पेट्रोल-डीजल की कीमतें कच्चे तेल पर निर्भर: राज्य मंत्री सुरेश गोपी, तेल कंपनियों को ₹600-750 करोड़ रोज़ का नुकसान
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस राज्य मंत्री सुरेश गोपी ने 14 जून 2026 को स्पष्ट किया कि आगे पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कोई भी बदलाव पूरी तरह वैश्विक कच्चे तेल की स्थिति पर निर्भर करेगा। केरल के त्रिशूर जिले में पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार वैश्विक ऊर्जा बाज़ार में हो रही हलचल पर बारीकी से नज़र बनाए हुए है और कोई भी निर्णय कच्चे तेल की आपूर्ति एवं व्यापक ऊर्जा परिदृश्य को देखते हुए किया जाएगा।
मई में चार बार बढ़े ईंधन के दाम
यह बयान ऐसे समय में आया है जब अमेरिका-ईरान संघर्ष के कारण अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज़ी आई और मई 2026 में देश में पेट्रोल-डीजल के दाम चार बार बढ़ाए गए। इसके परिणामस्वरूप नई दिल्ली में ईंधन की कीमतें अप्रैल की तुलना में औसतन 7.50 प्रतिशत महंगी हो गई हैं।
गौरतलब है कि अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में इस समय ब्रेंट क्रूड लगभग 87 डॉलर प्रति बैरल और WTI क्रूड करीब 84 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर बना हुआ है।
तेल कंपनियों पर भारी अंडर रिकवरी का बोझ
अधिकारियों के अनुसार, वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में हुई बढ़ोतरी का केवल एक हिस्सा ही उपभोक्ताओं तक पहुँचाया गया है। इस वजह से सरकारी तेल कंपनियाँ — इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम — वर्तमान में ईंधन की बिक्री पर प्रतिदिन ₹600 करोड़ से ₹750 करोड़ तक की अंडर रिकवरी (लागत और बिक्री मूल्य के बीच का अंतर) झेल रही हैं।
यह स्थिति इन कंपनियों की वित्तीय सेहत के लिए दीर्घकालिक चिंता का विषय बन सकती है, खासकर अगर वैश्विक तेल कीमतें ऊँचे स्तर पर बनी रहती हैं।
पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी का बयान
पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने 13 जून को लुधियाना में कहा कि ईरान, अमेरिका और इजराइल के बीच जारी संघर्ष से उपजी अंतरराष्ट्रीय स्थिति ने पेट्रोलियम क्षेत्र में चुनौतियाँ बढ़ा दी हैं। उन्होंने यह भी कहा कि केंद्र सरकार ने यह सुनिश्चित किया है कि मूल्य वृद्धि का अधिकतम बोझ आम नागरिकों पर न पड़े।
आम जनता पर असर
राष्ट्रीय राजधानी सहित देश के अन्य हिस्सों में पेट्रोल-डीजल की बढ़ी कीमतों ने घरेलू बजट पर सीधा असर डाला है। परिवहन लागत में वृद्धि से महँगाई के अन्य क्षेत्रों पर भी दबाव बनने की आशंका है। आलोचकों का कहना है कि सरकार को ईंधन पर उत्पाद शुल्क में कटौती कर उपभोक्ताओं को राहत देनी चाहिए।
आगे क्या होगा
सुरेश गोपी के बयान से स्पष्ट है कि निकट भविष्य में ईंधन कीमतों में कमी की कोई तत्काल घोषणा संभव नहीं है। सरकार की नज़र ओपेक के उत्पादन निर्णयों और मध्य-पूर्व में भू-राजनीतिक स्थिति पर टिकी है। यदि वैश्विक कच्चे तेल की कीमतें नरम पड़ती हैं, तभी घरेलू ईंधन दरों में राहत की उम्मीद की जा सकती है।