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ई20 पेट्रोल से ₹1.90 लाख करोड़ की विदेशी मुद्रा बची, एथेनॉल ब्लेंडिंग अब वैश्विक मानक: सरकारी फैक्टशीट

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ई20 पेट्रोल से ₹1.90 लाख करोड़ की विदेशी मुद्रा बची, एथेनॉल ब्लेंडिंग अब वैश्विक मानक: सरकारी फैक्टशीट

सारांश

₹1.90 लाख करोड़ की विदेशी मुद्रा बचत, किसानों को ₹1.6 लाख करोड़ अतिरिक्त आय और 930 लाख मीट्रिक टन कम कार्बन उत्सर्जन — सरकार की फैक्टशीट बताती है कि एथेनॉल ब्लेंडिंग अब सिर्फ नीतिगत प्रयोग नहीं, बल्कि अमेरिका, ब्राज़ील और जापान जैसे देशों की तरह भारत की ऊर्जा रणनीति की रीढ़ बन रही है।

मुख्य बातें

2014-15 से मई 2026 के बीच EBP कार्यक्रम से ₹1.90 लाख करोड़ से अधिक की विदेशी मुद्रा बची।
310 लाख मीट्रिक टन आयातित कच्चे तेल की जगह घरेलू एथेनॉल का उपयोग किया गया।
किसानों को ₹1.6 लाख करोड़ से अधिक की अतिरिक्त आय हुई।
कार्बन उत्सर्जन में 930 लाख मीट्रिक टन से अधिक की कमी आई।
भारत अपनी कच्चे तेल की ज़रूरत का लगभग 88.5% आयात करता है — एथेनॉल इस निर्भरता को घटाने का प्रमुख साधन।
अमेरिका (ई10/ई15), ब्राज़ील (ई27) और जापान समेत दर्जनों देश एथेनॉल ब्लेंडिंग अपना चुके हैं।

केंद्र सरकार द्वारा 5 जुलाई 2026 को जारी फैक्टशीट के अनुसार, एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल (EBP) कार्यक्रम ने 2014-15 से मई 2026 के बीच भारत की विदेशी मुद्रा में ₹1.90 लाख करोड़ से अधिक की बचत की है और किसानों को ₹1.6 लाख करोड़ से अधिक की अतिरिक्त आय दिलाई है। इस अवधि में 310 लाख मीट्रिक टन आयातित कच्चे तेल की जगह घरेलू एथेनॉल का उपयोग किया गया, जिससे 930 लाख मीट्रिक टन से अधिक कार्बन उत्सर्जन में भी कमी आई।

भारत के लिए एथेनॉल ब्लेंडिंग क्यों ज़रूरी है

फैक्टशीट में रेखांकित किया गया है कि भारत अपनी कच्चे तेल की ज़रूरत का लगभग 88.5 प्रतिशत आयात पर निर्भर है। इसका मतलब है कि अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में कीमतों के उतार-चढ़ाव और आपूर्ति में अचानक आने वाली रुकावटें सीधे देश की अर्थव्यवस्था को प्रभावित करती हैं। यह ऐसे समय में अहम है जब वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव ऊर्जा सुरक्षा को नीति-निर्माण के केंद्र में ला चुके हैं।

फैक्टशीट के अनुसार, भारतीय गन्ने, मक्के और चावल से तैयार एथेनॉल इस ऊर्जा-निर्भरता को घटाने का एक व्यावहारिक विकल्प है, क्योंकि यह पूरी तरह घरेलू कृषि संसाधनों पर आधारित है।

वैश्विक परिदृश्य: अमेरिका, ब्राज़ील और जापान भी इसी राह पर

फैक्टशीट में यह भी स्पष्ट किया गया है कि एथेनॉल ब्लेंडिंग कोई भारत-विशिष्ट प्रयोग नहीं, बल्कि दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में पहले से स्थापित प्रथा है।

अमेरिका में ई10 पूरे देश में मानक ईंधन है, जबकि सरकारी समर्थन से ई15 का उपयोग तेज़ी से बढ़ रहा है। लाखों वाहन पहले से ई85 तक के फ्लेक्स-फ्यूल ब्लेंड पर चलने में सक्षम हैं।

ब्राज़ील एथेनॉल उपयोग में विश्व में अग्रणी है। वहाँ मानक पेट्रोल ब्लेंड के रूप में ई27 अनिवार्य है और इसे बढ़ाकर लगभग 35 प्रतिशत किए जाने की योजना है। बेची जाने वाली 80 प्रतिशत से अधिक नई कारें फ्लेक्स-फ्यूल वाहन हैं, जो ई27, ई30 या शुद्ध हाइड्रस एथेनॉल पर चल सकती हैं।

