अल-फलाह ट्रस्ट मनी लॉन्ड्रिंग केस: दिल्ली हाई कोर्ट ने जवाद सिद्दीकी की अंतरिम जमानत याचिकाएं जस्टिस सौरभ बनर्जी को ट्रांसफर कीं
सारांश
मुख्य बातें
दिल्ली हाई कोर्ट ने 8 जुलाई को अल-फलाह ट्रस्ट मनी लॉन्ड्रिंग मामले के आरोपी जवाद अहमद सिद्दीकी की दो अंतरिम जमानत याचिकाओं को जस्टिस सौरभ बनर्जी की पीठ के पास स्थानांतरित करने का आदेश दिया। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के एक मामले में सिद्दीकी की नियमित जमानत याचिका पहले से ही जस्टिस बनर्जी के समक्ष लंबित है, और इस ट्रांसफर का उद्देश्य सभी संबंधित अर्जियों की एकीकृत सुनवाई सुनिश्चित करना है।
मुख्य घटनाक्रम
अंतरिम जमानत की दो अर्जियां — जो ईडी के दो अलग-अलग मामलों से जुड़ी थीं — पहले जस्टिस मनोज जैन और जस्टिस मधु जैन की पीठों के सामने सूचीबद्ध थीं। सिद्दीकी की ओर से पेश अधिवक्ताओं ने तर्क दिया कि चूंकि नियमित जमानत याचिका भी उसी दिन जस्टिस बनर्जी के समक्ष सूचीबद्ध थी, इसलिए सुनवाई की एकरूपता के लिए सभी याचिकाएं एक ही पीठ के पास होनी चाहिए। दोनों पीठों ने यह अनुरोध स्वीकार कर लिया। इन मामलों पर गुरुवार को सुनवाई निर्धारित है।
अंतरिम जमानत का आधार
सिद्दीकी ने अपनी अंतरिम जमानत याचिकाओं में मानवीय आधार का हवाला दिया है। उनकी ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता विक्रम चौधरी ने अदालत को बताया कि उनकी पत्नी उस्मा अख्तर स्टेज-4 ओवेरियन कैंसर से पीड़ित हैं और सिद्दीकी उनके एकमात्र मुख्य देखभालकर्ता हैं। छह सप्ताह की अंतरिम जमानत की मांग करते हुए यह दलील दी गई कि इलाज के इस नाजुक दौर में उनकी उपस्थिति अनिवार्य है। अधिवक्ता विश्वेंद्र तोमर, तालिब मुस्तफा और अभिषेक सिंह भी सिद्दीकी की ओर से उपस्थित रहे।
ईडी और निचली अदालत का रुख
ईडी ने याचिका का विरोध करते हुए कहा कि यह सुनवाई योग्य नहीं है। इससे पहले साकेत कोर्ट के एक अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश ने मेडिकल रिकॉर्ड और दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अंतरिम जमानत की अर्जियां खारिज कर दी थीं। 9 जून के अपने आदेश में स्पेशल कोर्ट ने कहा कि यद्यपि उस्मा अख्तर के स्टेज-4 कैंसर से पीड़ित होने का तथ्य निर्विवाद है, किंतु प्रस्तुत मेडिकल दस्तावेजों में उनकी स्थिति को 'स्थिर' बताया गया है और 'इलाज पर अच्छा रिस्पॉन्स' दर्ज किया गया है। अदालत ने माना कि सिद्दीकी यह सिद्ध नहीं कर पाए कि उनकी पत्नी की देखभाल के लिए कोई अन्य व्यक्ति उपलब्ध नहीं था।
अल-फलाह मामले की पृष्ठभूमि
ईडी के अनुसार, यह मनी लॉन्ड्रिंग जांच दिल्ली पुलिस द्वारा दर्ज अनेक एफआईआर पर आधारित है, जिनमें अल-फलाह यूनिवर्सिटी और उससे संबद्ध संस्थाओं के विरुद्ध धोखाधड़ी, जालसाजी और आपराधिक षड्यंत्र के आरोप हैं। एजेंसी का आरोप है कि यूनिवर्सिटी ने एनएएसी की समाप्त हो चुकी मान्यता को वैध बताया, ऐसी यूजीसी मान्यता का दावा किया जो अस्तित्व में ही नहीं थी, और मेडिकल कॉलेज के लिए राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (एनएमसी) से अनुमोदन प्राप्त करने में अनियमितताएं बरती गईं। ईडी का दावा है कि 2016-17 से 2024-25 के बीच ₹493.24 करोड़ की अपराध-जनित संपत्ति अर्जित की गई और इसे सिद्दीकी तथा उनके परिवार से जुड़ी संस्थाओं के माध्यम से अन्यत्र स्थानांतरित किया गया।
संपत्ति जब्ती और आगे की सुनवाई
इस वर्ष की शुरुआत में ईडी ने जांच के तहत अल-फलाह चैरिटेबल ट्रस्ट और सिद्दीकी की ₹39.45 करोड़ की संपत्ति कुर्क की थी। इसके अतिरिक्त, यूनिवर्सिटी की ₹144 करोड़ से अधिक मूल्य की भूमि और भवन भी जब्त किए गए थे। जस्टिस सौरभ बनर्जी ने नियमित जमानत याचिका पर सुनवाई के लिए 29 और 30 जुलाई को शाम 4 बजे का समय निर्धारित किया है। अब सभी नजरें गुरुवार की सुनवाई पर टिकी हैं, जब अंतरिम जमानत याचिकाओं पर जस्टिस बनर्जी की पीठ अपना रुख स्पष्ट करेगी।