अल फलाह ट्रस्ट मनी लॉन्ड्रिंग केस: दिल्ली हाईकोर्ट ने जवाद अहमद सिद्दीकी की जमानत याचिका पर ईडी से माँगी स्टेटस रिपोर्ट
सारांश
मुख्य बातें
दिल्ली हाईकोर्ट ने अल फलाह ट्रस्ट मनी लॉन्ड्रिंग केस में आरोपी जवाद अहमद सिद्दीकी की अंतरिम जमानत याचिका पर प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) से स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया है। सिद्दीकी ने अपनी पत्नी के कैंसर उपचार का हवाला देते हुए छह हफ्ते की अंतरिम जमानत की माँग की है। निचली अदालत से जमानत अर्जी खारिज होने के बाद उन्होंने हाईकोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया था।
हाईकोर्ट में सुनवाई का घटनाक्रम
बुधवार, 17 जून को दिल्ली हाईकोर्ट में इस याचिका पर सुनवाई हुई। ईडी के वकील ने याचिका का कड़ा विरोध करते हुए अदालत को बताया कि जवाद अहमद सिद्दीकी की यह याचिका सुनवाई योग्य नहीं है। हालाँकि, अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद ईडी को औपचारिक स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने का आदेश दिया।
मामले की पृष्ठभूमि: ₹47.76 करोड़ की अपराध संपत्ति
यह मामला मदनपुर खादर गाँव में स्थित खसरा संख्या 792 वाली भूमि के कथित धोखाधड़ीपूर्ण अधिग्रहण से जुड़ा है। जाँच एजेंसी के अनुसार, इस मामले में अपराध से अर्जित संपत्ति का मूल्य लगभग ₹47.76 करोड़ आँका गया है।
इससे पहले 27 मई को ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (पीएमएलए) 2002 के प्रावधानों के तहत ₹45.84 करोड़ की संपत्ति जब्त की थी।
आरोपों की प्रकृति: जाली हस्ताक्षर और बैंकिंग का दिखावा
जाँच में सामने आया है कि जवाद अहमद सिद्दीकी ने कथित तौर पर अन्य आरोपियों की मिलीभगत से भूमि के मूल मालिकों के हस्ताक्षर और अँगूठे के निशान जाली बनाने की साजिश रची थी। इस अवैध कब्जे को वैध लेनदेन के रूप में दिखाने के लिए बैंकिंग लेनदेन का एक दिखावटी ढाँचा भी खड़ा किया गया था।
जाँच एजेंसी के अनुसार, इस अवैध भूमि अधिग्रहण के लिए सिद्दीकी की ओर से भारी मात्रा में नकद लेनदेन भी किया गया था, जो मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों की केंद्रीय कड़ी है।
आगे क्या होगा
ईडी की स्टेटस रिपोर्ट दाखिल होने के बाद दिल्ली हाईकोर्ट अंतरिम जमानत याचिका पर अगली सुनवाई करेगा। यह मामला इस लिहाज़ से भी अहम है क्योंकि अदालत को यह तय करना होगा कि मानवीय आधार — पत्नी की गंभीर बीमारी — पीएमएलए के कड़े प्रावधानों के बीच जमानत का आधार बन सकता है या नहीं।