जापान ने चरणबद्ध तरीके से ई10 को लागू कर अपने ईंधन मिश्रण में एथेनॉल को शामिल किया है। इसके अलावा, कनाडा, थाईलैंड और कई यूरोपीय देशों ने भी अपनी स्वच्छ ईंधन रणनीतियों के तहत एथेनॉल ब्लेंडिंग को अपनाया है।

किसानों और पर्यावरण पर असर

गौरतलब है कि EBP कार्यक्रम का लाभ केवल ऊर्जा सुरक्षा तक सीमित नहीं है। ₹1.6 लाख करोड़ से अधिक की अतिरिक्त आय सीधे उन किसानों तक पहुँची है जो गन्ना, मक्का और चावल उगाते हैं। साथ ही, 930 लाख मीट्रिक टन से अधिक कार्बन उत्सर्जन में कटौती भारत की जलवायु प्रतिबद्धताओं को भी मज़बूत करती है।

आगे की दिशा

केंद्र सरकार की यह फैक्टशीट ऐसे समय में आई है जब ई20 यानी 20 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल के विस्तार को लेकर नीतिगत बहस तेज़ है। सरकार का लक्ष्य एथेनॉल ब्लेंडिंग को और बढ़ाकर आयात निर्भरता को और कम करना है — हालाँकि इसके लिए वाहन उद्योग में फ्लेक्स-फ्यूल तकनीक का व्यापक प्रसार और कृषि आपूर्ति श्रृंखला की मज़बूती भी ज़रूरी होगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसे संदर्भ में देखना ज़रूरी है — यह बचत एक दशक से अधिक की अवधि में हुई है, जबकि इसी दौरान कच्चे तेल के आयात पर कुल खर्च कई गुना अधिक रहा है। असली सवाल यह है कि ई20 से ई30 या उससे आगे जाने के लिए भारत के वाहन बेड़े और कृषि आपूर्ति श्रृंखला को किस पैमाने पर तैयार किया जाएगा। ब्राज़ील का मॉडल प्रेरक है, लेकिन वहाँ फ्लेक्स-फ्यूल वाहन नीति दशकों पुरानी है। भारत में यह संक्रमण बिना वाहन उद्योग की समानांतर तैयारी के अधूरा रहेगा।
RashtraPress
6 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

एथेनॉल ब्लेंडिंग प्रोग्राम से भारत को कितनी विदेशी मुद्रा बची?
सरकारी फैक्टशीट के अनुसार, 2014-15 से मई 2026 के बीच EBP कार्यक्रम से ₹1.90 लाख करोड़ से अधिक की विदेशी मुद्रा बची, क्योंकि 310 लाख मीट्रिक टन आयातित कच्चे तेल की जगह घरेलू एथेनॉल का उपयोग किया गया।
एथेनॉल ब्लेंडिंग से किसानों को क्या फायदा हुआ?
फैक्टशीट के अनुसार, इसी अवधि में गन्ना, मक्का और चावल उगाने वाले किसानों को ₹1.6 लाख करोड़ से अधिक की अतिरिक्त आय हुई, क्योंकि एथेनॉल उत्पादन के लिए इन फसलों की माँग बढ़ी।
ई20 पेट्रोल क्या होता है?
ई20 पेट्रोल वह ईंधन है जिसमें 20 प्रतिशत एथेनॉल और 80 प्रतिशत पेट्रोल का मिश्रण होता है। यह कच्चे तेल की आयात निर्भरता घटाने, कार्बन उत्सर्जन कम करने और घरेलू कृषि संसाधनों के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए भारत सरकार की ऊर्जा नीति का हिस्सा है।
क्या दूसरे देश भी एथेनॉल ब्लेंडिंग करते हैं?
हाँ, अमेरिका में ई10 मानक ईंधन है और ई15 का विस्तार हो रहा है; ब्राज़ील में ई27 अनिवार्य है और इसे 35% तक बढ़ाने की योजना है; जापान ने चरणबद्ध तरीके से ई10 लागू किया है। कनाडा, थाईलैंड और कई यूरोपीय देश भी एथेनॉल ब्लेंडिंग अपना चुके हैं।
एथेनॉल ब्लेंडिंग से पर्यावरण को क्या लाभ हुआ?
सरकारी फैक्टशीट के अनुसार, 2014-15 से मई 2026 के बीच एथेनॉल ब्लेंडिंग कार्यक्रम से 930 लाख मीट्रिक टन से अधिक कार्बन उत्सर्जन में कमी आई है, जो भारत की जलवायु प्रतिबद्धताओं के अनुरूप है।
राष्ट्र प्रेस
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