मालदा में न्यायिक अधिकारियों से दुर्व्यवहार: एनआईए ने कई टीएमसी नेताओं को भेजा समन, कालियाचक थाने में पेश होने का आदेश
सारांश
Key Takeaways
राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने पश्चिम बंगाल के मालदा जिले के मोथाबाड़ी में न्यायिक अधिकारियों के साथ दुर्व्यवहार के मामले में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के कई स्थानीय नेताओं और कार्यकर्ताओं को समन जारी किया है। अधिकारियों के अनुसार, इन सभी को कालियाचक पुलिस थाने में पेश होने का निर्देश दिया गया है। यह कार्रवाई सर्वोच्च न्यायालय के आदेश पर चुनाव आयोग द्वारा जांच एनआईए को सौंपे जाने के बाद की गई है।
मुख्य घटनाक्रम
कलकत्ता उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश द्वारा नियुक्त न्यायिक अधिकारी मतदाता सूची के 'विशेष गहन पुनरीक्षण' (एसआईआर) के अंतर्गत नामों को अंतिम रूप देने का कार्य कर रहे थे। पिछले महीने मालदा के मोथाबाड़ी में इन अधिकारियों को घेर लिया गया और कथित तौर पर लगभग नौ घंटे तक 'बंधक' बनाकर रखा गया। उन्हें देर रात तक कालियाचक-2 ब्लॉक कार्यालय के भीतर रोके रखने और उनके साथ दुर्व्यवहार किए जाने के आरोप हैं।
आरोप है कि जिन लोगों के नाम एसआईआर सूची से हटाए गए थे, उनमें से एक वर्ग ने यह विरोध प्रदर्शन किया। गौरतलब है कि यह घटना ऐसे समय में हुई जब राज्य में मतदाता सूची संशोधन प्रक्रिया अपने संवेदनशील चरण में थी।
किन नेताओं को भेजा गया समन
अधिकारियों के अनुसार, सुजापुर से तृणमूल कांग्रेस उम्मीदवार सबीना यास्मीन के चुनाव एजेंट अब्दुल रहमान को शनिवार देर रात नोटिस मिला। अब्दुल रहमान मालदा जिला परिषद के वन और भूमि विभाग के अधीक्षक हैं। इसके अलावा, कालियाचक ब्लॉक-1 के तृणमूल अध्यक्ष मोहम्मद सरियुल को भी कालियाचक पुलिस स्टेशन में शाम तक पेश होने का निर्देश दिया गया है। क्षेत्र के अन्य टीएमसी नेताओं और कार्यकर्ताओं को भी नोटिस जारी किए गए हैं।
अब तक की गिरफ्तारियाँ और जांच की स्थिति
इस मामले में अब तक कुल 52 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। इनमें से कई आरोपी एनआईए की हिरासत में हैं, जबकि कुछ न्यायिक हिरासत में हैं। एनआईए को जांच सौंपे जाने से पहले राज्य पुलिस की सीआईडी ने मुख्य आरोपियों में से एक मोफक्करुल इस्लाम को गिरफ्तार कर लिया था। अदालत में दावा किया गया कि वह इस विरोध प्रदर्शन के मुख्य साजिशकर्ताओं में से एक था।
सर्वोच्च न्यायालय और चुनाव आयोग की भूमिका
चुनाव आयोग (ECI) ने सर्वोच्च न्यायालय के आदेश पर इस घटना की जांच एनआईए को सौंपी। यह इस बात का संकेत है कि मामले की संवेदनशीलता और न्यायिक अधिकारियों की सुरक्षा को लेकर शीर्ष अदालत ने गंभीर संज्ञान लिया। स्थानीय सूत्रों के अनुसार, उस दिन की घटनाओं की विस्तृत जानकारी जुटाने के लिए क्षेत्र के टीएमसी नेताओं को तलब किया गया है।
आगे क्या होगा
एनआईए की पूछताछ से यह स्पष्ट होने की संभावना है कि मोथाबाड़ी की घटना में स्थानीय राजनीतिक नेतृत्व की क्या भूमिका थी। यह मामला पश्चिम बंगाल में चुनावी प्रक्रिया और न्यायिक अधिकारियों की सुरक्षा को लेकर एक बड़े विमर्श का केंद्र बन सकता है।