30 जुलाई 2026
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पेट्रोल-डीजल की कीमतें कच्चे तेल पर निर्भर: राज्य मंत्री सुरेश गोपी, तेल कंपनियों को ₹600-750 करोड़ रोज़ का नुकसान

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पेट्रोल-डीजल की कीमतें कच्चे तेल पर निर्भर: राज्य मंत्री सुरेश गोपी, तेल कंपनियों को ₹600-750 करोड़ रोज़ का नुकसान

सारांश

मई में चार बार दाम बढ़ने के बाद अब पेट्रोलियम राज्य मंत्री सुरेश गोपी ने साफ कर दिया है कि आगे की राह कच्चे तेल पर निर्भर है। सरकारी तेल कंपनियाँ रोज़ाना ₹600-750 करोड़ की अंडर रिकवरी झेल रही हैं — और ब्रेंट क्रूड 87 डॉलर पर टिका है।

मुख्य बातें

पेट्रोलियम राज्य मंत्री सुरेश गोपी ने 14 जून 2026 को कहा — पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बदलाव कच्चे तेल की वैश्विक स्थिति पर निर्भर करेगा।
मई 2026 में ईंधन के दाम चार बार बढ़ाए गए; नई दिल्ली में अप्रैल की तुलना में औसतन 7.50% महंगाई।
इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम, हिंदुस्तान पेट्रोलियम को प्रतिदिन ₹600-750 करोड़ की अंडर रिकवरी का सामना।
अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में ब्रेंट क्रूड ₹87 डॉलर/बैरल और WTI क्रूड 84 डॉलर/बैरल के करीब।
पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा — सरकार ने आम नागरिकों पर कीमत वृद्धि का बोझ न्यूनतम रखने की कोशिश की है।

केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस राज्य मंत्री सुरेश गोपी ने 14 जून 2026 को स्पष्ट किया कि आगे पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कोई भी बदलाव पूरी तरह वैश्विक कच्चे तेल की स्थिति पर निर्भर करेगा। केरल के त्रिशूर जिले में पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार वैश्विक ऊर्जा बाज़ार में हो रही हलचल पर बारीकी से नज़र बनाए हुए है और कोई भी निर्णय कच्चे तेल की आपूर्ति एवं व्यापक ऊर्जा परिदृश्य को देखते हुए किया जाएगा।

मई में चार बार बढ़े ईंधन के दाम

यह बयान ऐसे समय में आया है जब अमेरिका-ईरान संघर्ष के कारण अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज़ी आई और मई 2026 में देश में पेट्रोल-डीजल के दाम चार बार बढ़ाए गए। इसके परिणामस्वरूप नई दिल्ली में ईंधन की कीमतें अप्रैल की तुलना में औसतन 7.50 प्रतिशत महंगी हो गई हैं।

गौरतलब है कि अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में इस समय ब्रेंट क्रूड लगभग 87 डॉलर प्रति बैरल और WTI क्रूड करीब 84 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर बना हुआ है।

तेल कंपनियों पर भारी अंडर रिकवरी का बोझ

अधिकारियों के अनुसार, वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में हुई बढ़ोतरी का केवल एक हिस्सा ही उपभोक्ताओं तक पहुँचाया गया है। इस वजह से सरकारी तेल कंपनियाँ — इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम — वर्तमान में ईंधन की बिक्री पर प्रतिदिन ₹600 करोड़ से ₹750 करोड़ तक की अंडर रिकवरी (लागत और बिक्री मूल्य के बीच का अंतर) झेल रही हैं।

यह स्थिति इन कंपनियों की वित्तीय सेहत के लिए दीर्घकालिक चिंता का विषय बन सकती है, खासकर अगर वैश्विक तेल कीमतें ऊँचे स्तर पर बनी रहती हैं।

पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी का बयान

पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने 13 जून को लुधियाना में कहा कि ईरान, अमेरिका और इजराइल के बीच जारी संघर्ष से उपजी अंतरराष्ट्रीय स्थिति ने पेट्रोलियम क्षेत्र में चुनौतियाँ बढ़ा दी हैं। उन्होंने यह भी कहा कि केंद्र सरकार ने यह सुनिश्चित किया है कि मूल्य वृद्धि का अधिकतम बोझ आम नागरिकों पर न पड़े।

आम जनता पर असर

राष्ट्रीय राजधानी सहित देश के अन्य हिस्सों में पेट्रोल-डीजल की बढ़ी कीमतों ने घरेलू बजट पर सीधा असर डाला है। परिवहन लागत में वृद्धि से महँगाई के अन्य क्षेत्रों पर भी दबाव बनने की आशंका है। आलोचकों का कहना है कि सरकार को ईंधन पर उत्पाद शुल्क में कटौती कर उपभोक्ताओं को राहत देनी चाहिए।

आगे क्या होगा

सुरेश गोपी के बयान से स्पष्ट है कि निकट भविष्य में ईंधन कीमतों में कमी की कोई तत्काल घोषणा संभव नहीं है। सरकार की नज़र ओपेक के उत्पादन निर्णयों और मध्य-पूर्व में भू-राजनीतिक स्थिति पर टिकी है। यदि वैश्विक कच्चे तेल की कीमतें नरम पड़ती हैं, तभी घरेलू ईंधन दरों में राहत की उम्मीद की जा सकती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

असली सवाल यह है कि सरकार उत्पाद शुल्क में कटौती क्यों नहीं कर रही — जो उसके नियंत्रण में है और जिससे तत्काल राहत मिल सकती है। ₹600-750 करोड़ प्रतिदिन की अंडर रिकवरी दर्शाती है कि राज्य-संचालित तेल कंपनियाँ लंबे समय तक यह बोझ नहीं उठा सकतीं — और अगले दौर की मूल्य वृद्धि की ज़मीन पहले से तैयार हो रही है।
RashtraPress
30 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पेट्रोल-डीजल की कीमतें आगे कम होंगी या बढ़ेंगी?
राज्य मंत्री सुरेश गोपी के अनुसार, आगे कोई भी बदलाव वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों पर निर्भर करेगा। अभी ब्रेंट क्रूड 87 डॉलर प्रति बैरल के करीब है, इसलिए निकट भविष्य में राहत की संभावना सीमित है।
मई 2026 में पेट्रोल-डीजल कितने महंगे हुए?
मई 2026 में पेट्रोल और डीजल की कीमतें चार बार बढ़ाई गईं। नई दिल्ली में अप्रैल की तुलना में ईंधन औसतन 7.50 प्रतिशत महंगा हो गया।
सरकारी तेल कंपनियों को अंडर रिकवरी क्यों हो रही है?
अधिकारियों के अनुसार, वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में हुई बढ़ोतरी का केवल एक हिस्सा ही उपभोक्ताओं को दिया गया है। बाकी अंतर इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम खुद वहन कर रही हैं, जिससे प्रतिदिन ₹600-750 करोड़ की अंडर रिकवरी हो रही है।
ईरान-अमेरिका संघर्ष का भारत के ईंधन बाज़ार पर क्या असर है?
पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी के अनुसार, ईरान, अमेरिका और इजराइल के बीच चल रहे संघर्ष ने वैश्विक तेल आपूर्ति को अनिश्चित बना दिया है, जिससे कच्चे तेल की कीमतें ऊँची बनी हुई हैं और भारत में पेट्रोल-डीजल महंगे हुए हैं।
क्या सरकार ईंधन पर उत्पाद शुल्क घटाएगी?
सरकार की ओर से अभी तक उत्पाद शुल्क कटौती का कोई संकेत नहीं दिया गया है। मंत्री ने केवल यह कहा है कि वैश्विक ऊर्जा बाज़ार पर नज़र रखी जा रही है और निर्णय कच्चे तेल की आपूर्ति स्थिति के आधार पर होगा।
राष्ट्र प्रेस
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