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देश में पेट्रोल-डीजल की कोई कमी नहीं, BPCL मार्केटिंग डायरेक्टर ने दी जानकारी; तेल कंपनियां रोज़ ₹600-700 करोड़ का नुकसान उठा रहीं

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देश में पेट्रोल-डीजल की कोई कमी नहीं, BPCL मार्केटिंग डायरेक्टर ने दी जानकारी; तेल कंपनियां रोज़ ₹600-700 करोड़ का नुकसान उठा रहीं

सारांश

ईंधन की कमी की अफवाहों के बीच BPCL के मार्केटिंग डायरेक्टर का स्पष्ट संदेश — देश के 85,000 सरकारी पंपों पर आपूर्ति सामान्य है। लेकिन विनिमय दर, शिपिंग लागत और कच्चे तेल की कीमतों की मार से तेल कंपनियां रोज़ ₹600-700 करोड़ का घाटा झेल रही हैं।

मुख्य बातें

BPCL मार्केटिंग डायरेक्टर सुखमाल कुमार जैन ने 24 मई 2026 को कहा — देश में पेट्रोल-डीजल की कोई कमी नहीं है।
देश के करीब एक लाख फ्यूल पंप में से 85,000 सरकारी तेल कंपनियों द्वारा संचालित; सभी पर आपूर्ति सामान्य।
वैश्विक अस्थिरता के चलते तेल कंपनियां प्रतिदिन ₹600 करोड़ से ₹700 करोड़ का नुकसान उठा रही हैं।
विनिमय दर 89-90 से बढ़कर 96 के आसपास पहुँची, जिससे आयात लागत बढ़ी।
BPCL के कुल आयात में रूसी कच्चे तेल की हिस्सेदारी Q3 FY26 के 25% से बढ़कर अब 41% हो गई है।

भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (BPCL) के मार्केटिंग डायरेक्टर सुखमाल कुमार जैन ने 24 मई 2026 को स्पष्ट किया कि देश में पेट्रोल और डीजल की कोई कमी नहीं है और सरकारी तेल कंपनियां पूरे देश में निर्बाध ईंधन आपूर्ति सुनिश्चित कर रही हैं। ईंधन को लेकर उठ रही चिंताओं के बीच यह बयान महत्वपूर्ण है।

आपूर्ति की स्थिति

जैन ने बताया कि देश में मौजूद करीब एक लाख फ्यूल पंप में से 85,000 का प्रबंधन सरकारी तेल कंपनियों द्वारा किया जाता है और इन सभी पर ईंधन की आपूर्ति सामान्य बनी हुई है। उन्होंने कहा, 'अन्य कई कारणों से छिटपुट मामले हो सकते हैं, लेकिन मेरी जानकारी के अनुसार देश में ईंधन की कोई कमी नहीं है।'

वैश्विक अस्थिरता का असर

बाज़ार की मौजूदा स्थिति पर जैन ने कहा कि वैश्विक कच्चे तेल की कीमतें और संबंधित लागतें अत्यधिक अस्थिर बनी हुई हैं। शिपिंग लागत, बीमा खर्च और विनिमय दरों में उतार-चढ़ाव ने तेल कंपनियों को काफी प्रभावित किया है। उन्होंने कहा, 'मौजूदा समय में स्थिति बेहद अस्थिर है और इसके कई पहलू हैं — कच्चे तेल, शिपिंग लागत, बीमा और विनिमय दरों में आए बदलावों को ध्यान से देखें तो आप समझ जाएंगे।'

विनिमय दर और वित्तीय नुकसान

जैन के अनुसार, विनिमय दरें जो पहले लगभग 89-90 के स्तर पर थीं, अब 96 के आसपास पहुँच गई हैं, जिससे तेल विपणन कंपनियों पर आर्थिक बोझ बढ़ रहा है। इन सभी कारकों के संयुक्त प्रभाव के चलते तेल कंपनियां वर्तमान में प्रतिदिन ₹600 करोड़ से ₹700 करोड़ तक का नुकसान उठा रही हैं। इसके बावजूद सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियां आपूर्ति में कोई कटौती नहीं कर रहीं।

