जवाद अहमद सिद्दीकी की न्यायिक हिरासत 17 अप्रैल तक बढ़ी, मनी लॉन्ड्रिंग केस में नई जानकारी
सारांश
Key Takeaways
- जवाद अहमद सिद्दीकी की जमानत याचिका खारिज
- न्यायिक हिरासत बढ़ी 17 अप्रैल तक
- मनी लॉन्ड्रिंग का मामला
- जांच जारी, सबूत इकट्ठा करने की प्रक्रिया
- फर्जी दस्तावेजों का उपयोग कर भूमि अधिग्रहण का आरोप
नई दिल्ली, 4 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। मनी लॉन्ड्रिंग के एक मामले में अल-फलाह यूनिवर्सिटी ग्रुप के चेयरमैन जवाद अहमद सिद्दीकी की जमानत याचिका को साकेत कोर्ट ने शनिवार को खारिज कर दिया है। कोर्ट ने सिद्दीकी को 17 अप्रैल तक न्यायिक हिरासत में भेजने का आदेश दिया है।
जानकारी के अनुसार, मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े मामले में जवाद अहमद सिद्दीकी की पुलिस हिरासत समाप्त होने के बाद उन्हें एएसजे शीतल चौधरी के समक्ष पेश किया गया। जांच एजेंसी ने कहा कि सिद्दीकी के खिलाफ अभी भी जांच जारी है और सबूत इकट्ठा करने के लिए उन्हें न्यायिक हिरासत में रखे जाने की आवश्यकता है। इसके बाद कोर्ट ने उन्हें हिरासत में भेजने का निर्णय लिया।
जवाद को प्रवर्तन निदेशालय ने 24 मार्च को तिहाड़ जेल से गिरफ्तार किया था। यह उनके खिलाफ दर्ज मनी लॉन्ड्रिंग का दूसरा मामला है।
गौरतलब है कि यह कार्रवाई अल फलाह चैरिटेबल ट्रस्ट, अल-फलाह यूनिवर्सिटी और उनसे जुड़े अन्य संस्थानों के मनी लॉन्ड्रिंग मामले की जांच के तहत की गई है। अल-फलाह ग्रुप की जांच 10 नवंबर को दिल्ली के लाल किले के पास हुए धमाके से भी जुड़ी हुई है।
ईडी के अनुसार, एजेंसी ने पहले ही 17 जनवरी को जवाद अहमद सिद्दीकी के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी। अब तक की जांच में पता चला है कि जवाद ने धोखाधड़ी के माध्यम से कुछ फर्जी दस्तावेजों का उपयोग करके जमीन प्राप्त की थी।
एजेंसी का आरोप है कि जवाद ने अन्य व्यक्तियों के साथ मिलकर फर्जी कागजात तैयार कराए और इनसे दक्षिण-पूर्वी दिल्ली के मदानपुर खादर गांव में खसरा नंबर 792 की जमीन को अवैध रूप से अपने नाम कराया। यह जमीन लगभग 1.146 एकड़ है और इसकी मौजूदा कीमत करीब 45 करोड़ रुपए बताई जा रही है।
ईडी ने यह भी कहा कि दस्तावेजों में जमीन की कीमत 75 लाख रुपए दिखायी गई है, जबकि असली लेन-देन इससे कहीं अधिक होने की संभावना है। जांच एजेंसियां अब पूरे पैसों के लेन-देन की जांच और इस मामले में शामिल अन्य व्यक्तियों व संपत्तियों की पहचान करने में जुटी हैं।