देश में पेट्रोल-डीजल की कोई कमी नहीं, BPCL मार्केटिंग डायरेक्टर ने दी जानकारी; रोज़ ₹600-700 करोड़ का नुकसान
सारांश
मुख्य बातें
भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (BPCL) के मार्केटिंग डायरेक्टर सुखमाल कुमार जैन ने 24 मई को स्पष्ट किया कि देश में पेट्रोल और डीजल की कोई कमी नहीं है और सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियाँ बिना किसी व्यवधान के ईंधन आपूर्ति का प्रबंधन कर रही हैं। यह बयान ऐसे समय में आया है जब वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में अस्थिरता और मध्य पूर्व में जारी तनाव के बीच ईंधन आपूर्ति को लेकर चिंताएँ बढ़ी हैं।
ईंधन आपूर्ति की मौजूदा स्थिति
जैन ने बताया कि देश में मौजूद करीब एक लाख फ्यूल पंपों में से 85,000 का संचालन सरकारी तेल कंपनियों द्वारा किया जाता है और इन सभी पर ईंधन की आपूर्ति सामान्य बनी हुई है। उन्होंने कहा, 'अन्य कई कारणों से छिटपुट मामले हो सकते हैं, लेकिन मेरी जानकारी के अनुसार देश में ईंधन की कोई कमी नहीं है।'
वैश्विक अस्थिरता का तेल कंपनियों पर असर
बाज़ार की मौजूदा स्थिति पर टिप्पणी करते हुए जैन ने कहा कि वैश्विक कच्चे तेल की कीमतें, शिपिंग लागत, बीमा खर्च और विनिमय दरों में उतार-चढ़ाव ने तेल कंपनियों पर भारी दबाव डाला है। उन्होंने बताया, 'मौजूदा समय में स्थिति बेहद अस्थिर है और इसके कई पहलू हैं। अगर आपने कच्चे तेल, शिपिंग लागत, बीमा और यहाँ तक कि विनिमय दरों में आए बदलावों को ध्यान से देखा है, तो आप समझ जाएंगे।'
जैन के अनुसार, विनिमय दरें जो पहले लगभग 89-90 के स्तर पर थीं, अब 96 के आसपास पहुँच गई हैं, जिससे तेल विपणन कंपनियों पर वित्तीय बोझ और बढ़ गया है।
प्रतिदिन ₹600-700 करोड़ का नुकसान
इन सभी कारकों के संयुक्त प्रभाव के कारण, सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियाँ वर्तमान में प्रतिदिन ₹600 करोड़ से ₹700 करोड़ तक का नुकसान उठा रही हैं। इसके बावजूद, जैन ने ज़ोर देकर कहा कि ये कंपनियाँ पूरे देश में निर्बाध ईंधन आपूर्ति सुनिश्चित करना जारी रखे हुए हैं।
रूसी कच्चे तेल की हिस्सेदारी में उल्लेखनीय वृद्धि
BPCL के डायरेक्टर फाइनेंस वी.आर.के. गुप्ता ने बताया कि मध्य पूर्व संकट के बीच कंपनी ने रूस से कच्चे तेल की खरीद बढ़ाई है। वित्त वर्ष 26 की तीसरी तिमाही (अक्टूबर-दिसंबर 2025) में रूसी कच्चे तेल की हिस्सेदारी कुल आयात में 25 प्रतिशत थी, जो चौथी तिमाही (जनवरी-मार्च) में बढ़कर 31 प्रतिशत हो गई और अब वर्तमान में 41 प्रतिशत के स्तर पर पहुँच गई है।
गुप्ता ने कहा कि मध्य पूर्व में तनाव के चलते कंपनी ने विविध स्रोतों — विशेषकर रूस — से कच्चे तेल की खरीद को बढ़ाया है, जो आपूर्ति सुरक्षा की दिशा में एक रणनीतिक कदम है।
आगे की राह
वैश्विक ऊर्जा बाज़ारों में जारी अनिश्चितता के बीच सरकारी तेल कंपनियों पर वित्तीय दबाव बने रहने की संभावना है। विशेषज्ञों का मानना है कि विनिमय दरों और शिपिंग लागत में स्थिरता आने तक तेल विपणन कंपनियों के लिए राहत सीमित रहेगी, हालाँकि सरकार की ओर से आपूर्ति बाधित न होने देने की प्रतिबद्धता स्पष्ट है।