फॉर्म 6 विवाद: उदित राज ने चुनाव आयोग पर झूठ का आरोप लगाया, तीनों आयुक्तों को निलंबित करने की माँग
सारांश
मुख्य बातें
कांग्रेस नेता उदित राज ने 27 अक्टूबर 2026 को भारत निर्वाचन आयोग (ECI) पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि आयोग ने मतदाता सूची में नाम जोड़ने हेतु उपयोग किए जाने वाले 'फॉर्म 6' में बदलावों को लेकर परस्पर विरोधाभासी बयान दिए हैं। उन्होंने माँग की कि सर्वोच्च न्यायालय इस मामले में तत्काल और कड़ी कार्रवाई करे, अन्यथा न्यायपालिका की विश्वसनीयता और निष्पक्षता पर गंभीर प्रश्नचिह्न लग जाएगा।
विरोधाभासी बयान और आरोप
उदित राज के अनुसार, चुनाव आयोग ने पहले दावा किया था कि 'फॉर्म 6' में किए गए बदलावों पर सर्वोच्च न्यायालय की सहमति थी, लेकिन न्यायालय ने इससे स्पष्ट रूप से इनकार कर दिया। इसके बाद आयोग ने एक हलफनामे में कहा कि 'फॉर्म 6' में कोई बदलाव किया ही नहीं गया — जो पहले के बयान के एकदम उलट है।
राज ने कहा, 'चुनाव आयोग ने पहले दावा किया था कि 'फॉर्म 6' में किए गए बदलावों पर सुप्रीम कोर्ट की सहमति थी, लेकिन कोर्ट ने बाद में इससे इनकार कर दिया। वहीं, कल चुनाव आयोग ने जो हलफनामा दायर किया, उसमें कहा गया कि 'फॉर्म 6' में कोई बदलाव नहीं किया गया है। ये दोनों बयान एक-दूसरे के विपरीत हैं।'
तीनों आयुक्तों के निलंबन की माँग
कांग्रेस नेता ने तर्क दिया कि ये दोनों विरोधाभासी बयान पहले से ही न्यायालय के सामने हैं, इसलिए अलग से किसी साक्ष्य की आवश्यकता नहीं है। उनका कहना था, 'तीनों चुनाव आयुक्तों को तुरंत निलंबित किया जाना चाहिए। भले ही यह माना जाए कि फैसला सर्वसम्मति से लिया गया था, यह किसी गैरकानूनी काम को उचित नहीं ठहराता।'
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि 'फॉर्म 6' में संशोधन का अधिकार केवल संसद के पास है, न कि चुनाव आयोग के पास — और इस अधिकार का उल्लंघन किया गया है।
सर्वोच्च न्यायालय में सुनवाई
मंगलवार को सर्वोच्च न्यायालय कई याचिकाओं पर सुनवाई करने वाला है, जिनमें मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के कामकाज को चुनौती दी गई है। साथ ही उनके खिलाफ विशेष जांच दल (SIT) से जांच की माँग और मतदाता सूची के राष्ट्रव्यापी 'विशेष गहन पुनरीक्षण' (SIR) की वैधता पर भी सवाल उठाए गए हैं।
यह सुनवाई भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ करेगी, जिसमें जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना भी शामिल हैं।
कांग्रेस की प्रतिक्रिया
कांग्रेस सांसद जेबी माथर ने भी इस मामले पर प्रतिक्रिया दी है, हालाँकि उनका विस्तृत बयान अभी सामने नहीं आया है। राज ने यह भी कहा कि आज की सुनवाई से तय होगा कि सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश कितने स्वतंत्र और साहसी हैं।
आगे क्या होगा
गौरतलब है कि यह विवाद ऐसे समय में उभरा है जब देश में चुनावी प्रक्रियाओं की पारदर्शिता को लेकर बहस पहले से ही तेज़ है। सर्वोच्च न्यायालय का आज का रुख न केवल चुनाव आयोग की जवाबदेही तय करेगा, बल्कि 'फॉर्म 6' में बदलाव की संवैधानिक वैधता का भी परीक्षण करेगा। यह मामला आने वाले चुनावों में मतदाता पंजीकरण प्रक्रिया की दिशा तय कर सकता है।