कच्चे तेल पर निर्भरता घटाने के लिए भारत का सौर, पवन और हाइड्रोजन पर बड़ा दांव: पूर्व बीपीसीएल CMD गोपालन
सारांश
मुख्य बातें
भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (BPCL) के पूर्व चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक कृष्णकुमार गोपालन ने 25 मई 2026 को नई दिल्ली में कहा कि केंद्र सरकार की एथेनॉल मिश्रण नीति और नवीकरणीय ऊर्जा को दिया जा रहा बढ़ावा देश की कच्चे तेल पर अत्यधिक निर्भरता को कम करने में निर्णायक भूमिका निभाएगा। गोपालन के अनुसार, भारत अपनी कुल कच्चे तेल की जरूरत का करीब 85 प्रतिशत विदेशों से आयात करता है, जो वैश्विक मूल्य उतार-चढ़ाव के प्रति देश की अर्थव्यवस्था को संवेदनशील बनाता है।
एथेनॉल मिश्रण: निर्भरता घटाने की पहली कड़ी
गोपालन ने बताया कि सरकार ने इस चुनौती को पहचानते हुए पेट्रोल में 20 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रण की नीति लागू की। उन्होंने कहा, 'यह हमारी निर्भरता कम करने की दिशा में उठाया गया पहला कदम है।' यह कदम न केवल आयात बिल को घटाता है, बल्कि घरेलू कृषि क्षेत्र — विशेषकर गन्ना और मक्का उत्पादकों — के लिए भी आय का नया स्रोत खोलता है।
सौर, पवन और हाइड्रोजन: ऊर्जा बदलाव की नई राह
गोपालन ने स्पष्ट किया कि ऊर्जा परिवर्तन की दिशा में दूसरा अहम कदम नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों का विस्तार है। उनके शब्दों में, 'हमने रिन्यूएबल एनर्जी सोर्स को बढ़ाने के प्रयास किए हैं, चाहे वह सौर ऊर्जा हो, पवन ऊर्जा हो या हाइड्रोजन। हम हाइड्रोजन रिटेल आउटलेट्स पर भी विचार कर रहे हैं।' यह ऐसे समय में आया है जब भारत 2030 तक 500 गीगावॉट नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता के अपने राष्ट्रीय लक्ष्य की ओर तेज़ी से बढ़ रहा है।
ईंधन आपूर्ति प्रबंधन: तेल कंपनियों का योगदान
पूर्व बीपीसीएल प्रमुख ने वैश्विक अनिश्चितता के बावजूद तेल विपणन कंपनियों (OMCs) की भूमिका की सराहना की। उन्होंने कहा, 'स्थानीय संकटों को छोड़कर शायद ही कभी ईंधन की कमी हुई हो और मुझे लगता है कि तेल कंपनियों ने आपूर्ति प्रबंधन में सराहनीय काम किया है।' गौरतलब है कि रूस-यूक्रेन युद्ध और मध्य-पूर्व तनाव के बीच वैश्विक आपूर्ति शृंखलाएँ बाधित होने के बावजूद भारत में ईंधन की उपलब्धता बड़े पैमाने पर बनी रही।
अंडर-रिकवरी का बोझ और कच्चे तेल की गिरती कीमतें
ईंधन मूल्य निर्धारण पर गोपालन ने खुलासा किया कि वर्तमान में पेट्रोल पर अंडर-रिकवरी लगभग ₹13 से ₹14 प्रति लीटर और डीजल पर लगभग ₹38 प्रति लीटर है — यानी तेल कंपनियाँ बाज़ार भाव से कम पर ईंधन बेच रही हैं। हालाँकि, उन्होंने राहत की उम्मीद भी जताई। उनके अनुसार, 'कच्चे तेल की कीमतें गिरने लगी हैं, बातचीत के सफल होने के सकारात्मक संकेत मिल रहे हैं और अगर ऐसा होता है, तो यह बहुत बड़ी राहत होगी — ज़्यादा बढ़ोतरी की जरूरत नहीं पड़ेगी जिससे नुकसान की भरपाई हो सके।'
आगे की राह
विशेषज्ञों का मानना है कि हाइड्रोजन रिटेल आउटलेट्स की संभावित शुरुआत भारत के ऊर्जा खुदरा परिदृश्य में एक नया अध्याय जोड़ सकती है। यदि कच्चे तेल की अंतरराष्ट्रीय कीमतें नरम रहती हैं और एथेनॉल मिश्रण का लक्ष्य समय पर पूरा होता है, तो आने वाले वर्षों में भारत की ऊर्जा आयात निर्भरता में उल्लेखनीय कमी संभव है।