24 सितंबर 2026
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टीएस सिंह देव की माँग: मतदाता सूची में बदलाव सार्वजनिक हों, फॉर्म-6 और ECI के कामकाज की जाँच हो

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टीएस सिंह देव की माँग: मतदाता सूची में बदलाव सार्वजनिक हों, फॉर्म-6 और ECI के कामकाज की जाँच हो

सारांश

कांग्रेस नेता टीएस सिंह देव ने एक साथ दो मोर्चों पर सरकार और चुनाव आयोग को घेरा — मतदाता सूची में कथित हेरफेर और बिहार में बढ़ते एनकाउंटर। उनका आरोप है कि ECI में 10 महीनों में 14 बार सदस्यों को दरकिनार कर फैसले लिए गए।

मुख्य बातें

टीएस सिंह देव ने माँग की कि चुनाव के दौरान मतदाता सूची में नाम काटने-जोड़ने की जानकारी सार्वजनिक की जाए।
फॉर्म-6 में कथित बदलावों की निष्पक्ष जाँच की माँग — यह स्पष्ट हो कि बदलाव क्यों और किसने किए।
मीडिया रिपोर्टों के हवाले से दावा किया कि 10 महीनों में 14 बार चुनाव आयोग के दो सदस्यों को बिना सलाह लिए फैसले लिए गए।
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की कार्यशैली पर सवाल, आयोग को तीन सदस्यीय बहुमत-आधारित संस्था बताया।
बिहार में कथित एनकाउंटर पर कहा कि न्यायिक प्रक्रिया के बाहर सजा देना कानून के शासन के विरुद्ध है।

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और छत्तीसगढ़ के पूर्व उप मुख्यमंत्री टीएस सिंह देव ने 24 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में चुनाव आयोग के कामकाज पर तीखे सवाल उठाए और माँग की कि चुनाव के दौरान मतदाता सूची में नाम काटने और जोड़ने से जुड़ी विस्तृत जानकारी सार्वजनिक की जाए। उन्होंने यह भी कहा कि फॉर्म-6 में कथित बदलावों की निष्पक्ष जाँच होनी चाहिए।

मतदाता सूची और फॉर्म-6 पर सवाल

सिंह देव ने कहा कि चुनाव के समय जिस तरह से एक राजनीतिक दल के फायदे के लिए मतदाता सूची में हेरफेर का आरोप है, वह लोकतंत्र के लिए चिंताजनक है। उन्होंने स्पष्ट किया कि फॉर्म-6 में कथित बदलावों की जाँच में यह पता लगाया जाना चाहिए कि ये बदलाव क्यों किए गए और किसने किए। उनके अनुसार, इस तरह की पारदर्शिता से चुनाव प्रक्रिया में मतदाताओं का विश्वास बहाल होगा।

चुनाव आयोग की कार्यशैली पर आरोप

विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और भारतीय चुनाव आयोग (ECI) के कामकाज को लेकर चल रहे विवाद पर सिंह देव ने कहा कि यह मामला एक संवैधानिक संस्था पर किसी व्यक्ति के एकाधिकार जैसा प्रतीत होता है। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के कार्य-व्यवहार पर सवाल उठाते हुए कहा कि यह आयोग के लिए तय कानूनी प्रावधानों से अलग दिखता है।

उन्होंने जोर देकर कहा कि चुनाव आयोग तीन सदस्यों की संस्था है, जिसे आम सहमति या बहुमत के आधार पर निर्णय लेने चाहिए। मीडिया रिपोर्टों का हवाला देते हुए उन्होंने दावा किया कि तीन में से दो सदस्यों ने बार-बार कहा कि उनसे सलाह लिए बिना फैसले लिए जा रहे हैं। उनके अनुसार, मीडिया रिपोर्टों में 10 महीनों में 14 बार ऐसी स्थिति का उल्लेख किया गया है।

सिंह देव ने कहा, 'यदि आयोग के सदस्यों को महत्वपूर्ण फैसलों की जानकारी मीडिया के माध्यम से मिल रही है तो इससे निर्णय प्रक्रिया को लेकर गंभीर सवाल उठते हैं।' यह ऐसे समय में आया है जब SIR को लेकर विपक्षी दल पहले से ही चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठा रहे हैं।

