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देश में पेट्रोल-डीजल की कोई कमी नहीं, BPCL मार्केटिंग डायरेक्टर ने दी जानकारी; रोज़ ₹600-700 करोड़ का नुकसान

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देश में पेट्रोल-डीजल की कोई कमी नहीं, BPCL मार्केटिंग डायरेक्टर ने दी जानकारी; रोज़ ₹600-700 करोड़ का नुकसान

सारांश

ईंधन संकट की अफवाहों के बीच BPCL के मार्केटिंग डायरेक्टर ने साफ किया — देश में पेट्रोल-डीजल की कोई कमी नहीं। लेकिन असली तस्वीर यह है कि तेल कंपनियाँ रोज़ ₹600-700 करोड़ का नुकसान उठाकर आपूर्ति बनाए रख रही हैं और रूसी कच्चे तेल की हिस्सेदारी 41% तक पहुँच गई है।

मुख्य बातें

BPCL के मार्केटिंग डायरेक्टर सुखमाल कुमार जैन ने 24 मई को पुष्टि की कि देश में पेट्रोल-डीजल की कोई कमी नहीं है।
देश के करीब एक लाख फ्यूल पंपों में से 85,000 सरकारी तेल कंपनियों द्वारा संचालित हैं और सभी पर आपूर्ति सामान्य है।
विनिमय दरें 89-90 से बढ़कर 96 के स्तर पर पहुँचीं; शिपिंग व बीमा लागत भी बढ़ी।
सार्वजनिक तेल कंपनियाँ वर्तमान में प्रतिदिन ₹600 करोड़ से ₹700 करोड़ का नुकसान उठा रही हैं।
BPCL के आयात में रूसी कच्चे तेल की हिस्सेदारी Q3 FY26 के 25% से बढ़कर अब 41% हो गई है।

भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (BPCL) के मार्केटिंग डायरेक्टर सुखमाल कुमार जैन ने 24 मई को स्पष्ट किया कि देश में पेट्रोल और डीजल की कोई कमी नहीं है और सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियाँ बिना किसी व्यवधान के ईंधन आपूर्ति का प्रबंधन कर रही हैं। यह बयान ऐसे समय में आया है जब वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में अस्थिरता और मध्य पूर्व में जारी तनाव के बीच ईंधन आपूर्ति को लेकर चिंताएँ बढ़ी हैं।

ईंधन आपूर्ति की मौजूदा स्थिति

जैन ने बताया कि देश में मौजूद करीब एक लाख फ्यूल पंपों में से 85,000 का संचालन सरकारी तेल कंपनियों द्वारा किया जाता है और इन सभी पर ईंधन की आपूर्ति सामान्य बनी हुई है। उन्होंने कहा, 'अन्य कई कारणों से छिटपुट मामले हो सकते हैं, लेकिन मेरी जानकारी के अनुसार देश में ईंधन की कोई कमी नहीं है।'

वैश्विक अस्थिरता का तेल कंपनियों पर असर

बाज़ार की मौजूदा स्थिति पर टिप्पणी करते हुए जैन ने कहा कि वैश्विक कच्चे तेल की कीमतें, शिपिंग लागत, बीमा खर्च और विनिमय दरों में उतार-चढ़ाव ने तेल कंपनियों पर भारी दबाव डाला है। उन्होंने बताया, 'मौजूदा समय में स्थिति बेहद अस्थिर है और इसके कई पहलू हैं। अगर आपने कच्चे तेल, शिपिंग लागत, बीमा और यहाँ तक कि विनिमय दरों में आए बदलावों को ध्यान से देखा है, तो आप समझ जाएंगे।'

जैन के अनुसार, विनिमय दरें जो पहले लगभग 89-90 के स्तर पर थीं, अब 96 के आसपास पहुँच गई हैं, जिससे तेल विपणन कंपनियों पर वित्तीय बोझ और बढ़ गया है।

प्रतिदिन ₹600-700 करोड़ का नुकसान

इन सभी कारकों के संयुक्त प्रभाव के कारण, सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियाँ वर्तमान में प्रतिदिन ₹600 करोड़ से ₹700 करोड़ तक का नुकसान उठा रही हैं। इसके बावजूद, जैन ने ज़ोर देकर कहा कि ये कंपनियाँ पूरे देश में निर्बाध ईंधन आपूर्ति सुनिश्चित करना जारी रखे हुए हैं।

