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कच्चे तेल पर निर्भरता घटाने के लिए भारत का सौर, पवन और हाइड्रोजन पर बड़ा दांव: पूर्व बीपीसीएल CMD गोपालन

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कच्चे तेल पर निर्भरता घटाने के लिए भारत का सौर, पवन और हाइड्रोजन पर बड़ा दांव: पूर्व बीपीसीएल CMD गोपालन

सारांश

भारत की 85% कच्चे तेल की आयात निर्भरता एक पुरानी आर्थिक कमज़ोरी है — और बीपीसीएल के पूर्व CMD गोपालन के अनुसार, एथेनॉल मिश्रण, सौर, पवन और हाइड्रोजन की तिकड़ी इसे बदलने की असली चाबी है। पेट्रोल पर ₹13-14 और डीजल पर ₹38 प्रति लीटर अंडर-रिकवरी के बीच, कच्चे तेल की गिरती कीमतें अभी की सबसे बड़ी राहत हो सकती हैं।

मुख्य बातें

भारत अपनी कुल कच्चे तेल की जरूरत का 85 प्रतिशत विदेशों से आयात करता है, जो अर्थव्यवस्था को वैश्विक मूल्य उतार-चढ़ाव के प्रति संवेदनशील बनाता है।
सरकार ने पेट्रोल में 20 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रण की नीति लागू की है — यह आयात निर्भरता घटाने का पहला ठोस कदम।
बीपीसीएल के पूर्व CMD कृष्णकुमार गोपालन के अनुसार सौर, पवन और हाइड्रोजन ऊर्जा विस्तार दूसरी प्रमुख रणनीति है; हाइड्रोजन रिटेल आउटलेट्स पर भी विचार जारी है।
पेट्रोल पर अंडर-रिकवरी लगभग ₹13-14 प्रति लीटर और डीजल पर लगभग ₹38 प्रति लीटर है।
गोपालन ने कहा कि कच्चे तेल की कीमतें गिरने के संकेत मिल रहे हैं, जिससे तेल कंपनियों को बड़ी राहत मिल सकती है।

भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (BPCL) के पूर्व चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक कृष्णकुमार गोपालन ने 25 मई 2026 को नई दिल्ली में कहा कि केंद्र सरकार की एथेनॉल मिश्रण नीति और नवीकरणीय ऊर्जा को दिया जा रहा बढ़ावा देश की कच्चे तेल पर अत्यधिक निर्भरता को कम करने में निर्णायक भूमिका निभाएगा। गोपालन के अनुसार, भारत अपनी कुल कच्चे तेल की जरूरत का करीब 85 प्रतिशत विदेशों से आयात करता है, जो वैश्विक मूल्य उतार-चढ़ाव के प्रति देश की अर्थव्यवस्था को संवेदनशील बनाता है।

एथेनॉल मिश्रण: निर्भरता घटाने की पहली कड़ी

गोपालन ने बताया कि सरकार ने इस चुनौती को पहचानते हुए पेट्रोल में 20 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रण की नीति लागू की। उन्होंने कहा, 'यह हमारी निर्भरता कम करने की दिशा में उठाया गया पहला कदम है।' यह कदम न केवल आयात बिल को घटाता है, बल्कि घरेलू कृषि क्षेत्र — विशेषकर गन्ना और मक्का उत्पादकों — के लिए भी आय का नया स्रोत खोलता है।

सौर, पवन और हाइड्रोजन: ऊर्जा बदलाव की नई राह

गोपालन ने स्पष्ट किया कि ऊर्जा परिवर्तन की दिशा में दूसरा अहम कदम नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों का विस्तार है। उनके शब्दों में, 'हमने रिन्यूएबल एनर्जी सोर्स को बढ़ाने के प्रयास किए हैं, चाहे वह सौर ऊर्जा हो, पवन ऊर्जा हो या हाइड्रोजन। हम हाइड्रोजन रिटेल आउटलेट्स पर भी विचार कर रहे हैं।' यह ऐसे समय में आया है जब भारत 2030 तक 500 गीगावॉट नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता के अपने राष्ट्रीय लक्ष्य की ओर तेज़ी से बढ़ रहा है।

ईंधन आपूर्ति प्रबंधन: तेल कंपनियों का योगदान

पूर्व बीपीसीएल प्रमुख ने वैश्विक अनिश्चितता के बावजूद तेल विपणन कंपनियों (OMCs) की भूमिका की सराहना की। उन्होंने कहा, 'स्थानीय संकटों को छोड़कर शायद ही कभी ईंधन की कमी हुई हो और मुझे लगता है कि तेल कंपनियों ने आपूर्ति प्रबंधन में सराहनीय काम किया है।' गौरतलब है कि रूस-यूक्रेन युद्ध और मध्य-पूर्व तनाव के बीच वैश्विक आपूर्ति शृंखलाएँ बाधित होने के बावजूद भारत में ईंधन की उपलब्धता बड़े पैमाने पर बनी रही।

