दिल्ली हाईकोर्ट ने अल फलाह के चेयरमैन को नोटिस जारी किया, अगली सुनवाई 19 मार्च को
सारांश
Key Takeaways
- दिल्ली हाईकोर्ट ने जवाद अहमद सिद्दीकी को नोटिस जारी किया।
- ईडी ने अंतरिम जमानत को चुनौती दी।
- अगली सुनवाई 19 मार्च को होगी।
- अल फलाह विश्वविद्यालय जांच के दायरे में है।
- मामला मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़ा हुआ है।
नई दिल्ली, 12 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। अल फलाह विश्वविद्यालय से जुड़े एक कथित मनी लॉन्ड्रिंग मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की याचिका पर दिल्ली हाई कोर्ट ने विश्वविद्यालय ग्रुप के चेयरमैन जवाद अहमद सिद्दीकी को नोटिस जारी कर उनसे जवाब मांगा है। ईडी ने निचली अदालत द्वारा जवाद अहमद सिद्दीकी को दी गई अंतरिम जमानत को चुनौती दी है।
सुनवाई के दौरान ईडी की दलीलें सुनने के बाद जस्टिस सौरभ बनर्जी की बेंच ने जवाद अहमद सिद्दीकी को नोटिस जारी करते हुए उनसे इस मामले में अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया। अदालत ने इस मामले की अगली सुनवाई 19 मार्च को निर्धारित की है। ईडी ने अपनी याचिका में कहा है कि ट्रायल कोर्ट द्वारा जवाद अहमद सिद्दीकी को दी गई अंतरिम जमानत का आदेश कानूनी रूप से सही नहीं है। एजेंसी का कहना है कि जमानत देने का आधार बने सिद्दीकी की पत्नी की खराब सेहत को राहत पाने के लिए बहाने के तौर पर पेश किया गया है।
ईडी ने अदालत को बताया कि ट्रायल कोर्ट का निर्णय न केवल तथ्यात्मक रूप से गलत है, बल्कि यह प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (पीएमएलए) के प्रावधानों के विपरीत भी है। एजेंसी का कहना है कि इस मामले में जमानत दिए जाने के लिए जरूरी कानूनी मानकों का पालन नहीं किया गया।
दिल्ली हाईकोर्ट ने ईडी की दलीलों पर प्रारंभिक रूप से संज्ञान लेते हुए जवाद अहमद सिद्दीकी से जवाब मांगा है। अब इस मामले में 19 मार्च को होने वाली अगली सुनवाई के दौरान अदालत आगे की कार्रवाई पर निर्णय ले सकती है।
यह ध्यान देने योग्य है कि अल फलाह विश्वविद्यालय केंद्रीय जांच एजेंसियों की जांच के दायरे में है। जब से आतंकवाद विरोधी एजेंसियों ने इस संस्थान में काम करने वाले डॉक्टरों से जुड़े एक मॉड्यूल का पर्दाफाश किया है, तब से यह विश्वविद्यालय विवादों में घिरा हुआ है। विश्वविद्यालय में काम करने वाले डॉक्टरों में से एक कथित तौर पर 10 नवंबर 2025 को लाल किले के पास हुए कार विस्फोट में शामिल था।