रूसी कच्चे तेल की बढ़ती हिस्सेदारी

BPCL के डायरेक्टर फाइनेंस वीआरके गुप्ता ने बताया कि मध्य पूर्व संकट के बीच कंपनी रूस से कच्चे तेल की खरीद बढ़ा रही है। वर्तमान में कंपनी के कुल आयात में रूसी कच्चे तेल की हिस्सेदारी करीब 41 प्रतिशत पहुँच गई है, जो वित्त वर्ष 26 की चौथी तिमाही (जनवरी-मार्च) में 31 प्रतिशत और तीसरी तिमाही (अक्टूबर-दिसंबर 2025) में 25 प्रतिशत थी। गौरतलब है कि यह वृद्धि मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के सीधे जवाब में आई है, जो भारत की ऊर्जा सुरक्षा रणनीति में विविधीकरण की बढ़ती प्रवृत्ति को दर्शाती है।

आगे क्या

यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक ऊर्जा बाज़ार में अनिश्चितता बनी हुई है और घरेलू ईंधन मूल्य निर्धारण पर राजनीतिक दबाव भी है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि विनिमय दरें और शिपिंग लागत इसी तरह ऊँची बनी रहीं, तो सरकारी तेल कंपनियों पर वित्तीय दबाव और बढ़ सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन प्रतिदिन ₹600-700 करोड़ के नुकसान का आँकड़ा एक गहरे संकट की ओर इशारा करता है जिसे नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता। यह वही तस्वीर है जो 2022 में भी देखी गई थी — जब सरकारी तेल कंपनियां अंडर-रिकवरी के बोझ तले दबी थीं और सरकार चुनावी दबाव में कीमतें नहीं बढ़ा पा रही थी। रूसी कच्चे तेल की हिस्सेदारी का एक तिमाही में 25% से 41% तक पहुँचना भारत की ऊर्जा विविधीकरण नीति की सफलता है, लेकिन यह पश्चिमी देशों के साथ कूटनीतिक संतुलन पर भी सवाल खड़े करता है। असली प्रश्न यह है कि घाटे की यह रफ़्तार कब तक टिकेगी और क्या सरकार ईंधन मूल्य संशोधन का कड़वा फैसला लेने को तैयार है।
RashtraPress
8 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

क्या भारत में पेट्रोल-डीजल की कमी है?
नहीं। BPCL के मार्केटिंग डायरेक्टर सुखमाल कुमार जैन के अनुसार देश में पेट्रोल और डीजल की कोई कमी नहीं है। देश के 85,000 सरकारी फ्यूल पंपों पर आपूर्ति पूरी तरह सामान्य बनी हुई है।
तेल कंपनियां रोज़ कितना नुकसान उठा रही हैं?
BPCL मार्केटिंग डायरेक्टर जैन के अनुसार, वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों, शिपिंग लागत, बीमा खर्च और विनिमय दरों में उतार-चढ़ाव के कारण सरकारी तेल कंपनियां वर्तमान में प्रतिदिन ₹600 करोड़ से ₹700 करोड़ तक का नुकसान उठा रही हैं।
BPCL रूस से कितना कच्चा तेल खरीद रही है?
BPCL के डायरेक्टर फाइनेंस वीआरके गुप्ता के अनुसार, वर्तमान में कंपनी के कुल आयात में रूसी कच्चे तेल की हिस्सेदारी करीब 41 प्रतिशत है। यह वित्त वर्ष 26 की तीसरी तिमाही (अक्टूबर-दिसंबर 2025) के 25 प्रतिशत और चौथी तिमाही (जनवरी-मार्च) के 31 प्रतिशत से काफी अधिक है।
रूस से कच्चे तेल की खरीद क्यों बढ़ाई जा रही है?
BPCL ने मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के चलते आपूर्ति स्रोतों में विविधता लाने के लिए रूस से कच्चे तेल की खरीद बढ़ाई है। यह कदम ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने की रणनीति का हिस्सा बताया गया है।
विनिमय दर का तेल कंपनियों पर क्या असर पड़ा है?
जैन के अनुसार, विनिमय दरें जो पहले लगभग 89-90 के स्तर पर थीं, अब 96 के आसपास पहुँच गई हैं। इससे कच्चे तेल के आयात की लागत बढ़ गई है और तेल विपणन कंपनियों पर वित्तीय बोझ में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।
राष्ट्र प्रेस
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