बिहार एनकाउंटर पर तीखी प्रतिक्रिया

बिहार में कथित एनकाउंटर के मुद्दे पर सिंह देव ने कहा कि देश में कानून और न्यायिक प्रक्रिया मौजूद है, और दोषी पाए जाने वाले लोगों को उसी प्रक्रिया के तहत सजा मिलनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि बिहार में अब एनकाउंटर के ज़रिए सजा देने की प्रवृत्ति बढ़ रही है, जो कानून के शासन के अनुरूप नहीं है। उनके अनुसार, 'किसी भी व्यक्ति को कानून हाथ में लेने का अधिकार नहीं है।'

जमुई छेड़छाड़ मामले पर प्रतिक्रिया

जमुई छेड़छाड़ मामले पर सिंह देव ने कहा कि देश में इस तरह की घटनाओं का होना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने माँग की कि ऐसे मामलों में कड़ी कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए। गौरतलब है कि यह बयान ऐसे समय में आया है जब बिहार में कानून-व्यवस्था और न्यायिक प्रक्रिया को लेकर राष्ट्रीय बहस तेज हो गई है।

आगे क्या होगा

सिंह देव के इन बयानों से कांग्रेस ने चुनाव आयोग और बिहार सरकार दोनों को एक साथ घेरने की कोशिश की है। यह देखना होगा कि क्या विपक्ष इन माँगों को लेकर संसद या न्यायपालिका का दरवाज़ा खटखटाता है। चुनाव आयोग की ओर से अभी तक इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन दोनों को एक साथ उठाना यह दर्शाता है कि कांग्रेस 'कानून के शासन' को अपना केंद्रीय आख्यान बनाने की कोशिश कर रही है। असली परीक्षा यह है कि क्या ये माँगें संसदीय प्रस्ताव या न्यायिक याचिका का रूप लेती हैं — या केवल प्रेस-बाइट तक सीमित रहती हैं।
RashtraPress
24 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

टीएस सिंह देव ने मतदाता सूची और फॉर्म-6 को लेकर क्या माँग की है?
सिंह देव ने माँग की है कि चुनाव के दौरान मतदाता सूची में नाम काटने और जोड़ने की विस्तृत जानकारी सार्वजनिक की जाए और फॉर्म-6 में कथित बदलावों की जाँच हो। उनके अनुसार यह स्पष्ट होना चाहिए कि ये बदलाव क्यों और किसने किए।
चुनाव आयोग के कामकाज पर सिंह देव के क्या आरोप हैं?
सिंह देव ने मीडिया रिपोर्टों का हवाला देते हुए दावा किया कि 10 महीनों में 14 बार चुनाव आयोग के दो सदस्यों को बिना सलाह लिए फैसले लिए गए। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की कार्यशैली को संवैधानिक प्रावधानों से अलग बताया।
बिहार एनकाउंटर पर कांग्रेस नेता का क्या कहना है?
सिंह देव ने कहा कि बिहार में एनकाउंटर के ज़रिए सजा देने की बढ़ती प्रवृत्ति कानून के शासन के अनुरूप नहीं है। उनके अनुसार दोषियों को न्यायिक प्रक्रिया के तहत ही सजा मिलनी चाहिए।
SIR (विशेष गहन पुनरीक्षण) विवाद क्या है?
विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) चुनाव आयोग की वह प्रक्रिया है जिसके तहत मतदाता सूची की समीक्षा होती है। विपक्ष का आरोप है कि इस प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी है और इसका इस्तेमाल एक राजनीतिक दल के फायदे के लिए किया गया।
जमुई छेड़छाड़ मामले पर सिंह देव ने क्या कहा?
सिंह देव ने जमुई छेड़छाड़ मामले को बेहद दुर्भाग्यपूर्ण बताया और माँग की कि ऐसे मामलों में कड़ी कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए।
राष्ट्र प्रेस
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