashtraPress
30 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

फ्लेक्स फ्यूल वाहन क्या होते हैं?
फ्लेक्स फ्यूल वाहन ऐसे वाहन होते हैं जो पेट्रोल और एथेनॉल दोनों प्रकार के ईंधन का उपयोग कर सकते हैं।
भारत में एथेनॉल का उपयोग क्यों बढ़ाया जा रहा है?
भारत में एथेनॉल का उपयोग बढ़ाने का मुख्य कारण तेल आयात पर निर्भरता कम करना और ऊर्जा सुरक्षा को सुदृढ़ करना है।
ई20 कार्यक्रम क्या है?
ई20 कार्यक्रम के तहत, पेट्रोल में 20 प्रतिशत एथेनॉल मिलाया जाता है।
सरकार एथेनॉल उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए क्या कदम उठा रही है?
सरकार एथेनॉल उत्पादन के लिए कच्चे माल का दायरा बढ़ाने और एथेनॉल संयंत्रों के आसपास कृषि क्लस्टर विकसित करने जैसे कदम उठा रही है।
क्या फ्लेक्स फ्यूल वाहनों से पर्यावरण को लाभ होगा?
जी हाँ, फ्लेक्स फ्यूल वाहनों के उपयोग से पर्यावरण पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा, क्योंकि एथेनॉल एक नवीकरणीय ऊर्जा स्रोत है।
राष्ट्र प्रेस
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