मनी लॉन्ड्रिंग केस: साकेत कोर्ट ने अल-फलाह यूनिवर्सिटी के निदेशक जवाद अहमद सिद्दीकी की जमानत याचिका दूसरी बार खारिज की
सारांश
Key Takeaways
प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा दर्ज मनी लॉन्ड्रिंग मामले में अल-फलाह यूनिवर्सिटी के निदेशक जवाद अहमद सिद्दीकी की जमानत याचिका को साकेत कोर्ट ने एक बार फिर खारिज कर दिया है। यह मामला दक्षिण-पूर्वी दिल्ली के मदनपुर खादर गाँव में स्थित लगभग ₹45 करोड़ मूल्य की जमीन की कथित धोखाधड़ी से जुड़ा है।
मुख्य घटनाक्रम
जांच एजेंसी के अनुसार, जवाद अहमद सिद्दीकी की पुलिस हिरासत की अवधि समाप्त होने के बाद उन्हें अपर सत्र न्यायाधीश (ASJ) शीतल चौधरी प्रधान की अदालत में पेश किया गया। जांच एजेंसी ने कोर्ट से कहा कि अभी मामले में जांच जारी है और सबूत एकत्रित करने के लिए सिद्दीकी को न्यायिक हिरासत में भेजा जाए। कोर्ट ने एजेंसी की दलीलें स्वीकार करते हुए उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया और जमानत याचिका खारिज कर दी।
इससे पहले 4 अप्रैल को भी साकेत कोर्ट उनकी जमानत याचिका खारिज कर चुका था। यह लगातार दूसरी बार है जब अदालत ने उन्हें ज़मानत देने से इनकार किया है।
गिरफ्तारी और चार्जशीट की पृष्ठभूमि
ईडी ने जवाद अहमद सिद्दीकी को 24 मार्च को तिहाड़ जेल से गिरफ्तार किया था। यह उनके विरुद्ध दर्ज दूसरा मनी लॉन्ड्रिंग मामला है। एजेंसी 17 जनवरी को ही उनके खिलाफ चार्जशीट दाखिल कर चुकी है।
गौरतलब है कि यह कार्रवाई अल-फलाह चैरिटेबल ट्रस्ट, अल-फलाह यूनिवर्सिटी और उनसे संबद्ध संस्थाओं से जुड़ी मनी लॉन्ड्रिंग की व्यापक जांच के तहत की गई है। ईडी के अनुसार, अल-फलाह ग्रुप की जांच 10 नवंबर को दिल्ली के लाल किले के पास हुए धमाके से जुड़े मामले में भी चल रही है।
जमीन धोखाधड़ी के आरोप
ईडी का आरोप है कि जवाद अहमद सिद्दीकी ने कुछ अन्य लोगों के साथ मिलकर फर्जी दस्तावेज तैयार करवाए और उनके जरिए दक्षिण-पूर्वी दिल्ली के मदनपुर खादर गाँव में स्थित खसरा नंबर 792 की लगभग 1.146 एकड़ जमीन को अवैध तरीके से अपने नाम कराया। इस जमीन की मौजूदा बाज़ार कीमत लगभग ₹45 करोड़ बताई जा रही है।
ईडी के अनुसार, दस्तावेजों में इस जमीन की कीमत केवल ₹75 लाख दर्शाई गई, जबकि वास्तविक लेन-देन इससे कहीं अधिक होने की आशंका है। जांच एजेंसियां अब पूरे वित्तीय लेन-देन का पता लगाने और इस मामले में शामिल अन्य लोगों व संपत्तियों की पहचान करने में जुटी हैं।
आगे क्या होगा
जांच एजेंसी के अनुसार मामले में अभी जांच जारी है और अतिरिक्त सबूत एकत्रित किए जा रहे हैं। यह मामला न केवल वित्तीय धोखाधड़ी बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े पहलुओं को भी छूता है, जिससे आने वाले समय में इसकी जांच और अधिक व्यापक होने की संभावना है।