अंडर-रिकवरी का बोझ और कच्चे तेल की गिरती कीमतें

ईंधन मूल्य निर्धारण पर गोपालन ने खुलासा किया कि वर्तमान में पेट्रोल पर अंडर-रिकवरी लगभग ₹13 से ₹14 प्रति लीटर और डीजल पर लगभग ₹38 प्रति लीटर है — यानी तेल कंपनियाँ बाज़ार भाव से कम पर ईंधन बेच रही हैं। हालाँकि, उन्होंने राहत की उम्मीद भी जताई। उनके अनुसार, 'कच्चे तेल की कीमतें गिरने लगी हैं, बातचीत के सफल होने के सकारात्मक संकेत मिल रहे हैं और अगर ऐसा होता है, तो यह बहुत बड़ी राहत होगी — ज़्यादा बढ़ोतरी की जरूरत नहीं पड़ेगी जिससे नुकसान की भरपाई हो सके।'

आगे की राह

विशेषज्ञों का मानना है कि हाइड्रोजन रिटेल आउटलेट्स की संभावित शुरुआत भारत के ऊर्जा खुदरा परिदृश्य में एक नया अध्याय जोड़ सकती है। यदि कच्चे तेल की अंतरराष्ट्रीय कीमतें नरम रहती हैं और एथेनॉल मिश्रण का लक्ष्य समय पर पूरा होता है, तो आने वाले वर्षों में भारत की ऊर्जा आयात निर्भरता में उल्लेखनीय कमी संभव है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि 20% एथेनॉल मिश्रण का लक्ष्य अब तक कितने राज्यों में पूरी तरह लागू हुआ है और हाइड्रोजन रिटेल की 'विचार' अवस्था कब जमीन पर उतरेगी। डीजल पर ₹38 प्रति लीटर की अंडर-रिकवरी यह भी बताती है कि ऊर्जा परिवर्तन की राजनीतिक अर्थव्यवस्था अभी भी सब्सिडी की बैसाखी पर टिकी है। जब तक ईंधन मूल्य निर्धारण में पारदर्शिता और बाज़ार-आधारित सुधार नहीं होते, नवीकरणीय ऊर्जा की घोषणाएँ आंशिक समाधान ही रहेंगी।
RashtraPress
9 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारत कच्चे तेल की आयात निर्भरता कम करने के लिए क्या कदम उठा रहा है?
भारत सरकार पेट्रोल में 20 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रण और सौर, पवन तथा हाइड्रोजन जैसे नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों के विस्तार के ज़रिए कच्चे तेल की आयात निर्भरता घटाने की कोशिश कर रही है। बीपीसीएल के पूर्व CMD कृष्णकुमार गोपालन के अनुसार, हाइड्रोजन रिटेल आउटलेट्स पर भी विचार जारी है।
भारत कितना कच्चा तेल विदेशों से आयात करता है?
बीपीसीएल के पूर्व CMD कृष्णकुमार गोपालन के अनुसार भारत अपनी कुल कच्चे तेल की जरूरत का करीब 85 प्रतिशत विदेशों से आयात करता है। यह उच्च आयात निर्भरता देश की अर्थव्यवस्था को वैश्विक तेल कीमतों के उतार-चढ़ाव के प्रति संवेदनशील बनाती है।
पेट्रोल और डीजल पर अंडर-रिकवरी कितनी है?
गोपालन के अनुसार, वर्तमान में पेट्रोल पर अंडर-रिकवरी लगभग ₹13 से ₹14 प्रति लीटर और डीजल पर लगभग ₹38 प्रति लीटर है। इसका अर्थ है कि तेल कंपनियाँ बाज़ार लागत से कम कीमत पर ईंधन बेच रही हैं और यह अंतर वे स्वयं वहन कर रही हैं।
एथेनॉल मिश्रण नीति से क्या फायदा होगा?
पेट्रोल में 20 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रण से कच्चे तेल का आयात बिल घटेगा और घरेलू कृषि क्षेत्र — विशेषकर गन्ना और मक्का उत्पादकों — को अतिरिक्त आय मिलेगी। यह नीति ऊर्जा सुरक्षा और किसान आय दोनों मोर्चों पर एक साथ काम करती है।
भारत में हाइड्रोजन ऊर्जा की क्या स्थिति है?
गोपालन ने संकेत दिया कि तेल कंपनियाँ हाइड्रोजन रिटेल आउटलेट्स पर विचार कर रही हैं, हालाँकि यह अभी योजना के स्तर पर है। भारत के 2030 तक 500 गीगावॉट नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता के लक्ष्य के साथ हाइड्रोजन को दीर्घकालिक ऊर्जा परिवर्तन की एक प्रमुख कड़ी माना जा रहा है।
राष्ट्र प्रेस
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