काशी का प्राचीन शिवालय: जहां श्रीराम ने रावण वध के बाद महादेव के दर्शन किए

Click to start listening
काशी का प्राचीन शिवालय: जहां श्रीराम ने रावण वध के बाद महादेव के दर्शन किए

सारांश

काशी में स्थित कर्दमेश्वर महादेव मंदिर का ऐतिहासिक महत्व अद्वितीय है। भगवान राम के रावण वध के बाद यहाँ दर्शन करने की मान्यता है। यह मंदिर न केवल धार्मिक बल्कि सांस्कृतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है।

Key Takeaways

  • काशी का कर्दमेश्वर महादेव मंदिर प्राचीन और ऐतिहासिक है।
  • भगवान राम ने यहाँ रावण वध के बाद दर्शन किए थे।
  • मंदिर में निःशुल्क प्रवेश है और कई धार्मिक अनुष्ठान होते हैं।
  • यह मंदिर पंचकोशी परिक्रमा का पहला पड़ाव है।
  • मंदिर की दीवारों पर अद्भुत नक्काशी है।

वाराणसी, 5 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। देवताओं के देवता महादेव की नगरी काशी में हर स्थान पर उनका निवास माना जाता है। हर मंदिर की अपनी एक विशेष दिव्यता और अद्भुत भक्ति से भरी मान्यता है। महादेव को समर्पित एक ऐसा ही मंदिर है, जो उनके आराध्य मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीरामचंद्र से भी जुड़ा है।

काशी के दक्षिणी हिस्से में स्थित श्री कर्दमेश्वर महादेव मंदिर एक प्राचीन शिवालय है। यह मंदिर मुगलों के 17वीं शताब्दी के विनाशकारी आक्रमणों से बच गया और आज भी अपनी मूल गरिमा को बनाए हुए है। मान्यता है कि भगवान श्रीराम ने लंका विजय के बाद रावण वध के बाद ब्रह्महत्या दोष से मुक्ति पाने के लिए यहां महादेव के दर्शन किए थे।

कर्दमेश्वर महादेव मंदिर काशी का सबसे पुराना संरक्षित शिव मंदिर माना जाता है। कर्दम ऋषि ने यहां शिवलिंग की स्थापना की थी, इसलिए इसका नाम कर्दमेश्वर पड़ा। यह काशी पंचकोशी परिक्रमा (२५ किलोमीटर लंबी पवित्र यात्रा) का पहला प्रमुख पड़ाव है। तीर्थयात्री यहीं से अपनी यात्रा आरंभ करते हैं। मान्यता है कि मंदिर के शिखर के दर्शन मात्र से व्यक्ति देव ऋण से मुक्त हो जाता है।

किंवदंतियों के अनुसार, रावण वध के बाद भगवान राम को ब्रह्महत्या का दोष लगा। गुरु वशिष्ठ की सलाह पर राम-सीता यहां आए और महादेव के दर्शन व परिक्रमा करने के बाद उन्हें पाप से मुक्ति मिली।

यह मंदिर नागर शैली में बना है और पंचरथ डिज़ाइन का अद्भुत उदाहरण है। इसमें एक चबूतरा है, जिस पर गर्भगृह, प्रदक्षिणा पथ, अंतराल, महामंडप और अर्द्धमंडप स्थित हैं। मंदिर का मुख पूर्व की ओर है। दीवारों पर दिव्य नर्तकियों, संगीतकारों, सांपों और पौराणिक जीवों की सुंदर नक्काशी है, जो ६वीं-७वीं शताब्दी की मानी जाती है। मंदिर के निकट कर्दम कुंड है। मान्यता है कि यह कुंड कर्दम ऋषि के आंसुओं से बना है, जिसे १८वीं शताब्दी में बंगाल की रानी भवानी ने ठीक कराया।

मंदिर का ऐतिहासिक महत्व भी है। ११वीं शताब्दी में गहड़वाला वंश के चंद्रदेव ने आक्रमण के बाद काशी को पुनः स्थापित किया। यह मंदिर १२वीं शताब्दी का माना जाता है और मुगलों के विनाश से बचकर १७वीं सदी तक अपनी मूल संरचना बनाए रखने वाला काशी का एकमात्र मंदिर है। उत्तर प्रदेश सरकार ने इसे प्राचीन व ऐतिहासिक स्मारक संरक्षण अधिनियम, १९५६ के तहत संरक्षित किया है।

मंदिर प्रतिदिन सूर्योदय से सूर्यास्त तक खुला रहता है। सुबह-शाम और रात में आरती होती है। प्रवेश निःशुल्क है। दर्शन के लिए सुबह या शाम का समय सबसे अच्छा माना जाता है।

मंदिर वैष्णो नगर कॉलोनी, कंचनपुर, कंदवा क्षेत्र में स्थित है। वाराणसी शहर से ऑटो, टैक्सी या प्राइवेट वाहन से आसानी से पहुंचा जा सकता है। वहीं, वाराणसी जंक्शन या लाल बहादुर शास्त्री एयरपोर्ट से टैक्सी लेकर लगभग ३०-४५ मिनट में मंदिर तक पहुंचा जा सकता है।

Point of View

बल्कि भारतीय संस्कृति की समृद्धि का प्रतीक भी है।
NationPress
10/04/2026

Frequently Asked Questions

कर्दमेश्वर महादेव मंदिर कब स्थापित हुआ?
यह मंदिर 12वीं शताब्दी का माना जाता है।
क्या मंदिर में प्रवेश शुल्क है?
नहीं, मंदिर में प्रवेश निःशुल्क है।
मंदिर में आरती कब होती है?
मंदिर में सुबह, शाम और रात में आरती होती है।
मंदिर तक पहुंचने का सबसे अच्छा तरीका क्या है?
वाराणसी शहर से ऑटो, टैक्सी या प्राइवेट वाहन से आसानी से पहुंचा जा सकता है।
कर्दमेश्वर महादेव मंदिर का क्या महत्व है?
यह मंदिर भगवान राम के रावण वध के बाद के दर्शन का स्थल है और धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है।
Nation Press