रूसी कच्चे तेल की हिस्सेदारी में उल्लेखनीय वृद्धि

BPCL के डायरेक्टर फाइनेंस वी.आर.के. गुप्ता ने बताया कि मध्य पूर्व संकट के बीच कंपनी ने रूस से कच्चे तेल की खरीद बढ़ाई है। वित्त वर्ष 26 की तीसरी तिमाही (अक्टूबर-दिसंबर 2025) में रूसी कच्चे तेल की हिस्सेदारी कुल आयात में 25 प्रतिशत थी, जो चौथी तिमाही (जनवरी-मार्च) में बढ़कर 31 प्रतिशत हो गई और अब वर्तमान में 41 प्रतिशत के स्तर पर पहुँच गई है।

गुप्ता ने कहा कि मध्य पूर्व में तनाव के चलते कंपनी ने विविध स्रोतों — विशेषकर रूस — से कच्चे तेल की खरीद को बढ़ाया है, जो आपूर्ति सुरक्षा की दिशा में एक रणनीतिक कदम है।

आगे की राह

वैश्विक ऊर्जा बाज़ारों में जारी अनिश्चितता के बीच सरकारी तेल कंपनियों पर वित्तीय दबाव बने रहने की संभावना है। विशेषज्ञों का मानना है कि विनिमय दरों और शिपिंग लागत में स्थिरता आने तक तेल विपणन कंपनियों के लिए राहत सीमित रहेगी, हालाँकि सरकार की ओर से आपूर्ति बाधित न होने देने की प्रतिबद्धता स्पष्ट है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन प्रतिदिन ₹600-700 करोड़ के नुकसान का आँकड़ा एक गंभीर वित्तीय दबाव की ओर इशारा करता है जिसे नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता। रूसी कच्चे तेल की हिस्सेदारी का तीन तिमाहियों में 25% से 41% तक उछलना बताता है कि भारत की ऊर्जा रणनीति अब एक ही आपूर्तिकर्ता पर अत्यधिक निर्भर होती जा रही है — जो भू-राजनीतिक जोखिम का एक नया आयाम है। असली सवाल यह है कि क्या सरकार इन घाटे की भरपाई के लिए कीमतें बढ़ाएगी या सब्सिडी देगी — और इस निर्णय में देरी कंपनियों की दीर्घकालिक वित्तीय सेहत को कमज़ोर कर सकती है।
RashtraPress
9 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

क्या भारत में पेट्रोल और डीजल की कमी है?
नहीं। BPCL के मार्केटिंग डायरेक्टर सुखमाल कुमार जैन ने 24 मई को स्पष्ट किया कि देश में पेट्रोल-डीजल की कोई कमी नहीं है और सरकारी तेल कंपनियों द्वारा संचालित 85,000 फ्यूल पंपों पर आपूर्ति सामान्य बनी हुई है। छिटपुट मामले अन्य स्थानीय कारणों से हो सकते हैं।
सरकारी तेल कंपनियाँ प्रतिदिन कितना नुकसान उठा रही हैं?
BPCL के मार्केटिंग डायरेक्टर के अनुसार, वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों, शिपिंग लागत, बीमा खर्च और विनिमय दरों में अस्थिरता के कारण सार्वजनिक तेल कंपनियाँ वर्तमान में प्रतिदिन ₹600 करोड़ से ₹700 करोड़ तक का नुकसान उठा रही हैं।
BPCL के आयात में रूसी कच्चे तेल की हिस्सेदारी कितनी है?
BPCL के डायरेक्टर फाइनेंस वी.आर.के. गुप्ता के अनुसार, वर्तमान में कंपनी के कुल आयात में रूसी कच्चे तेल की हिस्सेदारी करीब 41 प्रतिशत है। यह वित्त वर्ष 26 की तीसरी तिमाही (अक्टूबर-दिसंबर 2025) में 25% और चौथी तिमाही (जनवरी-मार्च) में 31% थी।
तेल कंपनियों पर वित्तीय दबाव क्यों बढ़ा है?
जैन ने बताया कि विनिमय दरें जो पहले 89-90 के स्तर पर थीं, अब 96 के आसपास पहुँच गई हैं। इसके साथ शिपिंग लागत और बीमा खर्च में भी वृद्धि हुई है, जिससे कंपनियों की परिचालन लागत बढ़ गई है।
मध्य पूर्व संकट का भारत की ईंधन आपूर्ति पर क्या असर पड़ा है?
मध्य पूर्व में तनाव के चलते BPCL ने रूस सहित विविध स्रोतों से कच्चे तेल की खरीद बढ़ाई है। हालाँकि, कंपनी ने आश्वस्त किया है कि इससे घरेलू ईंधन आपूर्ति प्रभावित नहीं हुई है और देशभर में आपूर्ति सामान्य बनी हुई है।
राष्ट्र प्रेस
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