योगी सरकार का समाज कल्याण विभाग: IGRS पर 92.6% शिकायतें निपटाईं, 3168 जरूरतमंदों को सीधी मदद
सारांश
Key Takeaways
उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार के समाज कल्याण विभाग ने 2 मई 2025 को जारी आँकड़ों के अनुसार इंटीग्रेटेड ग्रिवांस रिड्रेसल सिस्टम (IGRS) पोर्टल पर दर्ज 9,604 शिकायतों में से 8,896 यानी 92.6 प्रतिशत का सफल निस्तारण किया है। विभागीय अधिकारियों के अनुसार यह उपलब्धि प्रशासनिक जवाबदेही और डिजिटल शासन की दिशा में एक उल्लेखनीय कदम है।
मुख्य उपलब्धियाँ और आँकड़े
IGRS पोर्टल पर 92.6% निस्तारण दर के साथ-साथ ऑफलाइन माध्यम से प्राप्त शिकायतों में भी विभाग ने बेहतर प्रदर्शन किया है। पिछले दो वर्षों में ऑफलाइन माध्यम से आई 1,035 शिकायतों में से 889 का समाधान किया गया, जो 85.9 प्रतिशत की सफलता दर दर्शाता है। इसके अतिरिक्त पिछले एक वर्ष में 3,168 जरूरतमंदों तक सीधी सहायता पहुँचाई गई है, जबकि केवल पिछले चार महीनों में 991 लोगों को विभिन्न योजनाओं का लाभ दिया गया।
वृद्धावस्था पेंशन और छात्रवृत्ति को प्राथमिकता
विभागीय अधिकारियों ने बताया कि वृद्धावस्था पेंशन और छात्रवृत्ति जैसी योजनाओं से जुड़े मामलों को प्राथमिकता के आधार पर निपटाया जा रहा है। इससे बुजुर्गों और छात्रों को समय पर आर्थिक सहायता मिल रही है, जो उनके जीवन में स्थिरता और सुरक्षा प्रदान कर रही है। विभाग की कोशिश है कि किसी भी पात्र व्यक्ति को योजना का लाभ पाने में देरी या परेशानी न हो।
डिजिटल और ऑफलाइन दोनों माध्यमों से जुड़ाव
IGRS पोर्टल के माध्यम से नागरिक घर बैठे शिकायत दर्ज कर उसकी प्रगति की निगरानी कर सकते हैं, जिससे सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाने की आवश्यकता कम हुई है। गौरतलब है कि ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल पहुँच सीमित होने के कारण ऑफलाइन लिखित शिकायत प्रक्रिया को भी सक्रिय रखा गया है, जिससे दूर-दराज के लोग भी अपनी समस्याओं का समाधान करवा पा रहे हैं।
आम जनता पर असर
आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लिए ये योजनाएँ विशेष रूप से सहायक साबित हो रही हैं। विभागीय आँकड़े बताते हैं कि योजनाएँ केवल कागजों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वास्तविक रूप से लोगों के जीवन में बदलाव ला रही हैं। यह ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब राज्य में सामाजिक सुरक्षा योजनाओं की पहुँच और पारदर्शिता पर लगातार सवाल उठते रहे हैं।
आगे की राह
समाज कल्याण विभाग का लक्ष्य है कि शिकायत निस्तारण की यह गति आगे भी बनी रहे और अधिक से अधिक पात्र लाभार्थियों तक योजनाओं का लाभ पहुँचे। विभागीय अधिकारियों के अनुसार डिजिटल माध्यमों के विस्तार और ऑफलाइन प्रक्रियाओं को बनाए रखने की दोहरी रणनीति आगे भी जारी रहेगी।