अल-फलाह यूनिवर्सिटी के संस्थापक जावेद अहमद सिद्दीकी की जमानत खारिज, ₹493 करोड़ के मनी लॉन्ड्रिंग मामले में साकेत कोर्ट का बड़ा फैसला
सारांश
Key Takeaways
दिल्ली के साकेत कोर्ट ने 3 मई 2026 को अल-फलाह यूनिवर्सिटी के संस्थापक जावेद अहमद सिद्दीकी की नियमित जमानत याचिका खारिज कर दी है। साउथ ईस्ट डिस्ट्रिक्ट की एडिशनल सेशंस जज-02 की अदालत ने यह फैसला प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के तहत दर्ज मामले में सुनाया। प्रवर्तन निदेशालय (ED) के अनुसार, इस मामले में ₹493.24 करोड़ की अवैध कमाई (प्रोसीड्स ऑफ क्राइम) का पता चला है।
मामले की पृष्ठभूमि
जाँच एजेंसियों के मुताबिक, जावेद अहमद सिद्दीकी अल-फलाह यूनिवर्सिटी, उससे जुड़े ट्रस्ट और अन्य संस्थाओं को नियंत्रित करता था। आरोप है कि यूनिवर्सिटी की वेबसाइट पर NAAC और UGC जैसी फर्जी या समाप्त हो चुकी मान्यताएँ दर्शाई गईं। यह ऐसे समय में सामने आया है जब देशभर में शिक्षण संस्थाओं में धोखाधड़ी के मामले लगातार बढ़ रहे हैं।
आरोप यह भी है कि NAAC की नोटिस मिलने के बाद सबूत मिटाने के निर्देश दिए गए। इसके अलावा, फर्जी फैकल्टी रिकॉर्ड के ज़रिए राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (NMC) और हरियाणा सरकार को गुमराह करके ज़रूरी अनुमतियाँ और प्रमाण-पत्र हासिल किए गए।
धन के हेरफेर का तरीका
जाँच में सामने आया कि एडमिशन के नाम पर वसूली गई भारी रकम को 'आमला एंटरप्राइजेज एलएलपी', 'करकुन कंस्ट्रक्शन डेवलपर्स' और 'दियाला कंस्ट्रक्शन डेवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड' जैसी कंपनियों के माध्यम से घुमाया गया। ये सभी कंपनियाँ कथित तौर पर आरोपी और उसके परिवार के नियंत्रण में थीं।
जाँच एजेंसियों के अनुसार, इन फंड्स को निजी बैंक खातों, शेयर बाज़ार और दुबई में निवेश तक पहुँचाया गया। कोर्ट ने जिन सबूतों पर भरोसा किया, उनमें व्हाट्सएप चैट, बैंक खातों का विश्लेषण, शेयर ट्रांसफर के दस्तावेज़ और कई डिजिटल रिकॉर्ड शामिल हैं।
अदालत का तर्क और PMLA की शर्तें
अदालत ने कहा कि PMLA की धारा 45 के तहत जमानत के लिए आवश्यक दोहरी शर्तें सिद्दीकी पूरी नहीं कर सके — न तो यह साबित हुआ कि वे निर्दोष हैं, और न ही यह भरोसा दिलाया जा सका कि रिहाई के बाद दोबारा अपराध नहीं होगा। गौरतलब है कि PMLA के तहत जमानत की शर्तें सामान्य आपराधिक मामलों की तुलना में कहीं अधिक कठिन हैं।
CrPC की धारा 439 के तहत ट्रिपल टेस्ट में भी आरोपी विफल रहा। अदालत ने तीन प्रमुख जोखिम रेखांकित किए: दुबई में संपत्ति होने के कारण देश छोड़कर भागने का खतरा, सबूतों के साथ छेड़छाड़ की आशंका, और अपने प्रत्यक्ष नियंत्रण में काम करने वाले कर्मचारियों व लेखाकारों जैसे संस्थागत गवाहों को प्रभावित करने की क्षमता।
आरोपी का आपराधिक इतिहास
कोर्ट ने यह भी नोट किया कि सिद्दीकी के खिलाफ पहले से ही धोखाधड़ी, जालसाज़ी और विश्वासघात के कई मामले दर्ज हैं। हाल के कुछ मामलों में भी उनका नाम सामने आया है, जिसे अदालत ने जमानत अस्वीकार करने के निर्णय में एक महत्वपूर्ण कारक माना।
आगे क्या होगा
जमानत याचिका खारिज होने के बाद सिद्दीकी की न्यायिक हिरासत जारी रहेगी। ED की जाँच अभी जारी है और मामले में आगे चार्जशीट पर सुनवाई होनी है। यह मामला शिक्षा क्षेत्र में वित्तीय अनियमितताओं पर ED की बढ़ती सक्रियता का एक और उदाहरण है।